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एमएमटीसीः सबसे बड़ा सुनार

यह देश के लिए सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. यह कोयला, लौह अयस्क और निर्मित कृषि तथा औद्योगिक उत्पादों का निर्यात करती है.

खरा सौदा दिल्ली में एमएमटीसी का एक शोरूम
खरा सौदा दिल्ली में एमएमटीसी का एक शोरूम
अपडेटेड 21 अगस्त , 2017

एमएमटीसीः स्थापनाः 1963

शुरुआत

यह देश के लिए सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. यह कोयला, लौह अयस्क और निर्मित कृषि तथा औद्योगिक उत्पादों का निर्यात करती है. देश की इस सबसे बड़ी ट्रेडिंग कंपनी का पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ओशियाना और अमेरिका में नेटवर्क है. यह सर्राफा व्यापार की सबसे बड़ी कंपनी है. एमएमटीसी को 26 सितंबर 1963 में स्थापित किया गया. राज्य व्यापार निगम की प्रत्यक्ष व्यापार गतिविधियां तेजी से बढऩे और खनिज अयस्कों के निर्यात पर ज्यादा जोर दिए जाने के साथ ही सरकार ने इस कॉर्पोरेशन को दो हिस्से में बांटकर एक ऐसी कंपनी बनाई जो खासकर खनिज पदार्थों और धातुओं के निर्यात पर ध्यान दे. इस तरह एमएमटीसी वजूद में आया.

इस कंपनी ने भारत के निर्यात को खनिज पदार्थों से परे विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सोने की शुद्धता के लिए जानी जाने लगी. इसने भारतीय लौह अयस्क के लिए यूरोपीय बाजार को खोला. इसने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए विशेष आयात लाइसेंस के तहत सोने और चांदी का आयात किया और हैदराबाद तथा विजाग में नए वॉल्ट खोले. यह इकलौती ऐसी सरकारी कंपनी बन गई जिसने जेवरात की बिक्री में कदम रखा और इस तरह उपभोक्ताओं को वाजिब कीमत पर खरा माल मुहैया कराया. एमएमटीसी ने दुनिया के साथ भारत के व्यापार का रास्ता सहज किया. इसने भारत के लिए बेहद जरूरी विदेशी मुद्रा इकट्ठा करने में बड़ा योगदान किया, जिससे देश को कई वित्तीय परेशानियों की घड़ी में बड़ी राहत मिली.

कारोबार में अपार सफलता

एमएमटीसी का वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 8,000 करोड़ रु. का सोना आयात करने का लक्ष्य है. इसने 2015-16 में 6,500 करोड़ रु. का सोना आयात किया था. यह गोल्ड मोनिटाइजेशन योजना के दौरान जमा हुए सोने की नीलामी की तैयारी कर रही है. इसने सोने के डिजिटल कारोबार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पेटीएम के साथ साझीदारी भी की है. 

 

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