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कोंकण रेलवे का हरित गलियारा

कोंकण रेलवे के निर्माण के लिए ई. श्रीधरन इसलिए तैयार हो सके न्न्योंकि वे पहले रामेश्वरम में बने पंबन पुल के पुनर्निर्माण का तजुर्बा ले चुके थे.

महाराष्ट्र के चिपलूं में कोंकण रेलवे सर्पिलाकार वशिष्ठी नदी के किनारे से गुजरती हुई
महाराष्ट्र के चिपलूं में कोंकण रेलवे सर्पिलाकार वशिष्ठी नदी के किनारे से गुजरती हुई
अपडेटेड 23 अगस्त , 2017

कोंकण रेलवेः स्थापनाः 1990

क्या आप जानते हैं ?

कोंकण रेलवे के निर्माण के लिए ई. श्रीधरन इसलिए तैयार हो सके न्न्योंकि वे पहले रामेश्वरम में बने पंबन पुल के पुनर्निर्माण का तजुर्बा ले चुके थे.

प्रस्थान-बिंदु

यह रेल लिंक प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता नाथ बापू पै के दिमाग की उपज था, जिन्होंने सबसे पहले इसे साठ के दशक में सामने रखा. पूर्व रेल मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस और मधु दंडवते ने इस विचार में थोड़ा सुधार किया, लेकिन 1988 में दक्षिणी रेलवे के अंतिम स्थल सर्वेक्षण रिपोर्ट जमा किए जाने के बाद ही कोंकण रेलवे नाम की स्वतंत्र इकाई अस्तित्व में आ सकी.

इसका प्रबंध निदेशक ई. श्रीधरन को बनाया गया. महाराष्ट्र में पडऩे वाले लाइन के आधे हिस्से का कोई सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं था, तो उन्हें सिफर से शुरुआत करनी पड़ी. इसके अलावा कोंकण के उर्वर इलाके और सहयाद्रि के पठारों में जमीन अधिग्रहण का काम भी काफी जटिल था क्योंकि उस वक्त तक मुआवजे का कोई तार्किक कानून अस्तित्व में नहीं था.

प्रक्रिया रिकॉर्ड आठ वर्ष के भीतर कोंकण रेलवे का काम पूरा हो गया. अच्छी बात यह रही कि इसके लिए केंद्र सरकार से कोई पैसा नहीं मांगा गया बल्कि पैसे जुटाए गए. आज भी कोंकण रेलवे विस्तार के चरण में है और वृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहा है. दो साल से पटरी के दोहरीकरण और विद्युतीकरण की कोशिशें जारी हैं.

मुंबई और मंगलूरू के बीच 740 किमी लंबी रेल लाइन महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक से होकर गुजरती है जिसमें बाहर का नजारा शानदार होता है. कुल 91 सुरंगों, 129 पुलों और 4,000 मिमी से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र से गुजरने वाली इस लाइन को दुरुस्त बनाए रखना एक चुनौती भरा काम है.

अब आगे

परियोजना के आरंभ में पैसे जुटाने के लिए करमुक्त पब्लिक बॉन्ड जारी किए गए. आज वित्त उद्योग ने 2015 से शुरू हुए उन्नयन कार्य में दिलचस्पी ले ली है जिसकी अनुमानित लागत 11,000 करोड़ रु. है. कोंकण रेलवे वित्तीय रूप से स्वस्थ है और अपने नियमित परिचालन से शुद्ध मुनाफा कमा रही है. चेयरमैन और एमडी संजय गुप्ता के मुताबिक, ''हमारा परिचालन अनुपात 80 फीसदी है (एक रुपया कमाने के लिए 80 पैसे का खर्च). हमारे पास जम्मू-कश्मीर की रेलवे परियोजना और एनटीपीसी की दो परियोजनाएं हैं जिससे कि हम पैसा जुटा पाते  हैं."

 

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