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लग्जरी विशेष: शानो-शौकत की टूटती सीमाएं

एसोचेम-केपीएमजी के एक अध्ययन के मुताबिक, भारतीय विलासिता सामान का बाजार 2013 में 30 फीसदी की दर से बढ़ा और 2016 तक यह 20 फीसदी और बढ़कर 14 अरब डॉलर का हो सकता है.

अपडेटेड 19 अक्टूबर , 2015

एक क्रिस्टल (बिल्कुल पारदर्शी) बांसुरी में एक बोतल से बुलबुले बह रहे हैं, जिनकी कीमत दसियों हजार में है, एक दूसरे टाइम जोन में एक लकदक जोड़ा अपने निजी जेट से  उतरता, खूबसूरत चमकती रेत में पैर टिकाता है और कुछ दिनों के लिए वह टाइम ग्रिड से बाहर चला जाना चाहता है. पेरिस के शैंप एलिसी में टॉप ब्रांडों की एक दुकान में रहस्यमय बिरकिन के लिए इंतजार की फेहरिस्त काफी लंबी है. इनमें हर उत्पाद और एहसास का शानो-शौकत से एक खास किस्म का रिश्ता है, फिर कोई आदमी इसे एक ही तरीके से न हासिल कर सकता है, न छोड़ सकता है. भारत का उपभोक्तावादी या शानो-शौकत का दीवाना समाज ऐसे शाही अंदाज को देखकर ललचा उठेगा लेकिन आज भी शानो-शौकत का यह संसार उसके लिए पराया है. उसे हासिल कर पाना आसान नहीं है.

एसोचेम-केपीएमजी के एक अध्ययन के मुताबिक, भारतीय विलासिता सामान का बाजार 2013 में 30 फीसदी की दर से बढ़ा और 2016 तक यह 20 फीसदी और बढ़कर 14 अरब डॉलर का हो सकता है. इसकी एक वजह अमीरों की बढ़ती बिरादरी है, खासकर जो जवान हैं, दुनिया की सैर कर चुके हैं और हमेशा अपने से एक कदम दूर रहने वाली चीजों को हासिल करने की क्वाहिश रखते हैं.

विलासिता और शानो-शौकत हासिल करने की यह क्वाहिश लगातार बदल रही है लेकिन शानो-शौकत की सीढ़ी चढऩे वाले हर शक्चस के पीछे कुछ दूसरे अगली सीढ़ी पर चढऩे के इंतजार में हैं. इस तरह कुछ सबसे बड़े ब्रांड के खास उत्पादों को हासिल कर अपनी नाक ऊंची करते हैं तो कुछ और लोग कोई ब्रांडेड और महंगी-सी लगने वाली चीज हासिल करने की उतावली में हैं. आज हम उम्दा से उम्दा हासिल करने की उसी चाहत के शिकार हैं जो एक दशक पहले चीन के लग्जरी मार्केट में दिखाई पड़ती थी.
हर ओर ऐसी गहमागहमी दिख रही है, जो पहले नहीं देखी गई. बरबेरी जैसे ब्रांड अपने ग्राहकों से टेक्नोलॉजी के जरिए संपर्क बनाते हैं तो कुछ टिकाऊ शानो-शौकत की ओर रुख कर रहे हैं. गुच्ची और टॉड जैसे आला ब्रांड दानदाता की शक्ल भी अख्तियार कर रहे हैं जो समाज से जुड़ते और उसे कुछ वापस देते भी दिखना चाहते हैं. लग्जरी ब्रांडों में टेक्नोलॉजी से जुड़कर बढऩे का विचार शायद अधिक आम हो जाने के डर से भी पैदा हुआ है. इससे ऑनलाइन के जरिए ही सही, बेहद निजी, खास गोपनीय सेवाएं देने का भी दौर शुरू हो गया है जो आने वाले दिनों में लग्जरी मार्केट में नई स्पर्धा की वजह बन सकता है. महज सामान ही नहीं, बल्कि उसकी अलग खासियत, कुछ अलग तरह की चमक-दमक, बेहिसाब खरीदारी के बदले खास चीजों को लेना, आने वाले दौर में लग्जरी बाजार का फैशन बन रहा है.

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