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धर्मगुरुओं में लगी नेताओं और अभिनेताओं के साथ नजदीकी दिखाने की होड़

धर्मगुरुओं में लगी है नेताओं, अभिनेताओं और ताकतवर लोगों से अपनी नजदीकी दिखाने की होड़. जानें किस तरह सत्ता केंद्रों में बदलने लगे हैं धर्म केंद्र.

अपडेटेड 13 जनवरी , 2015

धर्मनगरी हरिद्वार में आजकल साधु-संतों के बीच अपना प्रभाव दिखाने को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा चल रही है. कोई साधु अपना जन्मदिन मनाने के लिए लाखों रु. लुटाकर नेताओं और फिल्म कलाकारों को बुला रहा है तो कोई विदेशी प्रतिनिधियों को बुलाकर अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है. मंदिरों और आश्रमों के स्थापना दिवस समारोह हों या किसी महात्मा की बरसी या उनका जन्मदिन, सब जगह अपना प्रभाव और ताकत दिखाने की धूम है.

5 जनवरी को योगगुरु बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ के 20वें स्थापना दिवस पर आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के ही मंत्री कैप्टन अभिमन्यु कुमार, रामविलास शर्मा, प्रमुख कुश्ती कोच पहलवान सतपाल और कुश्ती में दो ओलंपिक पदक जीतने वाले सुशील कुमार आमंत्रित थे. सभी ने बाबा की तारीफों के पुल बांधे. केंद्रीय मंत्रियों और हरियाणा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति के चलते पतंजलि योगपीठ में राज्य के बीजेपी नेताओं को भी कार्यक्रम के दौरान एक पांव पर खड़े देखा गया. खट्टर ने इस मौके पर कहा, ''रामदेव के शुरू किए गए आचार्यकुलम हरियाणा के सभी जिलों में खोले जाएंगे." उन्होंने हरियाणा के स्कूली पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने की भी घोषणा की. खट्टर ने पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को हरियाणा में किसानों की खाली पड़ी जमीन पर जड़ी-बूटी उगाने के लिए भी आमंत्रित किया. इससे पूर्व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पिछले साल बाबा के सेवासदन का उद्घाटन करने आए थे.
अपनी फिल्म पीके की सफलता के लिए अनुष्ठान कराने आईं अनुष्का शर्मा
(अपनी फिल्म पीके की सफलता के लिए अनुष्ठान कराने आईं अनुष्का शर्मा)

हरिद्वार के कनखल में स्थित जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने  5 जनवरी को ही खट्टर को अपने आश्रम में आने का निमंत्रण दिया. खट्टर अपने दो मंत्रियों के साथ वहां पहुंचे तो उन्होंने वहां मौजूद यती सम्राट ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज के चित्र पर माल्यार्पण करने का कार्यक्रम भी लगे हाथ बना लिया. हरियाणा के स्कूली पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने के लिए राजराजेश्वराश्रम ने मुख्यमंत्री को साधुवाद भी दिया.

इतना ही नहीं, भारत माता मंदिर, हरिद्वार के संस्थापक और पूर्व शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद ने भी खट्टर को अपने मंदिर में बुलवाकर उनके हाथों भारत माता मंदिर का दीप प्रज्वलित करवाया. इस मौके पर खट्टर ने ऐसे मंदिरों को देशभर में स्थापित करने को देश की अखंडता बढ़ाने के लिए जरूरी करार दे डाला.
पतंजलि योगपीठ के स्थापना दिवस समारोह में आए नितिन गडकरी और सुशील कुमार
(पतंजलि योगपीठ के स्थापना दिवस समारोह में आए नितिन गडकरी और सुशील कुमार)

पहली जनवरी को हरिद्वार के काली पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मïचारी ने अपने 39वें जन्मदिन पर भव्य समारोह का आयोजन किया, जिसमें उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी से लेकर फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी, मनोज तिवारी और रवि किशन ने शिरकत की. इसके तुरंत बाद चेतन ज्योति आश्रम से जुड़े संत प्रमोद कृष्णन ने भी अपने जन्मदिन पर हरिद्वार में एक भव्य समारोह किया और उसमें कांग्रेस के महामंत्री दिग्विजय सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और फिल्म अभिनेता परीक्षित साहनी समेत कई नामचीनों को बुलाया. जब इसकी आलोचना हुई तो स्वामी कैलाशानंद ने अपनी सफाई में कहा, ''हमने फिल्मी सितारों को सिर्फ आने-जाने का किराया दिया है. उन्हें अलग से पैसा नहीं दिया गया."

हरिद्वार में धर्मगुरुओं के इस तरह के आयोजनों की एक लंबी फेहरिस्त है. उमा भारती से लेकर राजनाथ सिंह, जयराम रमेश, सुबोधकांत सहाय, लालकृष्ण आडवाणी, नजमा हेपतुल्ला और हेमा मालिनी तक किसी-न-किसी को अपने आश्रम की गंगा आरती में बुलाकर सुर्खी बटोरने का कोई भी मौका साधु-संत नहीं चूकते. पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत परमार्थ निकेतन, ऋ षिकेश में रुके थे. इसी तरह अभिनेत्री अनुष्का शर्मा अपनी फिल्म पीके  की सफलता के लिए हरिद्वार के एक आश्रम में पूजा करवाने भी आई थीं.
हरिद्वार के आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय शर्मा कहते हैं, ''मठ-मंदिरों के नाम पर साधु-संत प्रभावशाली नेताओं और ताकतवर लोगों से अपने संबंध मजबूत करना चाहते हैं ताकि उस प्रभाव में  वे बाद में अपने हितों के लिए कानून का दुरुपयोग कर सकें." शर्मा कहते हैं कि कोई अखाड़ों की जमीन पर होटल बना रहा है तो कोई जंगल की जमीन पर मंदिर.
स्वामी कैलाशानंद के जन्मदिवस के आयोजन में अभिनेताओं ने भी शिरकत की
(स्वामी कैलाशानंद के जन्मदिवस के आयोजन में अभिनेताओं ने भी शिरकत की)

मातृसदन हरिद्वार के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद इन आयोजनों को धर्म विरुद्घ मानते हैं. वे कहते हैं, ''जब कोई संन्यास ग्रहण कर संत बनने की प्रक्रिया में आता है तो उसका नया जन्म होता है. कोई साधु अपना जन्मोत्सव मनाए, यह बात समझ् से परे है." लेकिन स्वामी कैलाशानंद का अपना तर्क है. वे कहते हैं, ''मैंने अभी तक संन्यास धारण नहीं किया है. मैं ब्रह्मïचारी हूं. जो शिखा और सूत्र धारण करता हो, वह अपना जन्मदिन मना सकता है."

अब धर्मनगरी में साधु-संतों की ख्याति तपस्या और अध्यात्म को लेकर नहीं, बल्कि नेताओं, अभिनेताओं और प्रभावशाली लोगों के साथ उनके संबंधों को लेकर होने लगी है. धर्म और ज्ञान के केंद्रों का ऐसे सत्ता केंद्रों में बदल जाना वाकई दुखद है.

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