इसी साल 30 अक्तूबर की रात पांच अज्ञात लोगों ने ओबाडो उजोमो सिमियन को मौत के घाट उतार दिया. गोवा के अंजुना सी-बीच से सिर्फ पांच किमी दूर पारा गांव में इस 30 वर्षीय नाइजीरियाई नागरिक की हत्या बहुत बेरहमी से की गई थी. यह हत्या माफिया गैंगवार के अंदाज में की गई थी, जिसमें एक तरह का संदेश दिया गया था.
नाटे कद के सिमियन ने फ्रेंच दाढ़ी बढ़ा रखी थी, चमकदार लाल रंग की टॉमी हिलफिगर स्वेटशर्ट और भूरे रंग की पैंट पहन रखी थी. वह छह माह पहले बिजनेस वीजा पर भारत आया था. हत्यारों ने उसका पीछा करके धारदार हथियारों से हत्या की थी.
उन्होंने उसका दाहिना हाथ और रीढ़ की हड्डी को काटकर अलग कर दिया था और खून से लथपथ उसके शरीर को सड़क पर छोड़ गए थे. पुलिस का कहना है कि सिमियन की हत्या भारत के नशीली दवाओं के प्रतिद्वंद्वी गैंग के लोगों ने की थी, क्योंकि उन्हें अपने भारी मुनाफे के धंधे में नए गिरोह के आने से खतरा हो गया था.
हर साल करीब 30 लाख विदेशी पर्यटकों के आने से यह धंधा काफी फल-फूल रहा है. विदेशी पर्यटक गोवा में कलंगुट के समुद्र तट की कुटियों में आकर रहते हैं और जगमगाते बागा बीच रोड के क्लबों में मौज-मस्ती करते हैं.
पुलिस के मुताबिक, मादक पदार्थों के धंधे में विदेशों से आने वाले ये लोग बहुत खूंखार और निडर होते हैं, जो आपस में गुंथे हुए समूहों में काम करते हैं. अगर इन्हें ज्यादा पैसे मिलने की उम्मीद हो तो ये किसी को भी ड्रग बेचने से बिल्कुल नहीं डरते हैं. इनमें से ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका के सिर्फ एक देश नाइजीरिया के रहने वाले हैं.
गोवा के विदेशी पंजीकरण कार्यालय में सिर्फ 19 नाइजीरियाई नागरिकों के नाम दर्ज हैं, जबकि वहां 200 से ज्यादा नाइजीरियाई नागरिक गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हैं या फिर अपने वीजा की अवधि पूरी होने के बाद भी रह रहे हैं. वे उत्तरी गोवा में किराये के कमरों में रहते हैं.
यह इलाका मादक पदार्थों के खुदरा व्यवसाय का मुख्य केंद्र है और पर्यटकों के पसंदीदा समुद्र तटों अंजुना, बागा व कलंगुट से ज्यादा दूर नहीं है. ऐंटी-नारकोटिक्स सेल (एएनसी) के एक पुलिसकर्मी के अनुसार, ''उनमें से 90 फीसदी ड्रग के धंधे में शामिल हैं.”
2010 से अब तक 22 नाइजीरियाई नागरिक गोवा में नशीले पदार्थों का धंधा करने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं. सिमियन की हत्या के एक दिन बाद नाइजीरियाई नागरिकों और पुलिस के बीच झड़प हुई. उन्होंने सिमियन के शव को एनएच-17 पर रखकर सड़क को जाम कर दिया.
इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया. हेडलाइंस टुडे के एक स्टिंग ऑपरेशन में एक पुलिस इंस्पेक्टर ने स्वीकार किया कि वे नाइजीरियाई नागरिकों को पकडऩे से डरते हैं. पिछले कुछ वर्षों में नाइजीरियाई डीलरों ने गोवा में मीथाक्वालोन, कोकीन और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों के धंधे में काफी बड़ा हिस्सा हथिया लिया है और लोकल गैंग को पीछे छोड़ दिया है.
नाइजीरियाइयों का उत्पात
भारत में बाहर से आकर नशीले पदार्थों का धंधा करने वाला लगभग हर व्यक्ति नाइजीरियाई नागरिक ही होता है. वह दक्षिण अमेरिका से सफेद पाउडर या कोकीन लाकर भारतीय ग्राहकों तक पहुंचाता है. ये लोग नाइजीरिया की तीन भाषाएं—इबो, हाउसा और योरुबा—फर्राटे से बोलते हैं और छात्र या कपड़े के व्यापारी बनकर भारत आते रहते हैं.
अपनी इसी पहचान के कारण वे भारत में रह रहे करीब 50,000 नाइजीरियाई प्रवासियों में घुल-मिल जाते हैं. इनमें से ज्यादातर छात्र या व्यापारी के तौर पर कानूनी ढंग से रहते हैं. गोवा का समुद्री तट तो उनके विभिन्न अड्डों में से एक है. हाल के महीनों में नाइजीरियाई नशीले पदार्थों के इन कारोबारियों ने चंडीगढ़ जैसी जगहों को भी अपना अड्डा बनाया है और वहां 'नमक’ (कोकीन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) का धंधा शुरू किया है. चंडीगढ़ भी कोकीन की खपत का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
पंजाब पुलिस ने पिछले साल दिसंबर और इस साल मार्च में अब तक कोकीन का धंधा करने वाले दो गिरोहों का भंडाफोड़ किया है और दोनों गिरोहों के मुखिया नाइजीरियाई थे. मुंबई में वे दूरदराज के इलाके की टूटी-फूटी इमारतों में रहते हैं. उदाहरण के लिए ठाणे का नैगांव या डोंगरी के लॉज उनके पसंदीदा जगहों में से हैं. यहीं से वे शहर की पार्टियों में मीथमफेटामाइन, कोकीन और एलएसडी पहुंचाते हैं.
दक्षिण मुंबई में ड्रग एब्यूज इन्फॉर्मेशन रिहैबिलिटेशन ऐंड रिसर्च सेंटर चलाने वाले डॉ. युसूफ मर्चेंट कहते हैं, ''मुंबई में नाइजीरियाइयों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन पिछले दो वर्ष में इस शहर में ड्रग के धंधे में उनका दबदबा हो गया है.” नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक राजीव मेहता कहते हैं, ''पिछले साल से हम देख रहे हैं कि मादक पदार्थों के धंधे में नाइजीरिया समेत अफ्रीकी देशों के लोगों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है.”
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) का अनुमान है कि भारत में ड्रग के व्यापार में 60 फीसदी हिस्से पर नाइजीरियाई नागरिकों का कब्जा है. वे कहते हैं कि उनके नेटवर्क में औरतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उनमें से बहुत से पुरुष भारतीय औरतों से शादी कर लेते हैं ताकि वे भारत में रह सकें और उनके बैंक एकाउंट का इस्तेमाल कर सकें.
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुल 375 विदेशी कैदियों में करीब आधे यानी 136 नाइजीरिया के नागरिक हैं. इनमें से ज्यादातर नशीले पदार्थों के धंधे में पकड़े गए हैं.
भारत में नशीले पदार्थों का कुल कारोबार बहुत विशाल है, जिसके बारे में सही जानकारी हासिल करना मुश्किल है. पिछले साल भारत की विभिन्न एजेंसियों ने एक टन हेरोइन, 4.3 टन इफेड्रिन, 44 किलो कोकीन और 30 किलो एम्फेटेमाइन पकड़ी थी. मादक द्रव्य नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी का कहना है, ''यह तो कुल कारोबार का नाममात्र का हिस्सा भर है. कुल कारोबार कितना बड़ा है, इसकी हमें जानकारी तक नहीं है.”
इस साल अप्रैल में दिल्ली पुलिस और आइबी की विशेष शाखा ने एक असामान्य गिरफ्तारी की. उन्होंने दिल्ली के तिलक नगर इलाके से ओलाटाइड मॉरिसन और उसकी पत्नी डेबोरा ओलाटाइड व चार अन्य नाइजीरियाई नागरिकों को पकड़ा. 55 वर्षीय ओलाटाइड पादरी था, जो दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में चर्चों का एक नेटवर्क चलाता था. वह उत्तर अमेरिका और यूरोप में कपड़ों का निर्यात करता था.
उसके काम में उसकी पत्नी, 47 वर्षीया डेबोरा सहयोग करती थी. उसका रहन-सहन बड़ा प्रभावशाली था. जब उनके घरों और दफ्तरों पर छापा पड़ा तो पता चला कि वे मादक पदार्थों के धंधे के मुखिया थे. एनसीबी के अधिकारियों का कहना है कि नाइजीरियाई नागरिक ड्रग के खुदरा और थोक, दोनों ही कारोबार में अपना दबदबा रखते हैं.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नाइजीरियाई बहुत आक्रामक व्यापारी होते हैं और गिरफ्तारी से बिल्कुल नहीं डरते हैं. उनके संबंध अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से होते हैं. यही कारण है कि एनसीबी नशीले पदार्थों के कारोबार के बारे में सूचनाएं पाने के लिए अक्सर अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी के साथ काम करती है.
एक अनुमान के अनुसार इस समय भारत में करीब 5,000 नाइजीरियाई नागरिक गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हैं. भारत के गृह मंत्रालय ने इस साल 500 नाइजीरियाई नागरिकों को देश से बाहर निकाला है.
भारत का रुख
यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स ऐंड क्राइम (यूएनओडीसी) की 2013 की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि अंतरराष्ट्रीय कोकीन का बाजार एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में भारत में होने वाली गिरफ्तारियां इसी तथ्य की तरफ इशारा करती हैं.
1 अक्तूबर को एनसीबी अधिकारियों ने 8.4 किलो कोकीन पकड़ी, जिसकी कीमत 5 करोड़ रु. से भी ज्यादा है. इस कोकीन को 31 वर्षीय एक 'कपड़ा व्यापारी’ चिडिबेरे किंग्सले न्वानचरा के नकली डिब्बों में छुपाकर लाया गया था. वह मेक्सिको से लागोस और दुबई होते हुए दिल्ली आया था.
भारत में कोकीन की आपूर्ति तेजी से बढ़ी है. पिछले साल विभिन्न एजेंसियों ने 44 किलो कोकीन पकड़ी थी, जो 2011 के मुकाबले 14 किलो ज्यादा थी. पिछले साल सितंबर में तीन नाइजीरियाई नागरिकों से 16.8 किलो कोकीन पकड़ी गई थी, जिसकी कीमत 10 करोड़ रु. थी.
लेकिन जब्त की गई यह मात्रा भारत में भेजे जा रहे नशीले पदार्थों का महज एक छोटा-सा हिस्सा भर है. भारत के अमीर हो चुके मध्यवर्गीय लोगों के लिए कोकीन खरीदना बहुत आसान हो गया है. अब कॉल सेंटर में काम करने वाला युवा भी उतनी ही आसानी से इसे हासिल कर सकता है, जितनी आसानी से किसी फिल्म स्टार का बेटा उसे मंगा सकता है.
दशक भर पहले एक ग्राम कोकीन की कीमत 7,000 रु. हुआ करती थी, लेकिन अब उसकी कीमत घटकर 3,000 रु. से 4,000 रु. के बीच रह गई है. मुंबई में पुलिस का एक मुखबिर 'विकी’ हंसते हुए कहता है, ''पेट्रोल और सब्जी की कीमतें बढ़ गई हैं, डॉलर मजबूत हो गया है, लेकिन कोकीन सस्ता हो गया है.”
दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस में मादक पदार्थों से संबंधित विषयों पर काम करने वाली रिसर्च स्कॉलर पुष्पिता दास कहती हैं, ''आसानी से कोकीन की उपलब्धता के कारण भारत के महानगरों में कोकीन की खपत बढ़ गई है.”
राजनैतिक-आपराधिक गठजोड़
इस साल 17 अक्तूबर को गोवा विधानसभा के सामने पुलिस और ड्रग माफिया के बीच संबंधों पर 125 पन्नों की एक रिपोर्ट रखी गई. मनोहर पॢरकर सरकार की ओर से एक निर्दलीय विधायक फ्रांसिस्को जेवियर पाचेको की अध्यक्षता में गठित की गई समिति ने बताया कि पूर्व गृह मंत्री रवि नाइक ने ड्रग के धंधे में अपने बेटे रॉय के संलिप्त होने की बात को छुपाए रखा.
इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि गोवा में नेताओं, पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत चल रही है, जिसकी वजह से नशीले पदार्थों का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है. लेकिन सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है. नाइजीरियाई नागरिक की हत्या के पखवाड़े भर बाद पुलिस ने एएनसी के कांस्टेबल को इसलिए निलंबित कर दिया क्योंकि उसने एक भारतीय ड्रग गिरोह को पुलिस की कार्रवाई के बारे में सूचना दे दी थी.
2010 में एएनसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को जब्त की गई 25 किलो हशीश इज्राएल के एक ड्रग व्यापारी को बेचने के कारण जेल हो गई थी. अटाला नामक इज्राएली ड्रग डॉन ने स्वीकार किया था कि गोवा पुलिस के लोग उसे मादक पदार्थ मुहैया कराते थे.
कानूनी अड़चनें
इस साल अगस्त में दिल्ली के उत्तम नगर के निवासी तब हैरान रह गए जब उन्होंने दो नाइजीरियाई नागरिकों को 19 पुलिसकर्मियों का सामना करते हुए देखा. उन्होंने ऊपर जाने वाली संकरी सीढिय़ों का रास्ता रोक रखा था और वे पुलिसकर्मियों पर लात-मुक्के बरसा रहे थे. इस बीच गिरोह के तीन सदस्य भाग निकले, एक सदस्य तीन मंजिला मकान की छत से बगल की छत पर कूद गया और एक आदमी बिजली के तार के सहारे लटककर निकल भागा.
यह गिरोह स्थानीय रूप से तैयार मीथाफेटेमाइन बेचता था. एनसीबी ने मकान की तीसरी मंजिल से 500 ग्राम नशीला पदार्थ पकड़ा और गिरोह के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया. एनसीबी के एक अधिकारी के मुताबिक, पश्चिमी दिल्ली नशीले पदार्थों के धंधे के मामले में राजधानी का नया अड्डा बनती जा रही है, क्योंकि हाल के महीनों में यहां कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
सूत्रों का कहना है कि सरकार भारत में नाइजीरियाई ड्रग समस्या से वाकिफ है, लेकिन वह दोनों देशों के बीच रिश्तों को बिगाडऩा नहीं चाहती है. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 10 लाख भारतीय नाइजीरिया में रहते हैं और कारोबार करते हैं. भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने के मामले में नाइजीरिया छठा सबसे बड़ा निर्यातक है और द्विपक्षीय वार्षिक कारोबार के मामले में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है, जिसके साथ 17.3 अरब डॉलर का कारोबार होता है.
पूर्व कूटनयिक के.सी. सिंह कहते हैं, ''आर्थिक संबंधों और अपराध को एक-दूसरे से अलग रखना चाहिए. सरकार को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और किसी की धौंस में नहीं आना चाहिए.” नाइजीरिया के उच्च आयुक्त ने इंडिया टुडे के फोन का कोई जवाब नहीं दिया.
गृह मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि भारत के वीजा के लिए पाकिस्तान की तरह नाइजीरिया प्रायर रेफ्रेंस कैटेगरी वाले देशों में बना हुआ है. नाइजीरिया में भारतीय उच्चायोग को मंजूरी से पहले वीजा के सभी आवेदनों को आइबी के पास भेजना होता है, ताकि उनकी जांच हो सके. लागोस में भारत के पूर्व उच्च आयुक्त महेश कुमार कहते हैं कि उन्होंने कारोबारियों की सुविधा के लिए गृह मंत्रालय को वीजा नियमों में ढील देने के लिए लिखा था.
आइबी के एक अधिकारी कहते हैं, ''एक बार तो गृह मंत्रालय इस सुझाव पर विचार करता दिख रहा था, लेकिन अब ऐसी कोई संभावना नहीं लगती है.” बहरहाल, नाइजीरियाई ड्रग गिरोह को इससे कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है. वे अपने तरीके से पूरे भारत में इस घातक कारोबार को फैलाने में व्यस्त हैं.
नाटे कद के सिमियन ने फ्रेंच दाढ़ी बढ़ा रखी थी, चमकदार लाल रंग की टॉमी हिलफिगर स्वेटशर्ट और भूरे रंग की पैंट पहन रखी थी. वह छह माह पहले बिजनेस वीजा पर भारत आया था. हत्यारों ने उसका पीछा करके धारदार हथियारों से हत्या की थी.
उन्होंने उसका दाहिना हाथ और रीढ़ की हड्डी को काटकर अलग कर दिया था और खून से लथपथ उसके शरीर को सड़क पर छोड़ गए थे. पुलिस का कहना है कि सिमियन की हत्या भारत के नशीली दवाओं के प्रतिद्वंद्वी गैंग के लोगों ने की थी, क्योंकि उन्हें अपने भारी मुनाफे के धंधे में नए गिरोह के आने से खतरा हो गया था.
हर साल करीब 30 लाख विदेशी पर्यटकों के आने से यह धंधा काफी फल-फूल रहा है. विदेशी पर्यटक गोवा में कलंगुट के समुद्र तट की कुटियों में आकर रहते हैं और जगमगाते बागा बीच रोड के क्लबों में मौज-मस्ती करते हैं.
पुलिस के मुताबिक, मादक पदार्थों के धंधे में विदेशों से आने वाले ये लोग बहुत खूंखार और निडर होते हैं, जो आपस में गुंथे हुए समूहों में काम करते हैं. अगर इन्हें ज्यादा पैसे मिलने की उम्मीद हो तो ये किसी को भी ड्रग बेचने से बिल्कुल नहीं डरते हैं. इनमें से ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका के सिर्फ एक देश नाइजीरिया के रहने वाले हैं.
गोवा के विदेशी पंजीकरण कार्यालय में सिर्फ 19 नाइजीरियाई नागरिकों के नाम दर्ज हैं, जबकि वहां 200 से ज्यादा नाइजीरियाई नागरिक गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हैं या फिर अपने वीजा की अवधि पूरी होने के बाद भी रह रहे हैं. वे उत्तरी गोवा में किराये के कमरों में रहते हैं.
यह इलाका मादक पदार्थों के खुदरा व्यवसाय का मुख्य केंद्र है और पर्यटकों के पसंदीदा समुद्र तटों अंजुना, बागा व कलंगुट से ज्यादा दूर नहीं है. ऐंटी-नारकोटिक्स सेल (एएनसी) के एक पुलिसकर्मी के अनुसार, ''उनमें से 90 फीसदी ड्रग के धंधे में शामिल हैं.”
2010 से अब तक 22 नाइजीरियाई नागरिक गोवा में नशीले पदार्थों का धंधा करने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं. सिमियन की हत्या के एक दिन बाद नाइजीरियाई नागरिकों और पुलिस के बीच झड़प हुई. उन्होंने सिमियन के शव को एनएच-17 पर रखकर सड़क को जाम कर दिया.
इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया. हेडलाइंस टुडे के एक स्टिंग ऑपरेशन में एक पुलिस इंस्पेक्टर ने स्वीकार किया कि वे नाइजीरियाई नागरिकों को पकडऩे से डरते हैं. पिछले कुछ वर्षों में नाइजीरियाई डीलरों ने गोवा में मीथाक्वालोन, कोकीन और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों के धंधे में काफी बड़ा हिस्सा हथिया लिया है और लोकल गैंग को पीछे छोड़ दिया है.
नाइजीरियाइयों का उत्पात
भारत में बाहर से आकर नशीले पदार्थों का धंधा करने वाला लगभग हर व्यक्ति नाइजीरियाई नागरिक ही होता है. वह दक्षिण अमेरिका से सफेद पाउडर या कोकीन लाकर भारतीय ग्राहकों तक पहुंचाता है. ये लोग नाइजीरिया की तीन भाषाएं—इबो, हाउसा और योरुबा—फर्राटे से बोलते हैं और छात्र या कपड़े के व्यापारी बनकर भारत आते रहते हैं.
अपनी इसी पहचान के कारण वे भारत में रह रहे करीब 50,000 नाइजीरियाई प्रवासियों में घुल-मिल जाते हैं. इनमें से ज्यादातर छात्र या व्यापारी के तौर पर कानूनी ढंग से रहते हैं. गोवा का समुद्री तट तो उनके विभिन्न अड्डों में से एक है. हाल के महीनों में नाइजीरियाई नशीले पदार्थों के इन कारोबारियों ने चंडीगढ़ जैसी जगहों को भी अपना अड्डा बनाया है और वहां 'नमक’ (कोकीन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) का धंधा शुरू किया है. चंडीगढ़ भी कोकीन की खपत का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
पंजाब पुलिस ने पिछले साल दिसंबर और इस साल मार्च में अब तक कोकीन का धंधा करने वाले दो गिरोहों का भंडाफोड़ किया है और दोनों गिरोहों के मुखिया नाइजीरियाई थे. मुंबई में वे दूरदराज के इलाके की टूटी-फूटी इमारतों में रहते हैं. उदाहरण के लिए ठाणे का नैगांव या डोंगरी के लॉज उनके पसंदीदा जगहों में से हैं. यहीं से वे शहर की पार्टियों में मीथमफेटामाइन, कोकीन और एलएसडी पहुंचाते हैं.
दक्षिण मुंबई में ड्रग एब्यूज इन्फॉर्मेशन रिहैबिलिटेशन ऐंड रिसर्च सेंटर चलाने वाले डॉ. युसूफ मर्चेंट कहते हैं, ''मुंबई में नाइजीरियाइयों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन पिछले दो वर्ष में इस शहर में ड्रग के धंधे में उनका दबदबा हो गया है.” नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक राजीव मेहता कहते हैं, ''पिछले साल से हम देख रहे हैं कि मादक पदार्थों के धंधे में नाइजीरिया समेत अफ्रीकी देशों के लोगों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है.”
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) का अनुमान है कि भारत में ड्रग के व्यापार में 60 फीसदी हिस्से पर नाइजीरियाई नागरिकों का कब्जा है. वे कहते हैं कि उनके नेटवर्क में औरतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उनमें से बहुत से पुरुष भारतीय औरतों से शादी कर लेते हैं ताकि वे भारत में रह सकें और उनके बैंक एकाउंट का इस्तेमाल कर सकें.
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुल 375 विदेशी कैदियों में करीब आधे यानी 136 नाइजीरिया के नागरिक हैं. इनमें से ज्यादातर नशीले पदार्थों के धंधे में पकड़े गए हैं.
भारत में नशीले पदार्थों का कुल कारोबार बहुत विशाल है, जिसके बारे में सही जानकारी हासिल करना मुश्किल है. पिछले साल भारत की विभिन्न एजेंसियों ने एक टन हेरोइन, 4.3 टन इफेड्रिन, 44 किलो कोकीन और 30 किलो एम्फेटेमाइन पकड़ी थी. मादक द्रव्य नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी का कहना है, ''यह तो कुल कारोबार का नाममात्र का हिस्सा भर है. कुल कारोबार कितना बड़ा है, इसकी हमें जानकारी तक नहीं है.”
इस साल अप्रैल में दिल्ली पुलिस और आइबी की विशेष शाखा ने एक असामान्य गिरफ्तारी की. उन्होंने दिल्ली के तिलक नगर इलाके से ओलाटाइड मॉरिसन और उसकी पत्नी डेबोरा ओलाटाइड व चार अन्य नाइजीरियाई नागरिकों को पकड़ा. 55 वर्षीय ओलाटाइड पादरी था, जो दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में चर्चों का एक नेटवर्क चलाता था. वह उत्तर अमेरिका और यूरोप में कपड़ों का निर्यात करता था.
उसके काम में उसकी पत्नी, 47 वर्षीया डेबोरा सहयोग करती थी. उसका रहन-सहन बड़ा प्रभावशाली था. जब उनके घरों और दफ्तरों पर छापा पड़ा तो पता चला कि वे मादक पदार्थों के धंधे के मुखिया थे. एनसीबी के अधिकारियों का कहना है कि नाइजीरियाई नागरिक ड्रग के खुदरा और थोक, दोनों ही कारोबार में अपना दबदबा रखते हैं.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नाइजीरियाई बहुत आक्रामक व्यापारी होते हैं और गिरफ्तारी से बिल्कुल नहीं डरते हैं. उनके संबंध अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से होते हैं. यही कारण है कि एनसीबी नशीले पदार्थों के कारोबार के बारे में सूचनाएं पाने के लिए अक्सर अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी के साथ काम करती है.
एक अनुमान के अनुसार इस समय भारत में करीब 5,000 नाइजीरियाई नागरिक गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हैं. भारत के गृह मंत्रालय ने इस साल 500 नाइजीरियाई नागरिकों को देश से बाहर निकाला है.
भारत का रुख
यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स ऐंड क्राइम (यूएनओडीसी) की 2013 की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि अंतरराष्ट्रीय कोकीन का बाजार एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में भारत में होने वाली गिरफ्तारियां इसी तथ्य की तरफ इशारा करती हैं.
1 अक्तूबर को एनसीबी अधिकारियों ने 8.4 किलो कोकीन पकड़ी, जिसकी कीमत 5 करोड़ रु. से भी ज्यादा है. इस कोकीन को 31 वर्षीय एक 'कपड़ा व्यापारी’ चिडिबेरे किंग्सले न्वानचरा के नकली डिब्बों में छुपाकर लाया गया था. वह मेक्सिको से लागोस और दुबई होते हुए दिल्ली आया था.
भारत में कोकीन की आपूर्ति तेजी से बढ़ी है. पिछले साल विभिन्न एजेंसियों ने 44 किलो कोकीन पकड़ी थी, जो 2011 के मुकाबले 14 किलो ज्यादा थी. पिछले साल सितंबर में तीन नाइजीरियाई नागरिकों से 16.8 किलो कोकीन पकड़ी गई थी, जिसकी कीमत 10 करोड़ रु. थी.
लेकिन जब्त की गई यह मात्रा भारत में भेजे जा रहे नशीले पदार्थों का महज एक छोटा-सा हिस्सा भर है. भारत के अमीर हो चुके मध्यवर्गीय लोगों के लिए कोकीन खरीदना बहुत आसान हो गया है. अब कॉल सेंटर में काम करने वाला युवा भी उतनी ही आसानी से इसे हासिल कर सकता है, जितनी आसानी से किसी फिल्म स्टार का बेटा उसे मंगा सकता है.
दशक भर पहले एक ग्राम कोकीन की कीमत 7,000 रु. हुआ करती थी, लेकिन अब उसकी कीमत घटकर 3,000 रु. से 4,000 रु. के बीच रह गई है. मुंबई में पुलिस का एक मुखबिर 'विकी’ हंसते हुए कहता है, ''पेट्रोल और सब्जी की कीमतें बढ़ गई हैं, डॉलर मजबूत हो गया है, लेकिन कोकीन सस्ता हो गया है.”
दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस में मादक पदार्थों से संबंधित विषयों पर काम करने वाली रिसर्च स्कॉलर पुष्पिता दास कहती हैं, ''आसानी से कोकीन की उपलब्धता के कारण भारत के महानगरों में कोकीन की खपत बढ़ गई है.”
राजनैतिक-आपराधिक गठजोड़
इस साल 17 अक्तूबर को गोवा विधानसभा के सामने पुलिस और ड्रग माफिया के बीच संबंधों पर 125 पन्नों की एक रिपोर्ट रखी गई. मनोहर पॢरकर सरकार की ओर से एक निर्दलीय विधायक फ्रांसिस्को जेवियर पाचेको की अध्यक्षता में गठित की गई समिति ने बताया कि पूर्व गृह मंत्री रवि नाइक ने ड्रग के धंधे में अपने बेटे रॉय के संलिप्त होने की बात को छुपाए रखा.
इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि गोवा में नेताओं, पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत चल रही है, जिसकी वजह से नशीले पदार्थों का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है. लेकिन सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है. नाइजीरियाई नागरिक की हत्या के पखवाड़े भर बाद पुलिस ने एएनसी के कांस्टेबल को इसलिए निलंबित कर दिया क्योंकि उसने एक भारतीय ड्रग गिरोह को पुलिस की कार्रवाई के बारे में सूचना दे दी थी.
2010 में एएनसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को जब्त की गई 25 किलो हशीश इज्राएल के एक ड्रग व्यापारी को बेचने के कारण जेल हो गई थी. अटाला नामक इज्राएली ड्रग डॉन ने स्वीकार किया था कि गोवा पुलिस के लोग उसे मादक पदार्थ मुहैया कराते थे.
कानूनी अड़चनें
इस साल अगस्त में दिल्ली के उत्तम नगर के निवासी तब हैरान रह गए जब उन्होंने दो नाइजीरियाई नागरिकों को 19 पुलिसकर्मियों का सामना करते हुए देखा. उन्होंने ऊपर जाने वाली संकरी सीढिय़ों का रास्ता रोक रखा था और वे पुलिसकर्मियों पर लात-मुक्के बरसा रहे थे. इस बीच गिरोह के तीन सदस्य भाग निकले, एक सदस्य तीन मंजिला मकान की छत से बगल की छत पर कूद गया और एक आदमी बिजली के तार के सहारे लटककर निकल भागा.
यह गिरोह स्थानीय रूप से तैयार मीथाफेटेमाइन बेचता था. एनसीबी ने मकान की तीसरी मंजिल से 500 ग्राम नशीला पदार्थ पकड़ा और गिरोह के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया. एनसीबी के एक अधिकारी के मुताबिक, पश्चिमी दिल्ली नशीले पदार्थों के धंधे के मामले में राजधानी का नया अड्डा बनती जा रही है, क्योंकि हाल के महीनों में यहां कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
सूत्रों का कहना है कि सरकार भारत में नाइजीरियाई ड्रग समस्या से वाकिफ है, लेकिन वह दोनों देशों के बीच रिश्तों को बिगाडऩा नहीं चाहती है. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 10 लाख भारतीय नाइजीरिया में रहते हैं और कारोबार करते हैं. भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने के मामले में नाइजीरिया छठा सबसे बड़ा निर्यातक है और द्विपक्षीय वार्षिक कारोबार के मामले में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है, जिसके साथ 17.3 अरब डॉलर का कारोबार होता है.
पूर्व कूटनयिक के.सी. सिंह कहते हैं, ''आर्थिक संबंधों और अपराध को एक-दूसरे से अलग रखना चाहिए. सरकार को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और किसी की धौंस में नहीं आना चाहिए.” नाइजीरिया के उच्च आयुक्त ने इंडिया टुडे के फोन का कोई जवाब नहीं दिया.
गृह मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि भारत के वीजा के लिए पाकिस्तान की तरह नाइजीरिया प्रायर रेफ्रेंस कैटेगरी वाले देशों में बना हुआ है. नाइजीरिया में भारतीय उच्चायोग को मंजूरी से पहले वीजा के सभी आवेदनों को आइबी के पास भेजना होता है, ताकि उनकी जांच हो सके. लागोस में भारत के पूर्व उच्च आयुक्त महेश कुमार कहते हैं कि उन्होंने कारोबारियों की सुविधा के लिए गृह मंत्रालय को वीजा नियमों में ढील देने के लिए लिखा था.
आइबी के एक अधिकारी कहते हैं, ''एक बार तो गृह मंत्रालय इस सुझाव पर विचार करता दिख रहा था, लेकिन अब ऐसी कोई संभावना नहीं लगती है.” बहरहाल, नाइजीरियाई ड्रग गिरोह को इससे कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है. वे अपने तरीके से पूरे भारत में इस घातक कारोबार को फैलाने में व्यस्त हैं.

