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डार्क मोड

महामारी बनता मर्स का हमला

पश्चिम एशिया का एक रहस्यमय वायरस दुनियाभर में और शायद भारत में भी फैल रहा है. इस जानलेवा वायरस के बारे में ज्यादातर जरूरी जानकारी किसी को नहीं मालूम.

अपडेटेड 5 अगस्त , 2013
क्या यह सारी दुनिया के लिए खतरा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की महानिदेशक मार्गरेट चान का कहना है कि कोई भी नई बीमारी जो हमारी समझ से ज्यादा तेजी से फैलती है ‘‘वह सारी दुनिया के लिए खतरनाक है.” विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार खतरे की घंटी सितंबर 2012 में बजाई थी. यह वायरस एक साल से भी कम समय में इस तरह फैला है.

सार्स की तरह, यह वायरस भी शायद चमगादड़ों की देन है
यह एक कोरोना वायरस है, 2002-03 के सार्स वायरस की महामारी की तरह इस पर भी क्राउंस    ( लैटिन भाषा में कोरोना) लिपटा हुआ है.

शायद सिर्फ इंसानों से इंसानों में फैला है, सिर्फ लंबे समय तक निकट संपर्क से फैलता है.

संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के जरिए फैलता है.

यह है क्या?
मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी कोरोनावायरस (मर्स-सीओवी) एक नया जानलेवा वायरस है जो पिछले साल पश्चिम एशिया से फैलना शुरू हुआ. इसके बारे में ज्यादातर जरूरी जानकारी अभी तक किसी को मालूम नहीं है, लिहाजा असरदार इलाज और बचाव के उपाय करना मुश्किल है. इस वायरस के बारे में बस इतनी जानकारी है.

 लक्षण क्या हैं?

शुरू के लक्षण

तेज बुखार (104 डिग्री या अधिक)

सांस लेने में दिक्कत

जी मितलाना

अंतिम अवस्था

फेफड़े और गुर्दे फेल हो जाना

मौत

जो हम नहीं जानते

किसी व्यक्ति को संक्रमित करने के लिए वायरस की मात्रा
कोई मरीज कितनी देर वायरस फैला सकता है
अब तक, कोई निश्चित उपचार नहीं
वायरस से बचाव का कोई टीका नहीं
वायरस की किस्म का पता नहीं

बाद के  लक्षण

सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ
निमोनिया
डायरिया जैसे पेट के
रोग

भारत के लिए खतरा क्यों?
भारत का नाम उन देशों में शामिल है जहां यह जानलेवा वायरस पहुंचने की आशंका सबसे अधिक है.

क्योंकि करीब 2,00,000 भारतीय जायरीन हर साल सऊदी अरब में मक्का और मदीना जाते हैं. जहां से यह रोग फैला है.

अधिकतर जायरीन कम आमदनी वाले देशों से आते हैं जहां रोग ज्यादा तेजी से और दूर तक फैल सकता है. कुल हज यात्रियों में से 16% भारत से जाते हैं.

भारत के दो शहर—मुंबई और कोझीकोड खास तौर पर खतरे के निशाने पर हैं,  3,50,000 से ज्यादा हवाई यात्री उन देशों में जाते हैं जहां से मर्स की शुरुआत हुई.

स्रोतः डब्ल्यूएचओ, सीडीसी, फ्लूट्रैकर्स, सीआइडीआरएपी, न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन, नवंबर 2012, जर्नल पीएलओएस करेंट्सःआउटब्रेक्स, जुलाई 2013
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