जनता दल (यूनाइटेड) अध्यक्ष शरद यादव, सीपीआइ के महासचिव ए.बी. बर्धन, बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और देश के खुदरा व्यापारियों की संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल 15 जनवरी को खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ बिगुल बजाने एकजुट हुए.
जोशी ने जहां दावा किया कि बीजेपी अगर सत्ता में आई तो एफडीआइ की अधिसूचना रद्द कर दी जाएगी, वहीं बर्धन ने कहा कि जो भी एफडीआइ के पक्ष में खड़ा होगा जनता पोलिंग बूथ में उसके लिए विपक्ष साबित होगी. लेकिन ये धुर विरोधी धुरंधर ऐसे समय पर एक साथ सामने आए जब देश पाक सेना के हाथों दो भारतीय सैनिकों की बर्बर हत्या के सदमे से गुजर रहा था.
ऐसे में पत्रकारों ने नेताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल ही पूछे. उनके जवाबों के बाद जो बातें खबर बनीं उससे, ऐसा लगा जैसे यह बिगुल एफडीआइ के बजाए पाकिस्तान के खिलाफ बज रहा हो. वैसे भी जिस तरह से देश के सभी राजनीतिक दल इस समय भारत-पाक मुद्दे को लेकर सक्रिय हुए हैं, उसमें एफडीआइ का मुद्दा पिछले अपनी प्रमुखता गंवाता नजर आ रहा है.

