कांग्रेसी कैबिनेट के कम-से-कम ऐसे तीन मंत्री हैं, जिन्होंने रिटेल कारोबार में एफडीआइ को मंजूरी देने पर ऐतराज जताया है. इनके नाम हैं ए.के. एंटनी, वयालार रवि और कमलनाथ.
इनमें से पहले दो मंत्रियों की आपत्ति तो समझ में आती है क्योंकि वे वाम झुकाव वाले राज्य केरल से हैं, लेकिन तीसरे नाम पर सबको आश्चर्य हुआ क्योंकि यह दावोस का ठप्पा लगी नाथ की कॉर्पोरेट फ्रेंडली छवि से मेल खाती नहीं दिखी.
हालांकि वे रिटेल में एफडीआइ का विरोध नहीं कर रहे थे. उनका ऐतराज इतना था कि सरकार राज्यों पर बहुत सारी शर्तें थोप रही है. उनका कहना था कि इसकी बजाए राज्यों को अपनी गाइडलाइन बनाने के लिए खुली छूट दी जानी चाहिए. ये हुई न कमलनाथ वाली बात!

