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डार्क मोड

सम्मानजनक भूमिका | यामी गौतम धर, 37 वर्ष | अभिनेत्री, मुंबई

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : लंबे करिअर के बाद आखिरकार उन्हें उनका हक मिला. पिछले साल हक में उन्होंने एक ऐसी महिला की असरदार भूमिका निभाई, जो अपने और अपने बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ती है. साथ ही, आर्टिकल 370 के लिए उन्होंने नेशनल अवॉर्ड भी जीता.

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यामी गौतम धर (फोटो- बंदीप सिंह)
अपडेटेड 30 अगस्त , 2026

निर्माता आदित्य और लोकेश धर ने 2018-19 के संघर्षग्रस्त कश्मीर में एक मजबूत एनआइए अफसर की भूमिका निभाने के लिए यामी गौतम धर को चुन रहे थे. उससे पहले थोड़ी देर यह चर्चा भी हुई कि फिल्म के बिजनेस की संभावनाओं को देखते हुए अभिनेत्री के बजाय कोई अभिनेता ले लेना बेहतर होगा.

यामी बताती हैं, “वे चाहते तो थे कि कोई अभिनेत्री ही इसकी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाए. उन्हें ऐसा नहीं लगा कि इन हालात में एक महिला अधिकारी वह नहीं कर पाएगी जो कोई पुरुष कर सकता है.” यह फैसला सही साबित हुआ क्योंकि आर्टिकल 370 ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 78 करोड़ रुपए कमाए.

दो साल बाद, मॉरिशस में छुट्टियां मनाते हुए यामी और आदित्य को फिर जश्न मनाने की वजह मिली, जब उन्हें पता चला कि फिल्म को इस साल के नेशनल अवॉर्ड में सिर्फ बेस्ट फिल्म का ही नहीं बल्कि यामी ने बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान भी मिला है.

करीब 15 साल लंबे करिअर में आखिरकार उन्हें अपनी पहली बड़ी पहचान मिली. वे कहती हैं, जब उन्होंने 2012 में विकी डोनर से शुरुआत की थी उनका आत्मविश्वास “किसी और ही स्तर पर” था, “ना कहने का कोई डर नहीं था.”

फिल्म को समीक्षकों ने भी पसंद किया और वह खूब चली भी लेकिन उसने वे दरवाजे नहीं खोले जिनकी उन्हें उम्मीद थी. उन्होंने कुछ कमजोर फिल्मों और सहायक भूमिकाओं में काम किया ताकि वे दिखती रहें और मौजूं बनी रहें.

“बुलबुला फूटता है, डर अंदर आने लगता है, आपके मन में सवाल उठते हैं और आपको एहसास होता है कि आप इस विशाल समुद्र में बस एक छोटी-सी बूंद हैं.” यह आत्म-संदेह 2019 में खत्म हुआ, जब उन्होंने दो ब्लॉकबस्टर फिल्में उड़ी और बाला दीं. ये ऐसी फिल्में थीं जिसमें यामी के अभिनय की विविधता दिखी.

अगले साल वे हक में अपने काम के लिए फिर अवॉर्ड के लिए चर्चा में होंगी. यह ड्रामा मोटे तौर पर शाहबानो की गुजारे-भत्ते की लंबी कानूनी लड़ाई से प्रेरित है. यामी कहती हैं, “मैं किसी की शख्सियत की नकल करने की कोशिश नहीं कर रही थी. फिल्म बहुत-सी महिलाओं की पीड़ा को समेटती है...आप कितना भी कर लें, कम ही पड़ेगा. इसके केंद्र में एक मां की वेदना है.”

फिलहाल, नेशनल अवॉर्ड की खबर का महत्व समझते हुए वे जानती हैं कि उम्मीदें अब और बढ़ेंगी. वे कहती हैं, “मेरे भीतर का कलाकार हमेशा उससे अलग रहना चाहेगा. मैं उसी मानसिक स्थिति में काम करना चाहती हूं, जिसमें हक और आर्टिकल 370 के दौरान थी. मैं अब भी सेट पर वही घबराहट महसूस करना चाहूंगी.” 

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