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बिसात पर बेहद शातिर | वैशाली रमेशबाबू, 24 वर्ष | ग्रैंडमास्टर, शतरंज चेन्नै

क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : उन्होंने खासा चुनौतीपूर्ण कैंडिडेट्स 2026 जीता, जिससे उन्हें वर्ल्ड चैंपियन ताज के लिए चुनौती देने का अवसर पाया है

वैशाली रमेशबाबू
अपडेटेड 28 अगस्त , 2026

इसी साल मार्च में 24 वर्षीया वैशाली रमेशबाबू साइप्रस के एक शहर पेगिया पहुंचीं. वे अपने लगातार दूसरे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलने के लिए आई थीं. बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि वे यह टूर्नामेंट जीतेंगी.

इसकी विजेता को वर्ल्ड चैंपियन के प्रतिष्ठित ताज के लिए जू वेनजुन को चुनौती देने का मौका मिलना था. लोगों के अंदेशों की अपनी वजह भी थी. आठ महिला खिलाड़ियों में उनकी ईएलओ रेटिंग सबसे कम थी और 2025-26 में उनका प्रदर्शन मिलाजुला ही रहा था.

वे प्रदर्शनों में निरंतरता बनाए नहीं रख पा रही थीं. असल में वैशाली के छोटे भाई आर. प्रज्ञानंद को सबसे कठिन क्लासिकल शतरंज टूर्नामेंटों में से एक की कठोरता से दो-चार होने के लिए ज्यादा मजबूत दावेदार माना जा रहा था. लेकिन वैशाली की यही की खासियत है. वे 64 खानों वाली बिसात पर शेरनी की तरह नहीं बल्कि बेहद चतुर-चालाक की तरह पेश आती हैं, चालें गढ़ती और गुणा-गणित करती हुई प्रतिद्वंद्वी की घेराबंदी करती हैं, जब तक उसके पास आगे बढ़ने की गुंजाइश ही न रह जाए.

दिव्या देशमुख के खिलाफ सफेद मोहरों से खेलते हुए उन्होंने अपनी हमवतन की ओपनिंग तैयारी से बचते, सिर्फ 31 चालों में खेल समेट दिया; अलेक्जांद्रा गोर्याचकिना के खिलाफ उन्होंने दबाव बढ़ाया और गलती करवाई.

पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद कहते हैं, “उनमें जबरदस्त जुझारूपन है. जब वे किसी टूर्नामेंट में संघर्ष कर रही होती हैं, तब भी खुद को संभालकर खेलती रहती हैं; और जब वे हार रही होती हैं, तब भी पूरी तरह पराजित नहीं हुई होतीं, मुश्किल पलों में कई बाजियां पलट देती हैं.”

कैंडिडेट्स में उन्होंने ठीक यही किया, एक ऐसी उपलब्धि जिसने सोशल मीडिया से दूर रहने वाली इस युवा खिलाड़ी को कोनेरू हम्पी (2011) के बाद दूसरी भारतीय महिला बना दिया. वे अब उस खिताब के लिए मुकाबला करेंगी जो अब तक भारत की पहुंच से दूर ही रहा है.

अनुशासन की बात हो तो ज्यादातर लोग मानते हैं कि वैशाली की बराबरी करना मुश्किल है. भारतीय खेल की सबसे मशहूर भाई-बहन की जोड़ी के कोच आर.बी. रमेश कहते हैं, “जब वे मेरे पास आईं तब भी वे बहुत मेहनती खिलाड़ी थीं.

वे अजनबियों के बीच संकोची रहती हैं और करीबियों के साथ हंसमुख.” शायद इसी वजह से आप इस जेन ज़ी खिलाड़ी को इंस्टाग्राम पर रील डालते नहीं देखेंगे.

वे जानती हैं कि असली कहानियां बोर्ड पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को मात देकर लिखी जाती हैं. तभी तो देश को भरोसा-सा है कि 2027 तक उसे अपनी पहली महिला विश्व चैंपियन मिल जाएगी.

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