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डार्क मोड

सबके लिए संपत्ति की सर्जक | राधिका गुप्ता, 42 वर्ष | एमडी और सीईओ, एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट, मुंबई

क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : एडलवाइस को लगातार मजबूती की ओर बढ़ाया; कंपनी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां  (एयूएम) 31 मार्च, 2017 को लगभग 6,000 करोड़ रु. थीं, जो 31 जुलाई, 2026 तक बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रु. से ज्यादा हो गईं

the Entrepreneurs 
राधिका गुप्ता (फोटो- मंदार देवधर
अपडेटेड 24 अगस्त , 2026

भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) में से एक की कमान संभालने वाली राधिका गुप्ता का सफर बहुत पहले शुरू हो गया था जब वे फाइनेंस की दुनिया में आई भी नहीं थीं.

भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी की बेटी होने के नाते उनका ज्यादातर बचपन अलग-अलग देशों में घूमते हुए बीता. उनकी जिंदगी में अहम मोड़ आया जब नौकरियों के सात इंटरव्यू में रिजेक्ट होने के बाद उन्हें अमेरिका में मैकिन्जी में नौकरी मिली.

कुछ साल बाद उन्होंने नलिन मोनिज़ से शादी की, जिनसे वे पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई के दौरान मिली थीं. यह कपल 2009 में भारत आ गया और फोरफ्रंट कैपिटल मैनेजमेंट नाम की ऑल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट बुटीक कंपनी शुरू की.

एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज ने 2014 में इस कंपनी को खरीद लिया और 2017 में, 33 साल की उम्र में, वे एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट की सीईओ बन गईं. वे देश के बीएफएसआइ (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा) सेक्टर की सबसे कम उम्र की सीईओ में से एक थीं.

तब से कंपनी 30 गुना बढ़ चुकी है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली एएमसी में से एक बन गई है.
वे कहती हैं, “मुझे सबसे ज्यादा खुशी महज आंकड़ों से नहीं, बल्कि उस निरंतरता से मिलती है जिसके जरिए हमने न केवल अच्छी इन्वेस्टमेंट परफॉर्मेंस की बल्कि ग्राहकों को बेहतर अनुभव भी दिया.”

यह सब विभिन्न तरह की व्यापक योजनाओं के जरिए संभव हुआ है, जिनमें सक्रिय रूप से प्रबंध वाली योजनाएं और पैसिव फंडों से लेकर ग्लोबल ऑफरिंग, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआइएफ) और गिफ्ट सिटी से जुड़ी स्कीमें शामिल हैं.

विविधता के प्रति उनका यह लगाव 300 से ज्यादा साड़ियों के कलेक्शन में भी दिखता है, जिनमें से हरेक भारत की हैंडलूम और क्राफ्ट की भिन्न-भिन्न परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसी ही विविधता वे अपनी कंपनी की ओर से मुहैया निवेश के मौकों में भी लाती हैं.

इससे कंपनी को इक्विटी पर ज्यादा केंद्रित एएमसी बनने में मदद मिली है जो पहले सिर्फ फिक्स्ड-इनकम पर फोकस करती थी. उसके सिप (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) खाते उद्योग में सबसे तेजी से बढ़ने वाले खातों में से एक हैं और 31 जुलाई तक 700 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर चुके हैं.

एडलवाइस के अलावा गुप्ता को आम जनता के लिए फाइनेंस को सरल बनाने का शौक है. उनका मानना है कि एसेट मैनेजमेंट एक बड़े मकसद वाला पेशा है. “हमारी जिम्मेदारी केवल व्यवसाय खड़ा करना नहीं बल्कि निवेशकों को शिक्षित और आकर्षित करना भी है.”

इसी दर्शन ने उन्हें “दाल-चावल निवेश” जैसी जोड़ने वाली अवधारणाएं गढ़ने के लिए प्रेरित किया, यहां तक कि उनकी पुस्तक मैंगो मिलियनेयर एक राष्ट्रीय बेस्टसेलर बन गई. अब सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर और जनता की नजरों में काम करते हुए कुछ नया करने की है.

शार्क टैंक के बाद राधिका अहम पब्लिक फीगर भी बन गई हैं. वे कहती हैंः “विकास, जिम्मेदारी, विजिबिलिटी और इनोवेशन को संतुलित करना मेरी सबसे अहम नेतृत्त्व चुनौतियों में से एक रही हैं.”

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