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स्पेस को बनाया बिजनेस | मेघना अग्रवाल, 48 वर्ष | को-फाउंडर, इंडीक्यूब, बेंगलूरू

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर: रियल एस्टेट में पहले से कोई अनुभव न होने के बावजूद मेघना ने फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस कंपनी की सह-स्थापना की, जो अब भारत भर में एक करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस का प्रबंधन करती है और जिसे उन्होंने 2025 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया.

Meghna
मेघना अग्रवाल (फोटो- अनिरुद्ध कौशल)
अपडेटेड 24 अगस्त , 2026

बस यूं ही संयोग से मेघना अग्रवाल आंत्रप्रेन्योर बन गईं. राजस्थान के अलवर में पलीं-बढ़ीं मेघना ने एमबीए और कंपनी सेक्रेटरीशिप के साथ करिअर की तैयारी की थी. वे कहती हैं, “किचन में सिमट जाने या सास-बहू की कहानी का हिस्सा बनने के डर ने ही मुझसे कड़ी मेहनत करवाई.”

लेकिन 9/11 के हमलों के बाद जॉब मार्केट का बुरा हाल उनके लिए भाग्यशाली मोड़ साबित हुआ. 2003 के आखिर में, 25 साल की उम्र में, उन्होंने करिअरनेट के फाउंडर ऋषि दास से शादी के एक महीने बाद ही रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म, हायरप्रो कंसल्टिंग की सह-शुरुआत की.

उतनी ही दिलचस्प कहानी 2015 में इंडीक्यूब की शुरुआत की है जो फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मुहैया कराती है. अग्रवाल और दास दोनों एक ही बिल्डिंग से अपना वेंचर चलाते थे जो बेंगलूरू के आउटर रिंग रोड टेक कॉरिडोर के साथ बनी हुई थी.

वे अपनी अतिरिक्त जगह कुछ स्टार्टअप्स को किराए पर देते थे. बाद में जब अग्रवाल को अपनी कंपनी के लिए और जगह की जरूरत हुई, तो किराएदार वहां से हटने को इच्छुक न थे. उन्होंने अग्रवाल को मनाया कि वे उनके लिए भी कहीं और वैसा ही को-वर्किंग सेटअप तैयार कर दें.

उन्होंने सड़क के उस पार 1,50,000 वर्ग फुट की एक बिल्डिंग ली. हैरानी की बात है कि वह कुछ ही महीनों में भर गई. तभी अग्रवाल को, जिन्हें रियल एस्टेट का कोई अनुभव नहीं था, बाजार में 'प्लग-ऐंड-प्ले' और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस का मौका दिखाई दिया.

आज इंडीक्यूब एक इंटीग्रेटेड मैनेज्ड स्पेस प्लेटफॉर्म के तौर पर 17 शहरों में 1.06 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस की जगह का प्रबंध करती है, और फॉर्च्यून 500 कंपनियां उसकी क्लाइंट हैं.

2025 में इंडीक्यूब को शेयर बाजार में लिस्ट कराने वाली अग्रवाल कहती हैं, “हमारी यह सोच सच साबित हुई कि फ्लेक्सिबिलिटी की अहमियत है.” वित्त वर्ष 26 में कंपनी की कमाई 37 फीसद बढ़कर 1,469 करोड़ रुपए हो गई.

कंपनी के लिए उनका विजन: “हमारी योजना रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे दूसरे क्षेत्रों में भी कदम रखने की है. यानी स्पेस से जुड़ी कोई भी चीज.” दो बच्चों की मां का कहना है कि इस आइडिया की कामयाबी का राज है—किफायत.

वे कहती हैं, “किफायत का मतलब है कि आप हर चीज में लागत को लेकर सचेत रहें. सस्ता होने और किफायती होने में फर्क है. मैं सस्ते की नहीं, बल्कि किफायती और कारगर की बात कर रही हूं.”   

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