
प्रियंका सहरिया
फिल्मों का निर्देशन करना उनकी मूल महत्वाकांक्षा नहीं थी. वे अभिनय करना चाहती थीं. सालों ठुकराए जाने और यह कह दिए जाने के बाद कि उनकी लंबाई, रंग-रूप और ‘टाइप’ कैमरे के आगे नहीं फबते, उनके भीतर कुछ टूट-सा गया.
वे कहती हैं, “मैं छोटा महसूस करने लगी.” लेकिन उनके अपनाए गए घर मुंबई ने एक और दरवाजा खोल दिया. लगातार ज्यादा से ज्यादा दुनिया भर का सिनेमा देखने के बाद उन्होंने कैनन 5डी डीएसएलआर कैमरा खरीदा और पहली फीचर फिल्म अंतर्दृष्टि (मैन विद द बायनोक्युलर्स) बनाई, जो पीछे मुड़कर जिंदगी पर नजर डालते बूढ़े आदमी के बारे में थी.
उनकी अगली फिल्म विलेज रॉकस्टार्स उस लड़की की कहानी है जिसका गिटार खरीदने का सपना विनाशकारी बाढ़ के कारण टूट जाता है. इसकी शूटिंग उन्होंने तीन साल अपने गांव में साधारण पृष्ठभूमियों से आए बच्चों के साथ की.
इसने उन्हें वह चीज लौटा दी जो अभिनेत्री के तौर पर सालों ठुकराए जाने ने छीन ली थी. वे कहती हैं, “इस प्रक्रिया ने मेरे जख्म भर दिए.” फिल्म का प्रीमियर टोरंटो में हुआ, इसने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कर जीते और 2019 के एकेडमी अवार्ड्स में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बन गई, जो यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली असमिया फिल्म थी.

दास एक के बाद एक ऊंचे मुकाम हासिल करती गईं. उनकी बाद की फिल्मों के प्रीमियर टोरंटो और बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलों में हुए, और 2024 में उन्हें एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स ऐंड साइंसेज के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित भी किया गया.
उनकी सबसे नई फिल्म नॉट ए हीरो को हाल ही बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में क्रिस्टल बीयर स्पेशल मेंशन मिला है जो उस फिल्मकार के लिए मील का पत्थर है जिसका सिनेमा बड़े बजट और तामझाम से दूर था.

