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डार्क मोड

समुद्र की सेनानी | लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए., 30 वर्ष | भारतीय नौसेना अकादमी, एषिमला, केरल | लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के., 33 वर्ष | पश्चिमी नौसेना कमान

क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : वे दोनों भारतीय नौसेना के इतिहास में पहली ऐसी महिला अधिकारी हैं जिन्हें समुद्र के रास्ते पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए शौर्य चक्र प्रदान किया गया. इन महिलाओं ने केवल दो लोगों की टीम के रूप में नाव से यह यात्रा पूरी की

(बाएं से) ले. कमांडर रूपा ए और ले. कमांडर दिलना के. आइएनएसवी तारिणी पर
अपडेटेड 25 अगस्त , 2026

दोनों के पिता सशस्त्र बलों में सेवाएं दे चुके हैं—लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. के पिता भारतीय सेना में और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. के पिता भारतीय वायु सेना में थे. इसलिए निडरता तो उनमें बचपन से ही कूट-कूटकर भरी थी.

केरल के कोझिकोड की रहने वाली दिलना नेशनल कैडेट कोर के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर बनने के बाद 2014 में बतौर लॉजिस्टिक्स ऑफिसर भारतीय नौसेना में शामिल हुई थीं.

नौकायन उनके जीवन में बाद में आया, जब उन्होंने विशाखापत्तनम में तैनाती के दौरान नौसेना के नौकायन कार्यक्रम के लिए वालंटियर सेवाएं दीं.

पुदुच्चेरी में जन्मी रूपा ने चेन्नै की अन्ना यूनिवर्सिटी से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, बेंगलूरू में नेशनल एअरोस्पेस लेबोरेटरीज में काम किया और 2017 में आर्मामेंट ऑफिसर के रूप में नौसेना में शामिल हुईं. धीरे-धीरे डिंगी-सेलिंग से प्रतिस्पर्धी और समुद्री नौकायन की ओर बढ़ीं.

2021 में भारतीय नौसेना के ओशन सेलिंग नोड, आइएनएस मांडवी, गोवा में इन दोनों के रास्ते एक हो गए. 2023 में सागर परिक्रमा कार्यक्रम के लिए चुने गए 17 अफसरों में दोनों भी शामिल थीं.

ये कार्यक्रम नौसेना अधिकारियों को कठिन लंबी दूरी की और जलयात्रा अभियानों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था. फिर गहन प्रशिक्षण हुआ, जिसमें सीमैनशिप, नेविगेशन, मौसम विज्ञान, सर्वाइवल, आपातकालीन प्रतिक्रिया, इंजीनियरिंग और समुद्र में चिकित्सा देखभाल शामिल थे.

भारतीय नौसेना के सिर्फ महिलाओं वाले दूसरे वैश्विक नौकायन अभियान नाविका सागर परिक्रमा-2 के लिए अंतिम चयन से पूर्व इस जोड़ी ने केपटाउन के रास्ते रियो डी जेनेरियो, मॉरिशस में पोर्ट लुई की कठिन यात्राएं पूरी कीं, और सिर्फ दो लोगों की टीम के रूप में पोर्ट ब्लेयर तक और वहां से वापसी की यात्रा पूरी की, जिसके साथ उन्हें 38,000 समुद्री मील से अधिक का नौकायन अनुभव हासिल हुआ.

अंतत: दो अक्तूबर, 2024 को यह जोड़ी 56-फुट लंबे समुद्री नौकायन पोत आइएनएसवी तारिणी पर सवार होकर गोवा से रवाना हुईं और समुद्र में 238 दिनों और हिंद, प्रशांत, अटलांटिक और दक्षिणी महासागरों में 25,600 समुद्री मील से अधिक की यात्रा के बाद 29 मई, 2025 को वापस लौटीं. इसके साथ ही वे दुनिया की लोगों की जलयात्रा पूरी करने वाली पहली भारतीय महिलाएं बनीं.

वे सेलबोट से दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में स्थित दुनिया के महासागरों के सबसे दूरस्थ बिंदु प्वाइंट निमो तक पहुंचने वाली पहली भारतीय भी हैं.

इस वर्ष इस पराक्रम के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया, जिससे वे भारतीय नौसेना के इतिहास में देश का तीसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गईं. यह ऐसा मील का पत्थर जो युवा लड़कियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित कर रहा है.

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