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मैकरॉन की महारानी | पूजा ढींगरा, 40 वर्ष | फाउंडर और सीईओ, ली15 पटिसेरी, मुंबई

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : 23 साल की उम्र में ली15 पटिसेरी शुरू करने वाली ढींगरा एक पेस्ट्री शेफ और फूड इन्फ्लुएंसर भी हैं. उनके इंस्टाग्राम पर 66 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं. उनको फ्रेंच मैकरॉन भारत लाने का श्रेय जाता है. फ्रेंच मैकरॉन उनकी रिटेल चेन का सिग्नेचर प्रोडक्ट बन गया

the Entrepreneurs
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अपडेटेड 24 अगस्त , 2026

पूजा ढींगरा का बेकिंग प्रेम कम उम्र में ही शुरू हो गया था. दरअसल, उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं था क्योंकि उनका जन्म मुंबई के ऐसे परिवार में हुआ जो “खाने-पीने का बहुत शौकीन” था, जहां “लगभग हर कोई खाना बनाना जानता था और बहुत लजीज खाना बना लेता था”.

जब वे छह साल की थीं, तो उनकी एक आंटी ने उन्हें ब्राउनी बनाना सिखाया. बेकिंग का उनका शौक किशोर वय में भी जारी रहा; वे दोस्तों और परिवार के लिए मिठाइयां बनातीं और स्कूल ले जाने के लिए चीजें तैयार करतीं.

पूजा कहती हैं, “खाना मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है, और अगर मैं खाने-पीने का व्यवसाय नहीं करती, तो मुझे नहीं पता कि मैं और क्या कर रही होती.” लेकिन उन्होंने सबसे पहले जिसकी पढ़ाई शुरू की, वह खाने-पीने की नहीं थी. उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की थी. लॉ स्कूल में वे दो ही हफ्ते रहीं क्योंकि उन्हें एहसास हो गया कि यह पेशा उनके लिए नहीं है.

उन्होंने अपने लिए खान-पान का क्षेत्र चुना. इसके लिए पहले स्विट्जरलैंड गईं और वहां हॉस्पिटैलिटी और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की. फिर फ्रेंच पटिसेरी सीखने के लिए पेरिस में ले कॉर्दां ब्ल्यू नाम के संस्थान गईं. 23 साल की उम्र में वे मुंबई लौटीं तो कारोबार शुरू करने के लिए तैयार थीं—इस तरह 2010 में ली15 की शुरुआत हुई.

गूंथा जाने वाला आटा-मैदा फेंटना उनको अच्छा लगता था लेकिन उसकी लोई बनाना उन्हें नापसंद था. शुरुआत में उनकी उम्र और महिला होना उनकी बाधा बनी. “लोगों से अपनी बात गंभीरता से मनवाना भी एक समस्या थी. हर कोई जानना चाहता था कि मेरे पिता या पति कहां हैं”. बाद में उन्हें उन सभी चुनौतियों का सामना करना पड़ा जो एक आंत्रप्रेन्योर को करनी पड़ती हैं: जैसे ग्रोथ की दिक्कतें, कारोबार को आगे बढ़ाना, सही टीम चुनना वगैरह. लेकिन, जैसा कि वे कहती हैं, “मैं हमेशा से जिज्ञासु रही और सीखती रहती हूं. जो चुनौतियां आती हैं, मैं उनसे सीखती और आगे बढ़ती हूं.”

पेरिस में रहते हुए पूजा ने मैकरॉन चखा था—यह मरांग से बनी फ्रेंच सैंडविच कुकी होती है—जिसे वे बाद में भारत लाईं; ऐसा करने वाली वे पहली पेस्ट्री शेफ थीं. यह 16 साल पहले की बात है और मैकरॉन आज भी ली15 की सबसे बड़ी विशेषता है.

हाल में उन्होंने मुंबई के फोर्ट इलाके में ‘पार्डन अवर फ्रेंच’ नाम से फ्रेंच-स्टाइल का कैफे खोला है. उनकी योजना मुंबई में ली15 पटिसेरी के व्यंजनों के वितरण पर ध्यान देने की है और साथ ही वे दूसरी चीजों—जैसे किताबें, कोर्स और यूट‍्यूब चैनल—को डिजिटल तरीके से बढ़ाने की सोच रही हैं.

सात किताबों की लेखिका पूजा की पहली पुस्तक द बिग बुक ऑफ ट्रीट्स को गोरमंड वर्ल्ड कुकबुक अवॉर्ड में दूसरा स्थान मिला था. उनकी अन्य किताबों में द होलसम किचन, बेस्टसेलर कांट बिलीव इट्स एगलेस, कमिंग होम, द ली15 कैफे कुकबुक बेक ऐट होम शामिल हैं.

उनकी नई किताब लिटिल बुक ऑफ कुकीज बच्चों के लिए है. पूजा के इंस्टाग्राम पर 66 लाख फॉलोअर और यूट्यूब चैनल पर 34,000 सब्स्क्राइबर हैं.

वे लोकप्रिय पॉडकास्ट # नोशुगरकोट भी होस्ट करती हैं. इसमें वे शेफ, दोस्तों, दूसरे आंत्रप्रेन्योर्स से “आंत्रप्रेन्योर बनने में लगे खून-पसीने, आंसू और अन्य चीजों” पर बात करती हैं.  

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