
अमीरा शाह जब 2001 में अपने पिता के पैथोलॉजी बिजनेस से जुड़ीं तो वह उस समय भी मुंबई में एक लैब से शुरू हुआ डॉक्टर की अगुआई में चलने वाला बिजनेस था. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस ऐट ऑस्टिन से फाइनेंस में ग्रेजुएट शाह ने कस्टमर सर्विस से शुरुआत की और इस तरह शुरू से ही बिजनेस समझने लगीं.
अगले दो दशक में उन्होंने इसे मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर में बदल दिया, जो आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी डायग्नोस्टिक्स चेन है और 750 से ज्यादा शहरों में काम करती है.
इस दौरान उन्होंने तीन दौर में प्राइवेट इक्विटी जुटाई और 2019 में कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराया.
हालांकि पिछले दो-एक साल में शाह ने अपना ध्यान रणनीतिक फैसलों पर केंद्रित किया है. 2024 में वे मैनेजिंग डायरेक्टर से एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन बन गईं. शाह बताती हैं, “एक दौर ऐसा भी था जब मैं दिन में 15-16 घंटे काम करती थी.
पीछे हटना मुश्किल था, लेकिन लगा कि कंपनी को अब मुझसे कुछ अलग चाहिए.” वे कहती हैं कि उनका काम अब आगे के लिए कंपनी की दिशा तय करना है. “जब कोई कंपनी मेट्रोपोलिस जितनी पुरानी हो तो आपको नई-नई चीजें करनी होती हैं और विजन रखना होता है कि उसे कहां ले जाना है.”
यह विजन दिख भी रहा है. मेट्रोपोलिस अब जीनोमिक्स, नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग और स्पेशलाइज्ड डायग्नोस्टिक्स में तेजी से आगे बढ़ रही है. साथ ही, कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर में कोर डायग्नोस्टिक्स, आगरा में साइंटिफिक पैथोलॉजी और देहरादून में डॉ. आहूजाज़ पैथोलॉजी ऐंड इमेजिंग सेंटर का अधिग्रहण करके अपना विस्तार किया है.
वे दूसरी महिलाओं के लिए अवसर पैदा करने पर भी ध्यान दे रही हैं. उदयति फाउंडेशन में महिला आंत्रप्रेन्योरशिप की सह-संस्थापक और चेयरपर्सन के रूप में शाह इस पर काम कर रही हैं कि ज्यादा महिलाओं को कामकाजी बनाया जाए.

मेट्रोपोलिस में लगभग 44 प्रतिशत महिलाएं काम करती हैं. उसने उन्हें अपनी सोच को हकीकत में बदलने का मौका दिया है. लेकिन उनका मानना है कि शिक्षा से शुरुआत होती है. वे कहती हैं, “महिलाओं में भी यह आत्मविश्वास होना चाहिए कि वे इसका इस्तेमाल कर सकें.”

