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मशरूम महिला | बीना देवी, 49 वर्ष | मशरूम किसान तिलकारी, मुंगेर, बिहार 

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : बालिका वधू बनने से नारी शक्ति पुरस्कार विजेता तक बीना देवी का सफर और उनका मशरूम कारोबार महिला सशक्तीकरण की शानदार मिसाल

the innovators  
बीना देवी (फोटो- रंजन राही)
अपडेटेड 25 अगस्त , 2026

अपनी नारीवादी कविता द मशरूम हंटर्स में नील गैमन बताते हैं कि महिलाएं ही पहली वैज्ञानिक हैं क्योंकि जब पुरुष शिकार के लिए बाहर जाते थे तब महिलाएं बच्चों को अपने साथ कपड़े की झोली में बांधकर निकलती थीं ताकि मशरूम चुनने के लिए उनके हाथ खाली रहें.

बिहार के एक छोटे-से गांव तिलकारी की बीना देवी भी इसकी मिसाल हैं. उन्होंने 2014 में घर पर मशरूम उगाना शुरू किया. 2019 तक 450 वर्ग फुट का एक शेड भी तैयार हो गया. 2020 में उनके इस उद्यम ने उन्हें बिहार की ‘मशरूम महिला’ का खिताब दिलाया और उसी साल उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

महज 14 साल की उम्र में बीना की शादी एक किसान कृष्णकांत से कर दी गई थी. घर की आर्थिक स्थिति तंग थी, शायद यही वजह थी कि दूसरी कम उम्र की दुल्हनों के विपरीत बीना अपने पति के साथ खेतों में काम करने लगीं. उनकी मेहनत देख जल्द ही ससुर प्यार से उन्हें ‘गृहलक्ष्मी’ कहने लगे. उनका यह आशीर्वाद आगे चलकर सच साबित हो गया.

बीना साल 2011 में सरपंच चुनी गईं. अगले साल बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ग्रामीण महिलाओं को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देने के लिए तिलकारी पहुंचे, ताकि महिलाएं आजीविका कमा सकें. बीना ने जल्द ही इसमें महारत हासिल कर ली. उन्होंने समझ लिया कि मशरूम की खेती के लिए कम जगह की जरूरत होती है, निवेश भी कम करना पड़ता है.

इस प्रयोग ने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी. अतिरिक्त आमदनी से परिवार बेहतर भविष्य के सपने देखने लगा. आज उनके चारों बच्चे अच्छे पढ़े-लिखे हैं. उनकी सबसे छोटी बेटी बैचलर ऑफ कंप्यूटर ऐप्लीकेशंस की पढ़ाई कर रही है. परिवार का पुराने कच्चे घर के पास ही एक पक्का मकान भी खड़ा है, जिसमें बीना ने करीब 12 लाख रुपए का निवेश किया है.

मगर उनकी उपलब्धि महज इतनी ही नहीं है. दरअसल, उन्होंने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है. आज 100 से ज्यादा गांवों की महिलाएं उनके मार्गदर्शन में मशरूम की खेती के जरिए आजीविका कमा रही हैं. बीना प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बिहार में ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी जाती हैं.

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