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दुर्लभ प्राणी की संरक्षक | डॉ. बरखा सुब्बा, 41 वर्ष | संरक्षण वैज्ञानिक; एग्जीक्यूटिव मेंबर, फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन, दार्जिलिंग

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : 2026 के व्हिटली अवाॅर्ड की विजेता हैं डॉ. बरखा सुब्बा. वे संकटग्रस्त हिमालयन उभयचर प्राणी सालामैंडर की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर भारत के पहले संरक्षण प्रयास का नेतृत्व कर रहीं

डॉ. बरखा सुब्बा (फोटो- आवस्दिया राया)
अपडेटेड 25 अगस्त , 2026

पूर्वी हिमालय में पाया जाना वाला हिमालयन सैलामैंडर बाकी लोगों की नजरों में भले ही एक गुमनाम उभयचर हो लेकिन डॉ. बरखा सुब्बा के लिए यह प्रकृति की गंभीर चेतावनी है. उनका मानना है कि जब कोई प्रजाति लुप्त होती है तो वह जीव ही गायब नहीं होता बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र और उस पर निर्भर मानव समुदाय भी धीरे-धीरे संकट में घिर जाता है.

सुब्बा के लिए बचपन की यादें उनकी दादी की सुनाई वे कहानियां हैं जो पहाड़ों, वन्यजीवों और जंगलों में भोजन की तलाश की यात्राओं के ताने-बाने में बुनी थीं. वे मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैंने एक संरक्षण वैज्ञानिक बनने का सपना नहीं देखा था. बस अपनी जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करती रही.”

सुब्बा अपने परिवार में पहली पीढ़ी की पोस्टग्रेजुएट हैं, जिन्होंने रिसर्च के लिए पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क पहुंचने से पहले जूलोजी की पढ़ाई की. यही वह जगह थी जहां हिमालयन सैलामैंडर के प्रति उनकी रुचि जगी, जो एक शर्मीला उभयचर प्राणी होता है और केवल मॉनसून के दौरान बाहर निकलता है. साल का बाकी समय जमीन में रहकर बिताता है.

सुब्बा ने कोविड महामारी के दौरान दार्जिलिंग में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के साथ काम शुरू किया और फिर हिमालयन सैलामैंडर पर केंद्रित एक महत्वाकांक्षी संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया.

उनका मानना है, संरक्षण केवल विज्ञान के माध्यम से सफल नहीं हो सकता. इसके लिए विश्वास, साझा स्वामित्व और लोगों की भागीदारी की आवश्यकता होती है.

आज चाय बागान के मजदूर, ग्रामीण, स्कूल और वन अधिकारी सभी उन वेटलैंड्स की रक्षा में भागीदार बन गए हैं जहां यह प्रजाति प्रजनन करती है.

सुब्बा की सोच ने उन्हें 2026 के व्हिटली अवार्ड के साथ वैश्विक मान्यता दिलाई, जिससे भारत की सबसे कम ज्ञात प्रजातियों में से एक की रक्षा पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित हुआ और साथ ही आवश्यक धन भी उपलब्ध हुआ.

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