
इस साल नेशनल मैथमेटिक्स रिसोर्स सेंटर की स्थापना अनुसंधान-आधारित, उद्योग-उन्मुख और इंटरडिसिप्लिनरी (अंतर्विषयक) विज्ञान शिक्षा के केंद्र के तौर पर ख्यात हिंदू कॉलेज की प्रतिष्ठा को और बढ़ाने वाली है. यह सेंटर एडवांस्ड लर्निंग, इनोवेशन और मैथमैटिकल आउटरीच के लिए एक प्रमुख केंद्र के तौर पर काम करेगा. इसके साथ ही एआइ लैब और कार्यशालाओं, सम्मेलनों तथा एआइ-केंद्रित पहलकदमियों पर शृंखलाबद्ध आयोजन छात्रों को विभिन्न विषयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका को समझने में मदद करेंगे.
इस वर्ष यह कॉलेज अपनी विशेष प्रशिक्षण सुविधाएं भी बढ़ा रहा है. इसमें मशरूम की खेती और प्लांट टिश्यू कल्चर के कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) और एक प्रमुख पहल 'सस्टेनेबल परफ्यूमरी: द आर्ट ऑफ क्राफ्टिंग फ्रैग्रेंसेज ऐंड नर्चरिंग करिअर्स' भी शामिल हैं. ये कौशल विकास केंद्र छात्रों को बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, फूड सिस्टम और आंत्रेप्रेन्योरशिप में व्यावहारिक अनुभव मुहैया करेंगे, जबकि परफ्यूमरी के सर्टिफिकेट प्रोग्राम के बारे में बताया जाता है कि यह केमिस्ट्री, बॉटनी, सस्टेनेबिलिटी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को जोड़ता है.
इससे तेजी से बढ़ते उद्योगों में करिअर के नए रास्ते खुलते हैं. प्रमाणित परफ्यूमर्स के पहले बैच की सफलता के बाद अब इस प्रोग्राम में उद्योगों की मजबूत भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का अनुभव भी मिल रहा है. पहले बैच के कई छात्रों ने पूरी कामयाबी के साथ प्लेसमेंट हासिल किया, जबकि कुछ ने खुद का स्टार्टअप भी शुरू किया है.
साइंस के छात्रों को रिसर्च के लिए विशिष्ट सुविधाओं के बढ़ते ईकोसिस्टम से फायदा होगा, जिसमें मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन लैब, पॉलिमर रिसर्च लैब, ड्रोसोफिला रिसर्च फैसिलिटी, सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल स्टडीज, ग्रीन केमिस्ट्री नेटवर्किंग सेंटर और डिजाइन ऐंड इनोवेशन लैब वगैरह शामिल हैं. यहां टेक्नोलॉजी का समायोजन एक और बड़ी प्राथमिकता होने जा रहा है. जल्द ही तैयार होने वाली एआइ ट्रेनिंग ऐंड इनोवेशन लैब सभी विषयों के छात्रों को एआइ, डेटा एनालिटिक्स और उभरती डिजिटल तकनीकों से जुड़ने के अवसर मुहैया करेगी.

वर्ष 2026 में व्यावहारिक शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. बायोटेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थकेयर इनोवेशन, जलवायु अध्ययन और एडवांस्ड मैटेरियल जैसे क्षेत्रों में बाहर से वित्त पोषित अनुसंधान परियोजनाओं के साथ, छात्रों को उनकी पढ़ाई के शुरुआती वर्षों में ही रिसर्च टीम का हिस्सा बनाया जाएगा.
कॉलेज बायोसेंसर्स, एनवायरनमेंटल टॉक्सिकोलॉजी, सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और जलवायु संबंधित अध्ययन जैसे क्षेत्रों में प्रोजेक्ट के माध्यम से इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को भी बढ़ावा देगा. ये प्रोजेक्ट छात्रों को उन वैज्ञानिक चुनौतियों से भी अवगत कराएंगे जहां एआइ आधारित विश्लेषण, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. छात्रों की मानें तो सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब स्नातक स्तर के छात्र भी रिसर्च और इनोवेशन प्रोग्राम का हिस्सा होंगे, और यहां अपनी पढ़ाई शुरू करने के समय से ही सक्रिय योगदान देंगे.
गुरु वाणी
हिंदू कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर अंजू श्रीवास्तव ने कहा, ''हिंदू कॉलेज की ताकत है यहां के छात्रों का जीवंत ईकोसिस्टम. 65 से ज्यादा सोसाइटीज के जरिए छात्र क्लासरूम के बाहर अपनी रुचियों और जज्बों को तराश सकते हैं.''
छात्रा की राय
'बी.एससी. (ऑनर्स) बॉटनी, थर्ड ईयर की एक छात्रा युक्ति कासोंदिया ने कहा, 'एक छात्र नेता, रिसर्चर और पर्यावरण की प्रवक्ता के रूप में मैं महसूस करती हूं कि हिंदू ने मुझे तालीम से कहीं ज्यादा कुछ दिया है...इसने मुझे बतौर एक इंसान खुद को विकसित करने और अपने सब्जेक्ट्स में गहरी समझ पैदा करने का प्लेटफॉर्म मुहैया किया है."
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