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इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: प्रगति का लिख रहा पर्चा

रोगों के पहचान की सेवाओं के विस्तार, नवाचार में निवेश और छात्रों के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की बदौलत एम्स जोधपुर देश में नई पीढ़ी के अग्रणी चिकित्सा सस्थानों में से एक बनकर उभरा

डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एम्स, जोधपुर में
अपडेटेड 6 जुलाई , 2026

जोधपुर के दक्षिणी छोर पर विशाल कैंपस में बसा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर एक दशक से कुछ ही ज्यादा वक्त में जबरदस्त ढंग से उभरकर आया है. नए एम्स में से एक के तौर पर शुरू हुआ यह संस्थान बढ़ते-बढ़ते चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और रोगियों की देखभाल का बड़ा केंद्र बन गया है. इसकी तरक्की रैंकिंग्स में भी दिखी जहां सर्वाधिक सुधार की कैटेगरी में 2022 के 21वें नंबर से यह 2026 में आठवें पायदान पर आ गया.

संस्थान का शिलान्यास 2004 में हुआ था. अकादमिक गतिविधियां 2012 में शुरू हुईं. अगले ही साल 2013 में नर्सिंग कॉलेज और बाह्य रोगी सेवाएं शुरू हो गईं, जबकि आंतरिक रोगी विभाग 2014 में खुला. संस्थान अब हर साल एमबीबीएस के 150 छात्रों को प्रवेश देता है. इसके अलावा नर्सिंग, पैरामेडिकल, पोस्टग्रेजुएट, सुपरस्पेशिएलिटी और डॉक्टोरल प्रोग्रामों में दाखिला लेने वाले छात्रों के साथ कुल छात्र करीब 700 हो जाते हैं.

मगर इसके उभार की जितनी झलक इसकी अकादेमिक पेशकशों से मिलती है उतनी ही क्लिनिकल या नैदानिक सेवाओं में मौजूदगी से भी मिलती है. एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी कहते हैं, ''हमने न केवल अनुसंधान और सुपरस्पेशिएलिटी कोर्स शुरू करने पर ध्यान दिया बल्कि मरीजों को अपनी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए आकर्षित करने पर भी जोर दिया ताकि छात्रों और फैकल्टी को ज्यादा समृद्ध क्लिनिकल अनुभव मिल सके.

ओपीडी में हर साल आने वाले मरीजों की संख्या 2013-14 में महज 47,510 से छलांग लगाकर आज 14.3 लाख से ऊपर पहुंच गई है. अस्पताल अब रोज 5,000 से ज्यादा मरीजों की सेवा कर रहा है. भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या 2015 में 2,262 से बढ़कर 2025 में करीब 90,000 पर पहुंच गई.''

नैदानिक सेवाओं के तेज विस्तार के साथ अनुसंधान और नवाचार पर भी लगातार ज्यादा से ज्यादा जोर दिया गया. एम्स जोधपुर ने 31 पेटेंट फाइल किए, जिनमें से पांच मंजूर हो गए हैं. इसके पारिस्थितिकी तंत्र से निकलकर आने वाले नवाचारों में स्मार्ट सीरिंज सोलोजेक्ट, नवजात शिशुओं को लाने-ले जाने के लिए इनक्यूबेटर अनुरीवा, और एआइ-समर्थ अस्पताल प्रबंधन प्लेटफॉर्म ईजमाइमेड शामिल हैं.

चिकित्सा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थान ने एम्स जोधपुर इन्नोवेशन ऐंड आंत्रेप्रेन्योरशिप फाउंडेशन की स्थापना की. आइआइटी जोधपुर के साथ मिलकर यह भारत का पहला ट्रांसडिस्प्लिनरी मेडटेक प्रोग्राम चलाता है, जिसमें डॉक्टर और इंजीनियर साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवा समाधान विकसित करते हैं. इस पहल का नतीजा छात्र-संकाय के 14 स्टार्ट-अप, पेटेंट की 26 अर्जियों और 50 शोध प्रकाशनों के रूप में सामने आ चुका है.

यहां पढ़ाई के अलावा भी बहुत-सी चीजें छात्रों को आकर्षित करती हैं. पीडिएट्रिक्स या बाल चिकित्सा में पहले साल के सीनियर रेजिडेंट और संस्थान के 2015 के एमबीबीएस बैच के पूर्व छात्र डॉ. पारस तिवारी का कहना है कि कोर्स के अलावा बहुत सारी गतिविधियां और सर्वांगीण विकास के अवसर उन्हें एम्स जोधपुर की तरफ खींच लाए. 2012 में शुरुआत के समय से ही संस्थान के सफर का हिस्सा रहे डीन (एकेडमिक्स) डॉ. पंकज रवि राघव कहते हैं, ''कैंपस छात्रों के अनुकूल है, इसीलिए यह बेहद काबिल छात्रों को आकर्षित करता है.''

गुरु वाणी

''हमने अनुसंधान और सुपरस्पेशिएलिटी कोर्स शुरू करने पर तो ध्यान दिया ही, बहुत-से राज्यों के मरीजों को अपनी सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए आकर्षित करने पर जोर दिया ताकि छात्रों और फैकल्टी को क्लिनिकल सेवाओं का ज्यादा समृद्ध अनुभव मिल सके.''
डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एम्स, जोधपुर

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