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डार्क मोड

जहां से निकलते हैं उस्ताद

स्थापना के छह दशक से ज्यादा समय बाद आइआइएमसी अपनी समृद्ध विरासत को एआइ, इनोवेशन और उद्यमिता के साथ जोड़ रहा ताकि तैयार की जा सके मीडिया और कम्युनिकेशन पेशेवरों की अगली पीढ़ी

इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आइआइएमसी) नई दिल्ली कैंपस में वाइस चांसलर के साथ छात्र
अपडेटेड 9 जुलाई , 2026

उन्नीस सौ पैंसठ में स्थापित भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी) ने 9,200 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षित किया है और इस तरह से पत्रकारों, संचार पेशेवरों, मीडिया लीडर्स की कई पीढ़ियां तैयार की हैं. मीडिया उद्योग तकनीकी बदलावों के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है. ऐसे में संस्थान अब बदलाव के अगले चरण में खुद को सबसे आगे रखने की तैयारी कर रहा है.

इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण अपनी तरह की पहली एआइएमई (एआइ इन मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट) एकेडमी की शुरुआत है. यह पहल छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिंथेटिक मीडिया टूल्स और एल्गोरिद्म आधारित प्रणालियों से परिचित कराने के लिए तैयार की गई है, जो कंटेंट निर्माण, वितरण और न्यूजरूम संचालन को नए सिरे से बदल रही हैं. मकसद यह है कि कल के मीडिया पेशेवर सिर्फ स्टोरीटेलिंग और रिपोर्टिंग को ही न समझें, बल्कि उन तकनीकों को भी जानें जो दोनों को बदल रही हैं.

एआइएमई संस्थान में चल रहे व्यापक विस्तार का हिस्सा है. पिछले एक साल में आइआइएमसी ने फुल-टाइम और पार्ट-टाइम शोधार्थियों के लिए पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए हैं और छात्र-नेतृत्व वाले मीडिया उपक्रमों को मेंटॉरशिप और शुरुआती फंडिंग के जरिए समर्थन देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर बनाया है. ये पहलकदमियां मिलकर संकेत देती हैं कि संस्थान अब छात्रों को सिर्फ मौजूदा उद्योग भूमिकाओं के लिए तैयार करने से आगे बढ़कर रिसर्च, इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है.

संस्थान ने अपने अकादमिक कार्यक्रमों का भी विस्तार किया है. दो साल पहले शुरू किए गए मीडिया बिजनेस स्टडीज और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन में एमए कार्यक्रम मीडिया और संचार में एडवांस्ड ट्रेनिंग चाहने वाले छात्रों के बीच बढ़ती दिलचस्पी हासिल कर रहे हैं. वहीं आइआइएमसी के पुराने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम, जिनमें अंग्रेजी पत्रकारिता और विज्ञापन तथा जनसंपर्क शामिल हैं, अब भी उन छात्रों को आकर्षित करते हैं जो न्यूजरूम, एजेंसियों और संचार भूमिकाओं में सीधे प्रवेश का रास्ता चाहते हैं.

वाइस चांसलर प्रज्ञा पालीवाल गौड़ कहती हैं, ''हमारे कार्यक्रम ऐसे मीडिया और संचार पेशेवर तैयार करने के लिए बनाए गए हैं, जो उद्योग के लिए फिट हों. यहां की पढ़ाई की सबसे अच्छी बात उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का दिलचस्प मेल है.'' कई फैकल्टी सदस्य न्यूजरूम और उद्योग का पेशेवर अनुभव लेकर क्लासरूम में आते हैं और व्यावहारिक समझ को मजबूत अकादमिक आधार के साथ जोड़ते हैं. वे यह भी कहती हैं, ''आइआइएमसी का पाठ्यक्रम मीडिया उद्योग के बदलते रुझानों को शामिल करने के लिए नियमित रूप से अपडेट किया जाता है.''

डीएमसीएस, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के मीडिया छात्र प्रशिक्षण लेते हुए

तकनीक से बदल रहे क्षेत्र में यह सोच और ज्यादा अहम हो गई है. एआइएमई एकेडमी और इनक्यूबेशन सेंटर के जरिए आइआइएमसी छात्रों को सिर्फ बदलाव के अनुकूल ढलने के लिए नहीं, बल्कि मीडिया के भविष्य को आकार देने में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है.  

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