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इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: तकनीक में ईजाद का अगुआ

आइआइटी दिल्ली में एआइ में स्पेशलाइजेशन स्वतंत्र विषय नहीं बल्कि छात्रों के सीखने, मिलकर काम करने और नई चीजें खोजने के तरीकों में व्यापक बदलाव लाने वाला बुनियादी हुनर.

engineering (government)
IIT दिल्ली के छात्र शिक्षक एक प्रोजेक्ट पर काम करते हुए
अपडेटेड 9 जुलाई , 2026

जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग, करिअर और कक्षाओं को नए सिरे से गढ़ रही है, आइआइटी दिल्ली अपने इतिहास के सबसे अहम कायापलट में से एक में जुटा है. संस्थान का 2026 का विजन ज्यादा प्रोग्राम जोड़ने के बारे में नहीं बल्कि नए सिरे से यह तय करने के पर है कि छात्र कैसे सीखते और तेजी से बदलती दुनिया के लिए कैसे तैयार होते हैं.

इस बदलाव के मूल में बहुविषयक शिक्षा पर ज्यादा मजबूती से जोर देना है. संज्ञानात्मक विज्ञान का नया एमएससी प्रोग्राम स्कूल ऑफ ह्यूमेनिटीज ऐंड सोशल साइंसेज, स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और संस्थान के जीवविज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र के विशेषज्ञों को एक साथ लाता है.

दर्शनशास्त्र, लॉजिक, न्यूरोसाइंस और एआइ को जोड़ने वाले इस प्रोग्राम से आइआइटी दिल्ली के इस विश्वास की झलक मिलती है कि कल की चुनौतियों के लिए सभी विषयों की पारंपरिक सीमाओं से आगे जाने वाले ज्ञान की जरूरत होगी.

यही फलसफा अब संस्थान के व्यापक अकादमिक ढांचे को लगातार ज्यादा से ज्यादा गढ़ रहा है. अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों को अब अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ने वाले विषय चुनने, वैकल्पिक विषयों को अपने हिसाब से ढालने और मुख्य विषयों को ज्यादा आसानी से बदलने की छूट हासिल है. लक्ष्य यह है कि पढ़ाई के सख्त दायरों से बाहर निकालकर और छात्रों को अपनी शैक्षिक यात्रा खुद तय करने दें, बहुत कुछ वैसे ही जैसा दुनिया के अव्वल विश्वविद्यालयों में होता है.

एआइ इस बदलाव के केंद्र में है और आइआइटी दिल्ली इसे विषयों और अनुशासनों में समाहित कर रहा है. रियल एस्टेट में एआइ के इस्तेमाल का रास्ता दिखाने वाले पूर्व छात्र अनंत यार्डी की तरफ से 100 करोड़ रुपए के परोपकारी योगदान ने यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इन कोशिशों को और भी सहारा दिया है. फिर भी, जैसा कि डीन (प्लानिंग) प्रो. सोमनाथ वैद्य रॉय बताते हैं, एआइ को स्पेशलाइजेशन की तरह नहीं बल्कि छात्रों के लिए बुनियादी हुनर माना जा रहा है.

पढ़ाई से आगे आइआइटी दिल्ली का जोर अनुभव करके सीखने पर ज्यादा है. अंडरग्रेजुएट और एमटेक दोनों छात्रों के लिए समर इंटर्नशिप अनिवार्य है, वहीं डॉक्टोरल स्कॉलर को उद्योग के साथ ज्यादा घनिष्ठता से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

उद्देश्य यही है कि छात्रों को टीम में काम करते हुए, समय सीमाओं को पूरा करते हुए और असल दुनिया की समस्याओं को हल करते हुए पेशेवर जिंदगी की हकीकतों का अनुभव मिले. छात्रों को करिअर की पारंपरिक राहों से हटकर सोचने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.

मसलन, तेजी से विकसित होते टेक्नोलॉजी के परिदृश्य में उद्यमिता की सोच और लगन पैदा करने के लिए प्रो. रॉय उनसे आग्रह करते हैं कि पहले ही साल से कोई 'साइड प्रोजेक्ट’ चुनिए, चाहे वह स्टार्ट-अप हो, शोध की पहल, रचनात्मक काम, या कोई सामाजिक उद्यम हो.ठ्ठ
आइआइटी दिल्ली में एक औद्योगिक वर्कशॉप

आइआइटी दिल्ली के प्रो. सोमनाथ वैद्य रॉय डीन, प्लानिंग के मुताबिक, आइआइटी दिल्ली नए एकेडमिक सत्र में लचीली, बहुविषयक और उद्योग से जुड़ी पहल शुरू कर रहा है. यह पहल पढ़ाई-लिखाई के मूल से अकादमिक नवाचार, अनुसंधान की ताकत और असल दुनिया की प्रासंगिकता को जोड़कर छात्रों को भविष्य के करिअरों के लिए लैस और तैयार करेगी.  

इंडिया टुडे के बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026:

देशभर के 1,800 से अधिक संस्थानों की 14 प्रमुख स्ट्रीम्स में रैंकिंग, साथ में कोर्स, प्लेसमेंट और कैंपस लाइफ का विस्तृत विश्लेषण पढ़िए इंडिया टुडे के इस विशेषांक में. भारत के बेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज कौन-से हैं? पूरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें- https://bestcolleges.indiatoday.in/full-rankings 

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