
इस साल मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (मेड्स या एमएआइडीएस) में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए दंत चिकित्सा की पढ़ाई अब किताबों, लैब के काम और रोजमर्रा की क्लिनिकल ट्रेनिंग तक ही सीमित नहीं, बल्कि और आगे बढ़ती जा रही है.
भारत के अग्रणी सरकारी डेंटल संस्थानों में से एक, मेड्स में एक बड़ा भारी टीचिंग हॉस्पिटल है जहां रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी आधारित स्वास्थ्य सेवा पर फोकस लगातार बढ़ता जा रहा है.
विद्यार्थियों के लिए एक बहुत बड़ा फायदा क्लिनिकल अनुभव का है जो वहां बड़े पैमाने पर मिलता है. संस्थान में हर दिन अमूमन 2,400 से 2,500 मरीजों का इलाज होता है. लिहाजा, यहां अंडरग्रेजुएट छात्रों को ट्रेनिंग के शुरुआती दौर से ही कई तरह की डेंटल प्रोसीजर को देखने और मरीजों की देखभाल पर नजर रखने और उनसे जुड़ने का मौका मिलता है.

नए एकेडमिक वर्ष में ऐसी नई टेक्नोलॉजी पर ज्यादा जोर दिए जाने की उम्मीद है जो दुनिया भर में दंत चिकित्सा को बदल रही हैं. छात्र आशा कर सकते हैं कि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल दंत चिकित्सा, चेयरसाइड डायग्नोस्टिक्स (क्लिनिक स्तर की त्वरित जांच), प्रेडिक्टिव ओरल-हेल्थ टेक्नोलॉजी और लैब से मरीज तक रिसर्च जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा.
संस्थान टेक्नोलॉजी को क्लिनिकल प्रैक्टिस से अलग नहीं मानता बल्कि इसे रोज के सीखने-सिखाने में शामिल करता जा रहा है. मेड्स की डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) अरुणदीप कौर लांबा कहती हैं, ''छात्रों को रिसर्च पर ज्यादा जोर देने वाला, इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला और क्लिनिकल रूप से अच्छा-खासा माहौल मिलेगा, जो उन्हें ओरल हेल्थकेयर (मुंह के स्वास्थ्य) में योग्य डेंटिस्ट और भविष्य का रिसर्चर, इनोवेटर, एजुकेटर और अगुआ बनाएगा.’’

रिसर्च अब अंडरग्रेजुएट एक्सपीरियंस का बड़ा हिस्सा बनती जा रही है. छात्रों को फैकल्टी के परामर्श वाले प्रोजेक्ट्स, आइसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के शॉर्ट-टर्म स्टुडेंटशिप (एसटीएस) प्रोग्राम, क्लिनिकल स्टडीज में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और विभिन्न विषयों के बीच सहयोग के लिए भी उन्हें प्रेरित किया जा रहा है.
जो बात 2026 में मेड्स को विशिष्ट बनाती है, वह यह कि छात्र अब सिर्फ इतना ही नहीं सीखते कि मौजूदा डेंटल टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है बल्कि उन्हें अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी बनाने में मदद करने के लगातार मौके भी मिल रहे हैं.
चाहे किफायती डायग्नोस्टिक औजार बनाना हो, क्लिनिकोंं में नई टेक्नोलॉजी को परखना हो या इंजीनियरों और मेडिकल रिसर्चर के साथ मिलकर काम करना हो, छात्र ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं जो हेल्थकेयर की असली चुनौतियों का समाधान करते हैं.
ऐसे समय में जब भारत स्वदेशी हेल्थकेयर इनोवेशन पर जोर दे रहा है, मेड्स अपने युवा डेंटिस्ट्स को महज टेक्नोलॉजी का उपयोगकर्ता बनने के बजाए उसमें योगदान देने वालों के तौर पर आगे बढ़ने में मदद कर रहा है.
ऐसा ही एक उदाहरण संस्थान का बढ़ता इनोवेशन का ईकोसिस्टम है. मेड्स में भारत का पहला डेंटल टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब है. इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और आइसीएमआर के सहयोग से स्थापित किया गया है.
इसमें दंत चिकित्सा की स्वदेशी तकनीकें विकसित करने के अलावा आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने के लिए काम किया जाता है. इससे छात्रों को असली दुनिया के नवाचारों और उत्पादों के विकास से जुड़ने का मौका मिलता है.
अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के अलावा भी संस्थान के लंबे समय से चल रहे सामुदायिक दंत चिकित्सा कार्यक्रम हैं जो छात्रों को जन-स्वास्थ्य पहल, संपर्क शिविरों से जोड़ते हैं और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं, इस तरह उन्हें शहरी क्लिनिकल ढांचे से इतर ओरल हेल्थकेयर की चुनौतियों के बारे में सीधी जानकारी मिलती है.
आगामी वर्ष में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ने की उम्मीद है, जो मौजूदा आदान-प्रदान कार्यक्रमों और एकेडमिक पार्टनरशिप पर आधारित हैं और जिनसे छात्रों को वैश्विक अनुभव के अवसर मिले हैं.
दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में मेड्स की पूर्व छात्रा और सहायक प्रोफेसर और स्टाफ सर्जन डॉ. पारुल मुतनेजा कहती हैं, ''मेरी मातृ संस्था के रूप में मेड्स ने मुझे सीखने, बढ़ने और एकेडमिक और क्लिनिकल स्किल में सफलता के भरपूर अवसर दिए.
मेड्स में नौ वर्षों के दौरान मुझे अपने पेशे के परम सूत्र—नैतिकता के साथ प्रैक्टिस, समानुभूति और रोगी कल्याण—की तलाश में मदद की. संस्थान से मुझे लाभ हुआ और मैं इसकी गौरवपूर्ण विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा आभारी महसूस करती हूं.’’
नए छात्रों के लिए मेड्स का आकर्षण क्लिनिकल ट्रेनिंग के लिए इसकी प्रतिष्ठा से कहीं ज्यादा है. यह तेजी से खुद को एक ऐसी जगह के रूप में स्थापित कर रहा है जहां भविष्य के दंत चिकित्सक अनुसंधान, नवाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी के साथ जुड़ सकते हैं. वे उस जगह गहन रोगी अनुभव से लाभ उठा सकते हैं जो दंत चिकित्सा की शिक्षा का केंद्र बना हुआ है.

