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विज्ञान-तकनीक और उद्योग का जबरदस्त मेल

बिट्स पिलानी ने प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज की लिस्ट में शीर्ष जगह कायम रखी और संस्थान अब एआइ, हेल्थ टेक के साथ कई दूसरे विषयों को जोड़कर पढ़ाने पर जोर दे रहा.

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फिजिक्स के प्रोफेसर और डीन छात्र कल्याण प्रो. नवीन सिंह (बीच में) छात्र-छात्राओं के साथ कैंपस के लॉन में
अपडेटेड 7 जुलाई , 2026

टाटा ग्रुप के पूर्व ब्रांड कस्टोडियन और पांच राष्ट्रीय बेस्टसेलर किताबों के लेखक बेंगलूरू में रहने वाले हरीश भट ने 1980 से 1984 तक बीआइटीएस या बिट्स पिलानी में छात्र के तौर पर बिताए है. उन दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं, ''मैं सपनों से भरी उत्सुक आंखों के साथ बिट्स पिलानी में दाखिल हुआ और आत्मविश्वास से भरा युवा बनकर बाहर निकला.’’

मदुरै और कोल्लम में अपने माता-पिता के साथ सुरक्षा भरी शुरुआती जिंदगी बिताने के बाद बिट्स पिलानी का अनुभव 'जिंदगी की अग्निपरीक्षा’ की तरह था. इसने उदार शिक्षा की दुनिया की तरफ उनकी आंखें खोलीं, जो उस वक्त कोई और टेक्नोलॉजी संस्थान नहीं करता था. इसी की बदौलत भट दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और साहित्य के क्षेत्रों में कदम रखने का जोखिम उठा पाए और उस सबकी जिम्मेदारी उठा पाए जो उन्हें करना था.

बिट्स पिलानी लंबे समय से सर्वांगीण शिक्षा पर ध्यान देता रहा है. फिर भी 40 साल बाद यह स्कूल 'बानी (बीएएनआइ)’ शब्द के हिसाब से खुद को ढाल रहा है. बानी शब्द अमेरिकी भविष्यवादी जैम्स कैसियो ने गढ़ा था, जिसका अर्थ है ब्रिटल (नाजुक), एंग्शस (उत्सुक), नॉनलीनियर (अरैखिक), और अक्सर इनकॉप्रिहेंसबल (अबूझ).

बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ऐंड साइंस (पिलानी, हैदराबाद, गोवा, दुबई और मुंबई) के वाइस-चांसलर वी. रामगोपाल राव कहते हैं, ''हम ऐसे मॉडल की तरफ बढ़ रहे हैं जिसमें छात्र मजबूत ढंग से बुनियादी सिद्धांत सीखते हैं और विषयों से उलझने की क्षमता हासिल करते हैं.’’

एआइ, डेटा, सेमीकंडक्टर, सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन), हेल्थ टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्रणालियां अब अलग-अलग दुनिया नहीं रह गई हैं. छात्रों को उनके बीच आवाजाही आनी चाहिए. राव कहते हैं, ''इन डिग्रियों से उन क्षेत्रों की झलक मिलती है जहां भारत को क्षमता की जरूरत है.’’

इसी के हिसाब से शिक्षाशास्त्र इंटर्नशिप और जमीनी अनुभव पर ज्यादा जोर दे रहा है. संस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, एन आर्बर, और यूरोप की पांच शीर्ष यूनिवर्सिटी—सेंट्रलसुपेलेक, टीयू ड्रेसडेन, द यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन, केयू लिइवन और टीयू इलमेनाउ—सरीखे अग्रणी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारियों को मजबूत कर रहा है.

इंटर्नशिप के प्रैक्टिस स्कूल मॉडल के कायापलट करने का काम चल रहा है, जिसमें दूसरे साल के छात्रों के लिए दो महीने और चौथे साल के छात्रों के लिए छह महीने की इंटर्नशिप होगी. बिट्स पिलानी के करीब 35 फीसद अंडरग्रेजुएट को प्री-प्लेसमेंट के दौरान नौकरी के प्रस्ताव मिलते हैं, जबकि कई संस्थानों के लिए यह पैमाना हासिल करना टेढ़ी खीर है.

राव कहते हैं, ''नौकरियों के मुश्किल बाजार में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र वे नहीं होंगे जो एक टूल या एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जानते हैं. ये वे होंगे जो तेजी से सीख सकते हैं, स्पष्ट रूप से सोच सकते हैं, अच्छे से कम्युनिकेट कर सकते हैं, दूसरों के साथ काम कर सकते हैं और अहम समस्याएं हल कर सकते हैं. बिट्स पिलानी को इसी तरह के ग्रेजुएट तैयार करने होंगे.’’ 

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