हर के बीचोबीच प्रसिद्ध ट्यूडर शैली में बने बेंगलूरू पैलेस के बहुत नजदीक स्थित माउंट कार्मेल कॉलेज (स्वायत्त) बेंगलूरू की पहचान का अभिन्न अंग है. इसके पूर्व छात्रों में जाने-माने कारोबारी अगुआ, अफसरशाह, नीति निर्माता और अदाकार शामिल हैं.
पूरी तरह केवल महिलाओं के लिए बने इस कॉलेज ने तीन साल पहले अपनी प्लेटिनम जुबली पर सह-शिक्षा का संस्थान बनने का फैसला किया. इस कदम का मकसद सभी युवाओं को पढ़ने का अवसर मुहैया करना था.
प्रिंसिपल और प्रोफेसर लेखा जॉर्ज कहती हैं, ''हम 78 वर्ष के युवा हैं. महज 50 छात्रों के साथ इसकी अदना-सी शुरुआत की थी, और आज हमारे कैंपस में 10,400 से ज्यादा छात्र हैं. इसलिए यह हमारे लिए बहुत बड़ा मील का पत्थर है.’’ इस साल के बेस्ट कॉलेज सर्वे में यह संस्थान आर्ट्स कॉलेज वाली श्रेणी में तेजी से ऊपर चढ़ते हुए तेरहवें स्थान पर आ पहुंचा. 2022 में यह चौबीसवें स्थान पर था.
स्कूल ऑफ ह्यूमेनिटीज ऐंड सोशल साइंसेज एक विषय और तीन विषयों के विभिन्न अंडरग्रेजुएट कोर्स की पेशकश करता है. पिछले साल की एक खास खूबी यह रही कि ह्यूमैनिटीज या मानविकी की धारा की हरेक गतिविधि, चाहे वह बड़ी कॉन्फ्रेंस हों, छात्रों के प्रोजेक्ट हों या प्रकाशन, दो सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स—जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन, और अच्छा स्वास्थ्य और भलाई—की थीम के इर्दगिर्द रची गई.
कॉलेज की रजिस्ट्रार-एकेडमिक्स डॉक्टर सुमा सिंह कहती हैं, ''इसका छात्रों पर जबरदस्त असर पड़ा क्योंकि आम तौर पर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को आप होर्डिंग पर देखते हैं लेकिन आप वाकई नहीं समझते कि उनके पीछे का तर्क क्या है या भारतीय संदर्भ में हम उनके बारे में बात क्यों कर रहे हैं. इरादा उन्हें असल दुनिया से जोड़ने का है ताकि छात्रों को पता हो कि क्या हो रहा है और क्या करने की जरूरत है.’’
वे यह भी जोड़ती हैं कि इस तरीके के अपने फायदे हैं, क्योंकि छात्र ''लीक से हटकर सोच पाते हैं और हमारे देश के सामने आ रही बहुत सारी चुनौतियों के समाधान लेकर आ पाते हैं.’’
पिछले लगातार तीन सालों से प्लेसमेंट के दौरान कैंपस में मिले सबसे अच्छे वेतन पैकेज में से कुछ ह्यूमनिटीज स्ट्रीम के छात्रों को मिले.
यह सर्वांगीण विकास की अहमियत और ह्यूमनिटीज के विषयों की बढ़ती प्रासंगिकता दोनों के बारे में बताता है. सिंह के शब्दों में, ''मुझे लगता है कि भविष्य डिजिटल ह्यूमैनिटीज का है.’’ डिजिटल ह्यूमैनिटीज से उनका आशय इतिहास सरीखे मानविकी के विषयों के लिए डिजिटल साधनों के प्रयोग से है, जिससे मन में डेटा की तस्वीर बनाने और समझने के नए तरीके मिलते हैं.
मानविकी और सामाजिक विज्ञानों की डीन डॉक्टर हंसा एन. बताती हैं कि मिसाल के तौर पर मनोविज्ञान वह एक और क्षेत्र है जिसमें टेक्नोलॉजी को अपनाया जा रहा है, खासकर दुष्चिंता और अवसाद के इलाज की डिजिटल थिरैपी आने के साथ ऐसा हो रहा है.
सिंह एक और पहलू की ओर इशारा करते हुए कहती हैं कि अतिरिक्त हुनर हासिल करना प्रमुख बात है. संस्थान में 68 एसोसिएशन हैं. उनके शब्दों में, ''कैंपस आपको आगे बढ़ने के मौका देता है. हम छात्रों को इन एसोसिएशन का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, और यहीं असल पढ़ाई होती है, जब वे कार्यक्रमों को संजोते और हकीकत में बदलते हैं.’’
यह कॉलेज 2005 में स्वायत्त हुआ. प्रोफेसर लेखा बताती हैं, ''उस समय हमारे यहां केवल 29 प्रोग्राम थे. आज यहां यूजी, पीजी और पीएचडी के 80 से ज्यादा प्रोग्राम हैं. हम न केवल पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देते हैं बल्कि यह भी पक्का करते हैं कि हमारे छात्रों का सर्वांगीण विकास हो.’’ कॉलेज ने विश्वविद्यालय के दर्जे के लिए आवेदन दिया हुआ है और इसके साथ ही वह अगली बड़ी सीढ़ी चढ़ने की उम्मीद कर रहा है.
गुरु वाणी
माउंट कार्मेल कॉलेज की प्रोफेसर लेखा जॉर्ज के मुताबिक, 2005 में स्वायत्तता हासिल करने के बाद हमारे यहां 29 से बढ़कर 80 से ज्यादा प्रोग्राम हो गए, साथ ही हम सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते हैं ताकि छात्र समग्रता में ग्रेजुएट बनें और दुनिया का सामना करने को तैयार हों.

