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झींगे का धंधा झमाझम

ब्रह्मानंदम विशाखापत्तनम में रहते हैं. उनकी दोनों बेटियां डीएसएफ चलाने में साथ देती हैं. उनकी जीवनशैली सीधी-सादी है. हालांकि वे 50 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं.

समंदर के सफर पर : ब्रह्मानंदम अपनी दोनों बेटियों रमा देवी और नवीना के साथ  दिग्गज कारोबारी
समंदर के सफर पर : ब्रह्मानंदम अपनी दोनों बेटियों रमा देवी और नवीना के साथ  दिग्गज कारोबारी
अपडेटेड 28 नवंबर , 2022

36वीं वर्षगांठः दिग्गज कारोबारी

ब्रह्मानंदम पोतरू, 69 वर्ष
विशाखापत्तन
कंपनीः देवी सी फूड्स लिमिटेड
कुल संपत्तिः 3,500 करोड़ रु .

कहां करते हैं निवेश
ब्रह्मानंदम कहते हैं कि उन्होंने अपना पूरा व्यवसाय बिना किसी कर्जे के बनाया है. वे मेहनत, कौशल, अपने लोगों और अपने काम में निवेश करते हैं.

ब्रह्मानंदम पोतरू के पिता धान और तंबाकू उगाने वाले किसान थे. पिता और भाइयों की जद्दोजहद देखी तो उन्होंने खेती-किसानी के उतार-चढ़ावों से दूर रहने का विकल्प चुना. कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक छोटे ठेकेदार के रूप में शुरुआत की और आंध्र प्रदेश सरकार के विभिन्न महकमों के लिए ठेके पर काम लेने लगे. शुरुआती कामयाबी से उत्साहित पोतरू ने  विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के लिए सिविल निर्माण के कामों के ठेके लिए.

जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि सिविल ठेके उनके बूते की बात नहीं. वे याद करते हैं, ''विशाखापत्तनम फिश लैंडिंग का हब था. मुझे इस क्षेत्र में निर्यात की संभावनाएं दिखाई दीं.1990 के दशक में मैंने झींगे निर्यात करने का फैसला किया.’’ इंडियन ब्लैक टाइगर झींगों की जापान में ऊंची कीमत मिलती थी.

लेकिन उन्होंने देखा कि प्रोसेसिंग और निर्यात का कारोबार कच्चे माल (हेडलेस झींगों) के निर्यात तक सीमित था और इसमें कोई स्थानीय खिलाड़ी नहीं था (ज्यादातर निर्यातक आंध्र प्रदेश से बाहर के थे). ब्रह्मानंदम बताते हैं, ''मेरी नजर अमेरिकी बाजार पर थीं, जहां अव्वल दर्जे की फूड सर्विस और रिटेल आउटलेट में झींगे की भारी मांग थी.’’

उनकी फ्लैगशिप कंपनी देवी सी फूड्स (डीएसएफ) ने स्थानीय झींगा प्रोसेसिंग संयंत्रों में से एक में प्रोसेसिंग क्षमता का कुछ हिस्सा ठेके पर लिया और पहले साल (1992) से ही मुनाफा कमाने लगी.

उन्होंने अमेरिकी बाजार के लिए वैल्यू ऐडेड, कतरे हुए और रेडी टु ईट झींगों का कारोबार शुरू किया. ये सब अमेरिकी फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कठोर गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा नियमों तथा आयात निगरानी की शर्तों पर खरे भी उतरने चाहिए थे.

ब्रह्मानंदम ने खास जरूरतों और नियमों के हिसाब से उत्पादन के लिए अपने लोगों को प्रशिक्षित करने पर काफी समय, मेहनत और धन खर्च किया. नतीजे मनमाफिक रहे. अमेरिका की एक अव्वल दर्जे की रेस्तरां चेन ने 2001 में डीएसएफ से हाथ मिलाया. उसके बाद काम बढ़ता चला गया. अब कंपनी अपने उत्पादन का 80 फीसद से ज्यादा हिस्सा फूड सर्विस और रिटेल क्षेत्र की बड़ी अमेरिकी कंपनियों को निर्यात करती है, जिससे उसे करीब 20 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू मिलता है.

अमेरिकी ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने और सप्लाइ चेन दुरुस्त रखने के लिए उन्होंने अमेरिका में डीएसएफ की सहायक वितरक कंपनी—देवी सी फूड्स इंक—का गठन किया. इसका सालाना सकल राजस्व 14.5 करोड़ डॉलर और शुद्ध संपत्ति 3.4 करोड़ डॉलर है (2021-22 का ऑडिट किया हुआ वित्तीय लेखा-जोखा). मूल्य संवर्धित उत्पाद बेचने की पहल का डीएसएफ को खूब फायदा हुआ. दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य वितरक कंपनी सिस्को कॉर्प और कई फॉर्चून 500 कंपनियां उनके ग्राहकों में शमिल हो गईं.

उनका इरादा अगले छह साल के दौरान हर दूसरे साल 10,000 मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने का है.

वे अपनी कामयाबी का राज इन शब्दों में बयान करते हैं, ''हमारा झींगा कारोबार शून्य-कर्ज वाले पूंजीगत ढांचे पर मजबूती से खड़ा है. हमने अपनी पूरी संपत्ति हमेशा आंतरिक जमापूंजी से ही बनाई.’’ 

ब्रह्मानंदम विशाखापत्तनम में रहते हैं. उनकी दोनों बेटियां डीएसएफ चलाने में साथ देती हैं. उनकी जीवनशैली सीधी-सादी है. हालांकि वे 50 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं. वे किसान के बेटे हैं और किसानों जैसी सादगी अब भी बरकरार रखे हुए हैं.

वे कहते हैं, ''महंगी कारों और घड़ियों के शौक सेलेब्रिटी के बच्चों के लिए हैं. मैं अपने दोस्तों के साथ वक्त गुजारकर और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर घर बैठे फिल्में देखकर खुश हूं.’’ 

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