नई नस्ल 100 नुमाइंदे/उद्यमी
बायजू रवींद्रन, 40 वर्ष, दिव्या गोकुलनाथ, 35 वर्ष
सह-संस्थापक, बायजूज़ बेंगलुरू
शालीन, महत्वाकांक्षी और कुशाग्र शिक्षक बायजू रवींद्रन खुद को इत्तफाकन आंत्रेप्रेन्योर कहते हैं. सीएटी (कॉमन एडमिशन टेस्ट) की तैयारी और सफलता में दोस्तों की मदद करने और दिलचस्पी रखने वाले किसी भी शख्स के लिए कक्षाएं लगाने से शुरू हुआ सफर अंतत: उन्हें अपनी पूर्व छात्रा और फिर पत्नी दिव्या गोकुलनाथ के साथ बायजूज़ की सह-स्थापना की ओर ले गया.
इस साल अगस्त में 21 अरब डॉलर के मूल्य निर्धारण के साथ आज बायजूज़ दुनिया का सबसे कीमती एडटेक स्टार्ट-अप है. फर्म की सह-स्थापना से पहले गोकुलनाथ शिक्षिका थीं. पढ़ाने के प्रति उनके लगाव और अपने लोगों को जोड़े रखने की उनकी खूबी के चलते बायजूज़ की मूल टीम उसकी स्थापना से आज तक जस की तस कायम है.
महामारी के दौरान फर्म ने तमाम आयु समूहों के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं. उसने कई अधिग्रहण भी किए—इस साल लगभग आठ—और अमेरिका तक अपने पदचिन्हों का विस्तार किया. आंकड़ों के लिहाज से बायजूज़ का ऐप 10 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है और कक्षाएं दुनिया भर के 1,700 शहरों में सुलभ हैं. फर्म के मुताबिक, उसने मार्च और अप्रैल 2020 के बीच 1.35 करोड़ छात्र जोड़े.
युगल लक्ष्य गोकुलनाथ को बायोलॉजी के प्रति अपना प्रेम पिता से मिला, पर गणित की समझ उन्हें अपने पति से हासिल हुई. बायजूज़ शुरू करने के लिए भारत लौटने से पहले रवींद्रन एक शिपिंग कंपनी में काम करते थे
''मैंने किसी खास करियर की परिकल्पना नहीं की थी, पर मुझे पता था कि जो भी करूंगी उसे अपना 100 फीसद दूंगी’’
—दिव्या गोकुलनाथ
कीमती जायदाद
राधिका गुप्ता, 38 वर्ष
एमडी और सीईओ, एडेलवेइस एएमसी, मुंबई
अपने कॉलेज के दिनों में आत्मसंशय से ग्रस्त लड़की से देश की एक सबसे ताकतवर कारोबारी महिला तक राधिका गुप्ता का सफर गहमागहमी से भरा रहा है. उनका जन्म ही मुश्किल पल था. पैदाइशी जटिलताओं के कारण उन्हें कई दिन इन्क्यूबेटर में रखा गया, जहां एक ड्यूटी नर्स की लापरवाही से उनकी गर्दन में टूट आ गई. भारतीय राजनयिक की यह बेटी चार महाद्वीपों में पली-बढ़ी.
व्हार्टन स्कूल से ग्रेजुएट किया. कई कंपनियों से खारिज होने के बाद 2005 में मैकिंसी ऐंड कंपनी ने उन्हें मौका दिया. 2009 में जब दुनिया वित्तीय संकट के जख्म सहला ही रही थी, गुप्ता ने अमेरिका में अपनी आरामदेह नौकरी छोड़कर आंत्रेप्रेन्यौर के रूप में स्वदेश लौटना तय किया.
वैकल्पिक निवेश फर्म फोरफ्रंट कैपिटल मैनेजमेंट की सह-संस्थापक के तौर पर करीब पांच साल काम करने के बाद वे मुंबई की वित्तीय सेवा फर्म एडेलवेइस से जुड़ गईं और बढ़ते-बढ़ते 2017 में उसके म्यूचुअल फंड कारोबार की सीईओ बन गईं. उनकी अगुआई में फर्म की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां 2017 में 6,000 करोड़ रुपए से बढ़कर दिसंबर 2021 में 77,000 करोड़ रुपए हो गईं.
उन्हें विलय और अधिग्रहण का पहले कोई अनुभव नहीं था, फिर भी उनकी अगुआई में एडेलवेइस ग्रुप ने जेपी मॉर्गन म्यूचुअल फंड का अधिग्रहण किया और उसके बाद 2016-17 में उसे समाहित कर लिया. साथ मिलकर काम करने के उनके तरीके, फैसले लेने के हुनर और प्रोजेक्ट की समय सीमाओं के कठोर पालन की बदौलत इस अधिग्रहण को परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में लोगों, ग्राहकों और प्रक्रियाओं का सबसे अच्छे और सबसे तेज एकीकरणों में गिना जाता है.
फुरसत के पल राधिका ब्रिज की शौकीन खिलाड़ी हैं और फुर्सत के पलों में कविताएं लिखती हैं. वे शाहरुख खान की फैन हैं. इसके अलावा वे भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों के सबसे बड़े ब्लब पेन अलमनाइ क्लब ऑफ मुंबई की संस्थापक अध्यक्ष भी हैं
''मुझे ऐसे वित्तीय उत्पाद बनाने के अवसर से प्रेरणा मिलती है, जो देश के साधारण लोगों को धन-संपत्ति बनाने और वित्तीय आजादी का एहसास कराए’’.
नई नस्ल 100 नुमाइंदे/उद्यमी
दीपक गर्ग, 39 वर्ष
गजल कालरा, 35 वर्ष
सह-संस्थापक, रिविगो, गुरुग्राम
महत्वाकांक्षी हाइवे
वाकई कॉफी के साथ बहुत कुछ हो सकता है. दो करीबी दोस्त दीपक गर्ग और गजल कालरा अपनी पसंदीदा कॉफी की चुस्कियां लेने के लिए क्या मिले कि रिविगो की स्थापना की राह खुल गई. यह टेक्नोलॉजी-समर्थ लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म है जिसकी स्थापना 2014 में हुई. गर्ग के मन में बहुत दिनों से एक रिले ट्रक मॉडल का विचार था, जिससे किसी भी ट्रक ड्राइवर को दो घंटे से ज्यादा सड़क पर न रहना पड़े. गर्ग और कालरा ट्रक ड्राइवरों की बहुत कम तनख्वाह और बहुत लंबे समय तक लगातार काम करने सरीखी परेशानियां समझने के लिए सड़क यात्रा पर निकल पड़े. उन्होंने रिविगो को 'मानवीय’ लॉजिस्टिक्स ब्रांड के तौर पर पेश किया. ई-कॉमर्स, कोल्ड चेन, फार्मा और एफएमसीजी ग्राहक तेजी से इस स्टार्ट-अप की तरफ खिंचे चले आए. वारवर्ग पिंकस और एसएआइएफ पार्टनर्स निवेशक के तौर पर आ गए. हाइवे में आए सुधार से रिविगो को कामकाज बड़े पैमाने पर बढ़ाने में मदद मिली और 2019-20 में आमदनी 1,080 करोड़ रुपए पर पहुंच गई. भविष्य में अपने उद्यम को मुनाफे में लाने के लिए गर्ग और कालरा को खंडित मिल्कियत और मांग-आपूर्ति में मेल न होने सरीखी लॉजिस्टिक क्षेत्र की आम समस्याओं से पार पाने की जरूरत है.
—अनिलेश एस. महाजन
कहां से सूझा मैकिंजी में एक लॉजिस्टिक्स रिपोर्ट पर काम करते हुए गर्ग ने पाया कि ट्रकों की बिक्री भारत की वृद्धि की राह के अनुरूप नहीं है. इस गुत्थी को सुलझाने की तलाश में रिविगो का जन्म हुआ
आगे ही आगे:
दीपक गर्ग, गजल कालरा
''रिविगो को पिछले सात साल में नीतियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर में आए बदलावों से फायदा मिला है, चाहे जीएसटी हो, हाइवे विकास, डिजिटल इंडिया या फास्ट टैग हो’’
दीपक गर्ग
गौरव मुंजाल, 31 वर्ष
रोमन सैनी, 30 वर्ष
हिमेश सिंह, 29 वर्ष
सह-संस्थापक, अनएकेडमी, बेंगलूरू
पढ़ते वक्त स्कूल में एक इंजीनियरिंग कोचिंग सेंटर ने गौरव मुंजाल को यह कहकर लेने से इनकार कर दिया कि उन्हें बेहतरीन शिक्षकों के पढ़ाने वाले बैच में नहीं रखा जा सकता. मुंजाल को एहसास हुआ कि अच्छी शिक्षा भारत में विशेषाधिकार है. 2010 में कॉलेज में पढ़ते वक्त उन्होंने यूट्यूब पर शैक्षणिक चैनल के तौर पर अनएकेडमी की शुरुआत की. इसकी लोकप्रियता से प्रेरित होकर 2015 में अनएकेडमी को औपचारिक तौर पर लॉन्च किया. मुंजाल का पहला उद्यम अलबत्ता फ्लैट.टू था. यह रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म उन्होंने 2013 में हिमेश सिंह के साथ स्थापित किया था. कॉमनफ्लोर डॉट कॉम ने इसका अधिग्रहण कर लिया. अनएकेडमी का मकसद 'फ्रीमियम बिजनेस मॉडल’ पर दुनिया की सबसे बड़ी लर्निंग रिपोजिटरी या शिक्षा भंडार बनाना है. पाठ्यक्रम तो छात्रों को मुफ्त में सुलभ होंगे, पर लाइव क्लास और निजी जरूरतों के मुताबिक पढ़ाई के लिए उन्हें ग्राहक शुल्क चुकाना होगा. छोटे-से वक्त में अनएकेडमी ने 50,000 पंजीकृत शिक्षक और 4.9 करोड़ से ज्यादा छात्र जुटा लिए हैं. 2020 में समूह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुआ और वेंचर इंटेलिजेंस के मुताबिक इसका मौजूदा बाजार मूल्य 3.4 अरब डॉलर (25,770 करोड़ रुपए) है.
—एम.जी. अरुण
आला दिमाग मुंजाल को टेक्नोलॉजी और विश्वस्तरीय उत्पादों के निर्माण का जुनून है. हिमेश को कोड लिखना और यात्रा करना अच्छा लगता है. रोमन सैनी डॉक्टर हैं और आइएएस की परीक्षा में कामयाब होकर मध्य प्रदेश में असिस्टेंट कलेक्टर रह चुके हैं
''मेरी आकांक्षा दुनिया में सबसे बड़ा (स्टार्ट-अप) होना और भारत में देखी गई अब तक की सबसे बड़ी कंज्यूमर इंटरनेट फर्म बनाना है’’
—गौरव मुंजाल
कामयाबी की भूख
श्रीहर्ष मजेटी, नंदन रेड्डी, फूड एग्रीगेटर स्विगी, फूड एग्रीगेटर स्विगी, पिकअप, ड्रॉप सेवा, किराना डिलिवरी सेवा
श्रीहर्ष मजेटी, 35 वर्ष नंदन रेड्डी, 34 वर्ष
सीईओ और सह-संस्थापक, स्विगी, बेंगलूरू
श्रीहर्ष मजेटी और नंदन रेड्डी ने (राहुल जैमिनी के साथ, जिन्होंने 2020 में फर्म छोड़ दी) 2014 में फूड एग्रीगेटर स्विगी लॉन्च किया. कंपनी ने लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस में उत्कृष्टता और मजबूत प्रबंधन टीम बनाने को तरजीह दी. मजेटी ने वित्तीय कामकाज पर कड़ा नियंत्रण रखा और अंधाधुंध वृद्धि के बजाय फूड डिलीवरी मॉडल की व्यवहारिकता पर ध्यान दिया. स्विगी फिलहाल 500 से ज्यादा शहरों में फैले 1,85,000 से ज्यादा रेस्त्रांओं से उपभोक्ताओं को जोड़ता है. उसके पास 2,50,000 से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर का बेड़ा है और यह इंस्टामार्ट के जरिए तत्काल किराना डिलिवरी सेवा, स्विगी जेनी के जरिए पिकअप और ड्रॉप सेवा और सुपर डेली के जरिए दैनिक किराना डिलिवरी सेवा भी देता है. स्विगी 2018 में यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर या 7,600 करोड़ रुपए से ज्यादा की कंपनी) बना और वेंचर इंटेलिजेंस के मुताबिक फिलहाल इसका बाजार मूल्य करीब 5.5 अरब डॉलर (41,800 करोड़ रुपए) है.
—एम.जी. अरुण
जमीन से उठे काम के शुरुआती दिनों में कंपनी के संस्थापक खुद डिलिवरी लेते और पहुंचाते थे
तेज जोड़ी नंदन रेड्डी (बाएं) और श्रीहर्ष मजेटी
''अगर मुझे कुछ समझ नहीं आता तो उसके बारे में जानने के लिए मैं आधा दर्जन किताबें पढ़ जाता हूं’’
—श्रीहर्ष मजेटी
वाजिब मूल्य
हर्षिल माथुर, 30 वर्ष, शशांक कुमार, 31 वर्ष,
सह-संस्थापक, रेजरपे, बेंगलूरू
हर्षिल माथुर, शशांक कुमार, यूनिकॉर्न रेजरपे, फिनटेक स्टार्ट-अप
साल 2014 में स्थापित फिनटेक यूनिकॉर्न रेजरपे की शुरुआत खराब रही थी. एक बैंक ने संस्थापक शशांक कुमार और हर्षिल माथुर, दोनों रुड़की पासआउट, को अपने व्यावसायिक ऋण की सेवा के लिए 25 लाख रुपए की जमानत राशि जमा करने के लिए कहा था. आखिरकार कुमार के दादा ने उन्हें संकट से उबारा. छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भुगतान गेटवे रेजरपे अब पेटीएम के बाद भारत का दूसरा सबसे मूल्यवान फिनटेक स्टार्ट-अप बन गया है. करीब 37.5 करोड़ डॉलर (लगभग 2,840 करोड़ रुपए) के सीरीज-एफ फंड जुटाने के साथ, उसका बाजार मूल्य अप्रैल 2021 में 3 अरब डॉलर (22,700 करोड़ रुपए) से बढ़कर 7.5 अरब डॉलर (56,800 करोड़ रुपए) हो गया है. कंपनी ने हाल में रेजरपे राइज लॉन्च किया है, जो प्रारंभिक चरण और बूटस्ट्रैप्ड स्टार्ट-अप पर केंद्रित है. माथुर को अगले दो वर्षों में राइज नेटवर्क में करीब 1,00,000 स्टार्ट-अप जोड़ने की उम्मीद है.
—श्वेता पुंज
बैंकों का सामना करीब सौ बैंकों ने रेजरपे को भुगतान समाधान सेवा के रूप में ठुकरा दिया था. एक बार तो शशांक कुमार और माथुर अपने उद्यम को छोडऩे और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में जाने का मन बना लिया था
नई नस्ल 100 नुमाइंदे
उद्यमी
सफलता का सुंदर चेहरा
विनीता सिंह, 38 वर्ष, सह-संस्थापक और सीईओ, शुगर कॉस्मेटिक्स, मुंबई
विनीता सिंह, शुगर कॉस्मेटिक्स, वितरण, उत्पाद, कंटेंट
उन्होंने बीसेक साल की उम्र में ही एक निवेश बैंक की करोड़ रुपए की नौकरी की पेशकश को ठुकरा दिया था क्योंकि वे अपनी खुद की एक फर्म स्थापित करना चाहती थी. डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड शुगर कॉस्मेटिक्स उनका तीसरा स्टार्ट-अप है—पहले दो असफल रहे लेकिन इससे उनका उत्साह कम नहीं हुआ था. शुगर की सह-स्थापना उन्होंने 2015 में की थी. अपनी शिक्षा और उपभोक्ता समझ से इस आइआइटी और आइआइएम स्नातक ने अपनी फर्म को देश भर में 130 से अधिक शहरों में लगभग 35,000+ खुदरा टचप्वाइंट तक पहुंचा दिया है. 2020-21 में, फर्म की कमाई 130 करोड़ रुपए हुई, और उद्यम फंडिंग से 2.1 करोड़ डॉलर (160 करोड़ रुपए) जुटाए, जिससे उसका बाजार मूल्य 750 करोड़ रुपए हो गया. भारतीय त्वचा और भारतीय पर्यावरण के हिसाब से सौंदर्य प्रसाधन बनाना उनका मंत्र है. विनीता अपने पति के साथ कंपनी चलाती हैं और वे भविष्य के विकास को लेकर आशान्वित हैं—भारतीय सौंदर्य बाजार का कुल कारोबार लगभग 10,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है.
—श्वेता पुंज
सौंदर्य के साथ सेहत भी विनीता अल्ट्रा-मैराथनर हैं और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 89 किमी की कॉमरेड मैराथन को लगातार तीन साल पूरा किया है
''आगे चलकर हम अपने बुनियादी मामलों—वितरण, उत्पाद, कंटेंट और कम्युनिटी सबको मजबूत करेंगे. हमारा मकसद शुगर को देश में आला तीन कॉस्मेटिक ब्रांडों में शुमार कराना है’’
नई नस्ल 100 नुमाइंदे
उद्यमी दो की टीम
हर्ष जैन (बाएं), भावित सेठ ख्वाब हुए पूरे
हर्ष जैन, 36 वर्ष, सीईओ तथा सह-संस्थापक, ड्रीम11
भावित सेठ, 36 वर्ष, सीओओ तथा सह-संस्थापक, ड्रीम11, मुंबई
हर्ष जैन, भावित सेठ, ड्रीम11, फंतासी गेमिंग सेगमेंट, बेसबॉल, फुटबॉल, बास्केटबॉल
ताजा-ताजा कॉलेज से निकले दोस्तों के बीच बैठे-ठाले बातचीत में निकला एक आइडिया आज देश की सबसे बड़ी फंतासी गेमिंग कंपनियों में शामिल चुका है. देश में फंतासी गेमिंग सेगमेंट में अग्रणी ड्रीम11 की स्थापना 2008 में हर्ष जैन और भावित सेठ ने की. यह व्यक्तिगत प्रोजेक्ट की तरह शुरू हुआ क्योंकि कंपनी के सह-संस्थापक अंग्रेजी फुटबॉल फंतासी लीग के बड़े प्रशंसक थे. मुख्य तौर पर उनका विचार गेमिंग में इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) सरीखा कुछ शुरू करना था. इंजीनियरिंग स्नातक सेठ ने बेंटले यूनिवर्सिटी से एमबीए करते हुए अमेरिका में बेसबॉल, फुटबॉल और बास्केटबॉल में फंतासी लीग खेलने के तरीकों को देखा. सह-संस्थापक जैन ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और देश में कम से कम 60 अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म एक ही शैली में काम कर रहे हैं. लेकिन ड्रीम 11 सबसे आगे रहा है. उसने खेल प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं को शामिल करने के लिए विविधता को अपनाया है. उसने हाल ही में इन-हाउस खेल सामग्री और कॉमर्स प्लेटफॉर्म फैनकोड को 5 करोड़ डॉलर (380 करोड़ रुपए) देने का वादा किया है. फर्म ने ड्रीमपे के जरिए भुगतान समाधान भी पेश किया है और ड्रीमएक्स नामक खेल एक्सेलरेटर लॉन्च किया है. साल 2020 में, ड्रीम 11 ने 222 करोड़ रुपए में 2020 के आइपीएल के लिए टाइटल स्पॉन्सरशिप अधिकार हासिल किया.
—एम.जी. अरुण
फंड का फंडा कलारी कैपिटल से अपनी पहली फंडिंग हासिल करने से पहले, सेठ और जैन ने लगभग 150 वेंचर पूंजी वालों और प्राइवेट इन्न्विटी निवेशकों से संपर्क किया था लेकिन उन सभी ने मना कर दिया था
''कोई कंपनी शुरू करने के लिए उसकी कार्य-संस्कृति की रूपरेखा बनाना जरूरी है और उससे हर किसी को जोड़ना पड़ता है. सिस्टम और प्रक्रिया तो दोबारा सोची जा सकती है, मगर कार्य-संस्कृति तो हमेशा एक जैसी ही रहेगी’’
भावित सेठ
सही दवा
धवल शाह, 32 वर्ष, सिद्धार्थ शाह, 32 वर्ष, हार्दिक डेढिय़ा, 32 वर्ष, हर्ष पारेख, 32 वर्ष, धर्मिल शेठ, 32 वर्ष
सह-संस्थापक, फार्मईजी, मुंबई
सिद्धार्थ शाह, हार्दिक डेढिय़ा, हर्ष पारेख, फार्मास्युटिकल डिलीवरी फर्म, फार्मईजी
साल 2015 में, डायलहेल्थडॉटकॉम के असफल उद्यम के बाद, सिद्धार्थ शाह, हार्दिक डेढ़िया और हर्ष पारेख ने बचपन के दोस्तों धवल शाह और धर्मिल शेठ के साथ मिलकर एक फार्मास्युटिकल डिलीवरी फर्म फार्मईजी की शुरुआत की. महामारी के दौरान उसका प्रसार तेजी से बढ़ा जब ऑनलाइन डिलीवरी की पूछ बढ़ गई. इसके संस्थापकों ने मई 2021 में मुंबई के उद्यमी अरोकिस्वामी वेलुमणि की थायरोकेयर मं् 66 फीसद हिस्सेदारी 4,546 करोड़ रुपए में खरीदने का सौदा किया. यह स्वास्थ्य सेवा में सबसे बड़े सौदों में एक था और एक गैर-सूचीबद्ध इकाई ने एक सूचीबद्ध को चुना. तकरीबन उसी समय फार्मईजी ने यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने वाली पहली भारतीय ई-फार्मेसी स्टार्ट-अप बनने के लिए मेडलाइफ का अधिग्रहण किया. थायरोकेयर के साथ, कंपनी ने अपनी सेवाओं में लैब और क्लिनिकल जांच को जोड़ा. फार्मईजी का दावा है कि देश भर के 1,200 से अधिक शहरों में वह 50 लाख लोगों को दवाएं और डायग्नोस्टिक सेवाएं मुहैया करता है.
—अनिलेश एस. महाजन
गजब का मेल: फार्मईजी के संस्थापक अलग-अलग पृष्ठभूमि के हैं. धर्मिल इंजीनियर हैं, धवल डॉक्टर हैं तो अन्य तीनों मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट हैं. सिद्धार्थ तीन बार के राष्ट्रीय गो-कार्टिंग चैंपियन हैं
‘‘हम शुरू से आखिर तक की डिलिवरी चेन में दक्षता लाना चाहते हैं. अगर लोगों के घरों तक खाना और फैशन की सामग्री पहुंचाई जा सकती है, तो फिर स्वास्थ्य संबंधी दवाइयां वगैरह क्यों नहीं?’’
टैक्स मदद दरवाजे पर
अर्चित गुप्ता, 36 वर्ष, अंकित सोलंकी, 37 वर्ष, श्रीवत्सन चारी, 34 वर्ष
सह-संस्थापक, क्लियर (पहले क्लियरटैक्स), बेंगलूरू
अर्चित गुप्ता, ऑनलाइन टैक्स-फाइलिंग, सेल्फ-सर्विंग टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म
अर्चित गुप्ता डेटा डोमेन इंक के लिए काम कर रहे थे, जिसे ईएमसी कॉर्पोरेशन ने खरीद लिया. उसके बाद 2010 की गर्मियों में वे सैन फ्रांसिस्को से भारत लौट आए. भारत के ऑनलाइन टैक्स-फाइलिंग पोर्टल में जटिलताओं के बारे में घर पर अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट पिता के साथ बातचीत से गुप्ता को उनके अगले कदम की दिशा मिल गई. उन्होंने वापस अमेरिका के लिए उड़ान भरी और एक सेल्फ-सर्विंग टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने को लेकर शोध किया. क्लियरटैक्स को वित्त वर्ष 2011 के लिए टैक्स-फाइलिंग विंडो के बंद होने से ठीक एक पखवाड़े पहले लॉन्च किया गया और उसने अचानक 1,000 ग्राहकों को तेजी से आकर्षित किया. सितंबर 2011 में, गुप्ता एक हैकथॉन की मेजबानी कर रहे थे, जहां वे तकनीकी विशेषज्ञ अंकित सोलंकी और श्रीवत्सन चारी से मिले और दोनों को अपने साथ लिया. निर्णायक मोड़ 2014 में आया जब क्लियरटैक्स को सिलिकॉन वैली स्थित वाई कॉम्बिनेटर स्टार्ट-अप एक्सेलेरेटर प्रोग्राम में स्वीकार किया गया. जून 2021 में न्न्लियरटैक्स ने अपना नाम बदलकर क्लियर कर दिया. इसका दावा है कि 50,000 टैक्स विशेषज्ञों, एक लाख छोटे व्यवसाय और 3,000 बड़े उद्यम समेत इसके प्लेटफॉर्म पर 60 लाख से अधिक भारतीय पंजीकृत हैं. अक्तूबर में, इसने सीरीज सी फंडिंग में 7.5 करोड़ डॉलर (560 करोड़ रुपए) जुटाए और उम्मीद है कि यह बी2बी क्रेडिट और भुगतान स्थान में विस्तार के लिए उस राशि का इस्तेमाल करे और एक पूर्ण वित्तीय सेवा प्रदाता बनने की ओर आगे बढ़े.
—अनिलेश एस. महाजन
क्योटो का बुलावा: क्योटो की संस्कृति, भोजन और प्रकृति का अनुभव हासिल करने के लिए गुप्ता जापान की यात्रा करना चाहते हैं, मगर बकौल गुप्ता, चेरी के फलने-फूलने के मौसम में
''भारत में बड़े पैमाने पर चीजें डिजिटल हो रही हैं और हम भाग्यशाली हैं कि हम इलेक्ट्रानिक इनवॉएसिंग, जीएसटी, यूपीआइ, सस्ते मोबाइल इंटरनेट और कोविड-19 के कारण प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के सही लहर पर सवार हैं’’
—अर्चित गुप्ता
पर्यावरण हितैषी बिल्डर
सचिन रस्तोगी, 38 वर्ष
संस्थापक डायरेक्टर, जीरो एनर्जी डिजाइन लैब, नई दिल्ली
सचिन रस्तोगी, जलवायु, स्थान, संदर्भ, पर्यावरण, टिकाऊपन, ऊर्जा संरक्षण, न्यूनतम कार्बन
जब हर ओर अति का बोलबाला हो, सचिन रस्तोगी का आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिजाइन स्टूडियो जेड (जीरो एनर्जी डिजाइन) लैब अलहदा नजर आता है. उसकी खासियत नेट-जीरो बिल्डिंग है. सचिन का दर्शन सीधा-सादा है, ''संसाधन की खपत को कम करके लोगों के अनुभव को बेहतर करना.’’ रस्तोगी की इमारत की डिजाइन में जलवायु, स्थान, संदर्भ और पर्यावरण का खास ख्याल रखा जाता है. यहां तक कि उन्हें भविष्य की डिजाइन के लिए स्थानीय देसी वास्तुकला से प्रेरणा मिलती है और इस तरह वे तारीफ हासिल करते हैं. मिसाल के तौर पर, गुरुग्राम में सेंट एंड्रयूज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ऐंड मैनेजमेंट के हॉस्टल ब्लॉक की डिजाइन मॉडल की तरह है, जिसमें पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊपन, ऊर्जा संरक्षण और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन का ध्यान रखा गया है. उसे आरटीएफ ग्रीन बिल्डिंग अवॉर्ड और एल्ड्रोक बेस्ट ग्रीन बिल्डिंग अवार्ड समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं.
उनकी एक और दिलचस्प कृति करनाल में हाउस अंडर शैडो है. यह भारतीय हवेलियों और छतरियों की स्थापत्य कला का नया स्वरूप है. उसमें आंगन और प्राकृतिक वेंटिलेशन के लिए ट्रांजिशन स्पेस और सामाजिक मेलजोल की व्यवस्था है. रस्तोगी स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली और आॢकटेन्न्चरल एसोसिएशन स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, लंदन के पूर्व छात्र हैं. उनके पास यूरोप, पश्चिम एशिया और न्यूजीलैंड में 10 से अधिक वर्षों का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है.
—रिद्धि काले
खेल में भी रमे रस्तोगी क्रिकेट के दीवाने हैं और जब भी मौका मिलता है, मैच खेलते हैं. उन्हें फुटबॉल भी पसंद है और खेलकूद में राज्य-स्तर के कई पुरस्कार जीत चुके हैं.
''सचिन ने मिसाल पेश कर आगे बढ़ने की हिम्मत दिखाई. उनका काम अलग तरह का और उकसाने वाला है, जैसी कि असली डिजाइन होनी चाहिए’’
प्रो. मनोज माथुर, स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
—अनिलेश एस. महाजन
दूरदर्शी चश्मा
पीयूष बंसल, 37 वर्ष, अमित चौधरी, 35 वर्ष, सुमीत कपाही, 34 वर्ष
सह-संस्थापक, लेंसकार्ट, नई दिल्ली
पीयूष बंसल, अमित चौधरी, लेंसकार्ट, ऑनलाइन, वैल्यू टेक्नोलॉजीज
अपने उद्यमों, सर्चमाइकैंपसडॉटकॉम और वाल्यो टेक्नोलॉजीज की थोड़ी सफलता ने पीयूष बंसल को 2010 में अमेरिका से भारत लौटने तथा चश्मों का स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रेरित किया. अपने दोस्तों अमित चौधरी, रमणिक खुराना और सुमीत कपाही की मदद से उन्होंने लेंसकार्ट को स्थापित किया. लेंसकार्ट ने हाइब्रिड मॉडल को अपनाया है—ऑनलाइन और पारंपरिक स्टोर भी. बंसल को यकीन था कि भारतीय बाजार उन्हें सीढ़ी मुहैया कराएगा. कॉन्टैक्ट लेंस से शुरू करते हुए, लेंसकार्ट के आज करीब 600 खुदरा स्टोर हैं. दावा है कि 4,000 से अधिक प्रकार के चश्मों (आईवियर) और अन्य नेत्र देखभाल उत्पादों के साथ हर महीने 1,00,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा मुहैया कराया जाता है. सॉफ्टबैंक के 27.5 करोड़ डॉलर (2,080 करोड़ रुपए) के निवेश के बाद 2019 में लेंसकार्ट 1.5 अरब डॉलर (11,355 करोड़ रुपए) की कंपनी हो गई थी. बंसल, चौधरी और कपाही ने इसके संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए कड़ी मेहनत की है. दिल्ली में उनका केंद्र एक महीने में 3,00,000 ग्लास का उत्पादन कर सकता है; करीब 20 फीसद फ्रेम चीन के झेंगझाउ में बनते हैं. कपाही सप्लाई का ध्यान रखते हैं जबकि चौधरी संगठनात्मक विकास के विशेषज्ञ हैं. और, बंसल निश्चित रूप से लेंसकार्ट के दिमाग जैसे हैं.
प्रशिक्षण पाया अमेरिका में वैल्यू टेक्नोलॉजीज उद्यम के जरिए बंसल ने चश्मों के कारोबार का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया
''अत्याधुनिक फर्म खड़ी करने के लिए जरूरी है कि बाजार या निवेशकों के मानकों में न बह जाएं, बल्कि अपने मानक स्थापित करें’’
—पीयूष बंसल
सेहत के सहारे
समर्थ सिंधी, 29 वर्ष,
संस्थापक, रक्षा हेल्थ (पहले डिजी-प्रेक्स), हैदराबाद
समर्थ सिंधी, रक्षा हेल्थ, डिजी-प्रेक्स, ऑनलाइन दवा-वितरण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
ब्राउन यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक सिंधी के लिए ग्राहकों के साथ भरोसे के रिश्ते के आधार पर कंपनी की स्थापना करना सर्वोपरि था. वे एक ऑनलाइन दवा-वितरण प्लेटफॉर्म शुरू करना चाहते थे, खासकर लंबी अवधि की बीमारियों के लिए. उनकी फर्म, रक्षा हेल्थ (2019 में डिजी-प्रेक्स के रूप में इसकी स्थापना हुई थी) रियायती दवाएं मुहैया कराती है और ग्राहकों के घरों तक दवाएं पहुंचाती है. कंपनी लंबी बीमारियों के मरीजों के लिए अनुकूलित जीवन शैली प्रबंधन समाधान प्रदान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) का इस्तेमाल करती है. वह उन मरीजों को दवाओं की मासिक डिलीवरी की व्यवस्था करती है जिन्होंने व्हाट्सऐप के जरिये अपने प्रिस्क्रीप्शन अपलोड किए हैं. मरीजों को कोई जांच या ऑपरेशन बुक करने और किफायती विकल्प तलाशने में मदद के लिए पिछले दो साल में इस फर्म ने कई अस्पतालों और प्रयोगशालाओं के साथ गठजोड़ किया है. एक ऐप के जरिये यह सब किया जाता है. वह ऐप दवाओं के बार-बार मिलने वाले ऑर्डर पर नजर रखता है जिनकी किसी को जरूरत हो सकती है. इस फर्म के पास मरीजों का सहोयग करने के लिए एक समर्पित टीम भी है, जिसमें 15 स्पेशियलिटीज को शामिल किया गया है और इसमें 100 से अधिक अस्पतालों तथा 500 से अधिक विशेषज्ञों का नेटवर्क है.
—एम.जी. अरुण
भारी वृद्धि लॉकडाउन के दौरान सिंधी की कंपनी को मिलने वाले दवा के ऑर्डर में 100 फीसद का उछाल आया था
''ग्राहकों को ऑनलाइन पकड़ने की कोशिश की बजाए, हम ग्राहकों तक पहुंचने के लिए डॉक्टरों और दवाखानों के साथ काम करते हैं’’
—समर्थ सिंधी

