नई नस्ल 100 नुमाइंदे/उद्यमी
रितेश मलिक, 32 वर्ष
संस्थापक, इनोव8 और प्रोजेक्ट गुरिल्ला, दिल्ली
अगर रितेश मलिक अपने माता-पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए चिकित्सा पेशेवर बने रहने का विकल्प चुनते तो शायद उनकी जिंदगी आज कुछ और होती. (उनके पिता रवि नई दिल्ली में सबसे लोकप्रिय बाल रोग विशेषज्ञों में हैं और उनकी मां सम्मानित स्त्री-रोग विशेषज्ञ हैं.) तमिलनाडु के एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से स्नातक रितेश ने चिकित्सा की बजाए इनोवेटर्स की मदद करने पर ध्यान देने का फैसला किया.
बतौर ऐंजल निवेशक उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल, तकनीक, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र की फर्मों की फंडिंग की है और अपने को-वर्किग स्पेस इनोव8 के जरिए सक्षम माहौल तैयार किया है. केवल इक्विटी निवेश यानी पूंजी का निवेश करके हिस्सेदारी खरीदने की बजाए रितेश इन कारोबार की मदद के लिए अपने प्रबंधन कौशल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
अपनी पहली फर्म स्थापित करने के आठ साल बाद उन्होंने प्रोजेक्ट गुरिल्ला के जरिए 80 से ज्यादा स्टार्ट-अप की फंडिंग की है. यह सब कुछ उनके ऑगमेंटेड रियलिटी स्टार्ट-अप ऐडस्टक के साथ शुरू हुआ.
ऐडस्टक ने अलाइव ऐप का निर्माण किया था. उसे बाद में बेनेट ऐंड कोलमैन ने खरीद लिया. फिलहाल, रितेश अभी भी इनोव8 के सीईओ बने हुए हैं. हालांकि पेटीएम के विजय शेखर शर्मा और सेकिया कैपिटल के राजन आनंदन सरीखे अन्य निवेशकों की तरह रितेश ने भी अपनी हिस्सेदारी ओयो को 220 करोड़ रु. में बेच दी.
सबसे मूल्यवान संपत्ति अपनी मेडिकल डिग्री हासिल करने के दौरान मलिक ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक शॉर्ट-टर्म कोर्स भी किया और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक सेमेस्टर पूरा किया. जब उन्होंने अपने पहले स्टार्ट-अप, ऐडस्टक की सह-स्थापना की, तब वे दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में इन-हाउस सर्जन थे
''मैंने अपनी जिंदगी में काफी पहले से ही ऐंजल निवेश शुरू कर दिया था. जब मैंने शुरुआत की, तो स्टार्ट-अप में अपने निवेश से पैसा कमाने का मेरा कोई इरादा नहीं था. संस्थापकों की ओर से प्रोत्साहन मिलना और उनका साथ खड़े रहना अद्भुत है’’.

