
वाइ.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की सरकार में संवेदनशीलता के साथ कल्याण-केंद्रित उपायों को दूसरे उपायों पर प्राथमिकता दी जाती है. राज्य का दावा है कि अन्य सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से 2020-21 में 114. 7 फीसद अनाज बांटा.
पीडीएस की यह उपलब्धि उसी बात की ओर इशारा करती है, जिस बात पर युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस अपना ध्यान केंद्रित करती आई है—समाज के लगभग हर वंचित समूह को ध्यान में रखकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने की सोच जहां सारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए.

मई 2024 में अपना पहला कार्यकाल पूरा करने तक रेड्डी का लक्ष्य यह है कि वे दूसरे राज्यों की तुलना में मानव विकास सूचकांक में बढ़त हासिल कर लें.
शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण उन क्षेत्रों में हैं, जिन पर प्रमुख रूप से ध्यान दिया जाता है. वर्ष 2021-22 में अब तक 28,854 करोड़ रुपए के निवेश के साथ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं के अब 3,72,06,852 लाभार्थी हैं.
माताएं इसमें एक अहम भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से शिक्षा संबंधी पहलकदमी में. कक्षा एक से बारहवीं (इंटरमीडिएट) तक अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए जगनन्ना अम्मावोडी योजना और उनकी उच्च शिक्षा के लिए जगनन्ना विद्या दीवेना (जेवीडी) के तहत गरीब और जरूरतमंद माताओं के खाते में सीध पैसे जमा किए जाते हैं.

