स्वयंसेवा का गणतंत्र चिकित्सा सेवा
पिछले साल एहतियातन कोविड टेस्ट करवाने पर डॉ. सुधांशु के परिवार के सभी सदस्य कोविड पॉजिटिव निकले. सुधांशु ने अपना टेस्ट नहीं करवाया और अपने लक्षणों की अनदेखी कर दी. नतीजा यह हुआ कि जब उनमें संक्रमण का पता चला, ऑक्सीजन स्तर गिर चुका था, उन्हें ज्यादा लंबे इलाज की जरूरत थी और उम्मीद से कहीं ज्यादा साइड इफेक्ट हो चुके थे.
वे कहते हैं, ''इसने मुझे यह सबक सिखाया कि इलाज जितनी जल्द शुरू करो, उतना अच्छा.’’ वे कहते हैं कि इसकी वजह से पहली लहर के अंतिम दौर में उन्हें यह सूझा कि वे जल्द से जल्द इलाज हासिल करने में लोगों की मदद कैसे कर सकते हैं.
जब दूसरी लहर ने दस्तक दी, वे तैयार थे. भारी बोझ से दबे अस्पतालों में इलाज हासिल न कर पाने वाले लोगों की मदद के लिए उन्होंने टेलीकंसल्टेशन सेवा लॉन्च की. शुरुआत में उन्होंने हेल्पलाइन के लिए पांच डॉक्टरों से संपर्क साधा. उन्होंने भुगतान की पेशकश की, पर सभी ने कहा कि वे मुफ्त मदद करने के लिए तैयार हैं.
जल्द ही 28 डॉक्टर साथ आ गए. फोन लाइनें संभालने के लिए पांच वॉलंटियर का भी साथ मिला. कुल मिलाकर वे रोज करीब 200 कॉल अटेंड करते हैं. बीते महीने उनकी सेवा के जरिए करीब 1,400 लोगों ने चिकित्सा सहायता हासिल की.
वे कहते हैं कि चुनौती उन मरीजों को इंतजार करने की बजाए दवाइयां शुरू करने के लिए राजी करने की है, जिनमें कोविड-19 के लक्षण हैं लेकिन अभी टेस्ट नहीं करवाया है. कुछ निश्चित मामलों में उनका संगठन व्यक्तिगत सहायता की पेशकश भी करता है. हैदराबाद से एक महिला ने जयपुर में अपनी 75 वर्षीया मां के लिए हेल्पलाइन को फोन किया.
उनके पड़ोसी ने टेस्ट करवाने में तो मदद की थी, पर जब वे कोविड पॉजिटिव निकलीं तो उनके साथ दूरी बरतने लगे. सुधांशु के ग्रुप का एक वॉलंटियर दवाइयां देने और ऑक्सीजन स्तर जांचने के लिए उनके घर गया. इसी तरह डायबिटीज की बीमारी से ग्रस्त कैंसर का एक मरीज कोविड पॉजिटिव आया. इस हेल्पलाइन के नतीजतन एक जाने-माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ने इस मरीज को उनका शुगर का स्तर संभालने में मुफ्त कंसल्टेशन की पेशकश की.
मदद की अन्य कोशिशों में एक आश्रय गृह के कोविड पॉजिटिव निकले 21 बाशिंदों को इलाज की पेशकश और राज्य के टोंक जिले में निवाई के मरीजों के लिए 50 मेडिसिन किट भेजना भी है. डॉ. सुधांशु के विश्वविद्यालय ने भी अस्पताल में भर्ती होने का इंतजार कर रहे और ऑक्सीजन के सहारे की गंभीर जरूरत झेल रहे मरीजों के लिए राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) में पांच ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से लैस एक बस तैनात कर दी.
अपनी कार से शहर भर में घूमते वक्त भी अपनी हेल्पलाइन पर चल रही चैट और बातचीत पर नजर रखते हुए वे कहते हैं, ''अपने व्यस्त और थकाऊ कार्यक्रमों के बावजूद डॉक्टरों का समाजसेवा के लिए समय देना अद्भुत रहा है और लोग भी जरूरतमंदों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए चंदे की पेशकश कर रहे हैं.’’
डॉ. सुधांशु, सह-संस्थापक, ज्ञान विहार विश्वविद्यालय, जयपुर
उन्होंने क्या किया जरूरतमंदों को चिकित्सा संसाधन मुहैया कराने के लिए मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा शुरू की.
28 डॉक्टर
हिस्सा हैं डॉ. सुधांशु की टेलीमेडिसिन हेल्पलाइन का. इन्होंने पिछले एक महीने में 1,400 लोगों की मदद की है.

