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विशेषांकः पढ़ाई में चाहिए अब नए पाठ

कौशिक डेक नई शिक्षा नीति ने एक ज्ञान क्रांति की आस जगाई तो है लेकिन सच पूछिए तो डिजिटल लर्निंग ही है जो गेमचेंजर साबित होने जा रहा है.

कल-पुर्जे फरीदाबाद की मानव रचना यूनविर्सिटी में इंजीनियरिंग के छात्र
कल-पुर्जे फरीदाबाद की मानव रचना यूनविर्सिटी में इंजीनियरिंग के छात्र
अपडेटेड 5 फ़रवरी , 2021

71 वर्ष गणतंत्र के/शिक्षा

वर्ष 2020 शिक्षा के लिहाज से विशेष रूप से भारत के लिए कुछ अलग ही रहा. कोविड महामारी ने न केवल शिक्षा प्रणाली को पंगु किया, बल्कि तेजी से वर्चुअल शिक्षा के रास्ते पर जाने को विवश किया. यही वह वर्ष भी था जब 34 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नई शिक्षा नीति (एनईपी) लागू हुई. अगले पांच साल यह तय करेंगे कि क्या सरकार रणनीतिक रूप से एनईपी को लागू कर सकती है, खासकर अब जब डिजिटल लर्निंग की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी?

इस आशय का पहला संकेत 1 फरवरी को केंद्रीय बजट में एनईपी को मिलने वाले फंड से मिलेगा. इसमें सोच और शिक्षा के क्षेत्र में आमूल परिवर्तन की कल्पना की गई है और व्यावहारिक शिक्षा पर काफी जोर है. इस परिवर्तन के लिए बुनियादी ढांचे के साथ-साथ शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण में बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी.

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत को मांग-आपूर्ति की खाई पाटने के लिए अतिरिक्त 2,00,000 स्कूलों, 35,000 कॉलेजों और 700 विश्वविद्यालयों की दरकार होगी. हालांकि मौजूदा संस्थाएं भी पर्याप्त जनशक्ति के अभाव समेत कई अन्य कारणों से पंगु दिखती हैं. 1 सितंबर, 2020 तक 42 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 6,210 पद खाली थे. नवंबर 2019 की रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों के 48,236 पदों में से 5,949 रिक्त थे.

पढ़ाई का नया पाठ
पढ़ाई का नया पाठ

महामारी के दौरान करीब 15 लाख स्कूल बंद हो गए, जिससे पूर्व-प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के 28.6 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए. अन्य 60 लाख छात्र कोविड के दस्तक देने से पहले ही पढ़ाई बीच में छोड़ चुके थे. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट कहती है कि शिक्षा में व्यवधान से भारत को 440 अरब डॉलर (32.1 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है. 

एनईपी को सफलतापूर्वक लागू करने और शिक्षा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र और राज्यों को शिक्षा पर अभी जीडीपी के करीब 3 प्रतिशत खर्च को बढ़ाकर 6 प्रतिशत करना होगा. भारत 5-24 आयु वर्ग में 50 करोड़ छात्रों के साथ 7.3 लाख करोड़ रु. का भारत का शिक्षा बाजार दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा बाजारों में से एक है.

केपीएमजी और गूगल के कोविड-पूर्व अध्ययनों में अनुमान लगाया गया है कि भारत में ऑनलाइन शिक्षा का बाजार 2021 तक 96 लाख उपयोगकर्ताओं के साथ 1.96 अरब डॉलर (14,309 करोड़ रु.) का हो सकता है. 2016 में 16 लाख उपयोगकर्ताओं के साथ यह 24.7 करोड़ डॉलर (1,803 करोड़ रु.) का था. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ऑनलाइन शिक्षा का बाजार 3,900 करोड़ रु. का है. वह 2024 तक बढ़कर 36,030 करोड़ रु. का हो जाएगा.

लॉकडाउन ने एडटेक को बढ़ावा दिया है. अमेरिका के बाद भारत अब मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (व्यापक ऑनलाइन पाठ्यक्रमों) का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. 2022 तक इसका एडटेक मार्केट बढ़कर 25,570 करोड़ रु. होने का अनुमान है. जनवरी और अगस्त 2020 के बीच वेंचर कैपिटलिस्ट्स ने एडटेक के 36 सौदों में 8,694 करोड़ रु. का निवेश किया जबकि 2019 में इसी अवधि में 43 सौदों में 2,988 करोड़ रु. का निवेश हुआ था.

दूसरी ओर, डिजिटल की खाई वर्चुअल शिक्षा में रोड़े डालती है और शिक्षा को हर आर्थिक स्तर तक पहुंचाने में चुनौती बनती है. वैश्विक शिक्षा नेटवर्क क्वाक्कारेली साइमंड्स (क्यूएस) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूदा शिक्षा पद्धति को ऑनलाइन लर्निंग में परिवर्तित करने के लिए पर्याप्त सक्षम नहीं है. 2019 के सरकारी सर्वेक्षण में कहा गया है कि केवल 24 प्रतिशत शहरी परिवारों की ही इंटरनेट तक पहुंच है. ग्रामीण भारत में यह केवल 4 प्रतिशत है.

नीति आयोग की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक 55,000 गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं था जबकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के 2017-18 के सर्वे में पता चला कि 36 प्रतिशत स्कूल बिना बिजली के हैं. तकनीक-चालित शिक्षा बहुत-से वंचित बच्चों को स्कूली शिक्षा जारी रखने से रोक रही है. केंद्र सरकार 2,50,000 ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी लाने के लिए भारत नेट परियोजना को तेजी से बढ़ा रही है. आशा है कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद करेगा. आने वाले पांच साल कई दशकों के लिए उपयोगी भारत की ज्ञान अर्थव्यवस्था की नींव रख सकते हैं.


7.3 लाख करोड़ रु. था
2019 में भारत में शिक्षा उद्योग का आकार; 5-24 के आयु वर्ग में 50 करोड़ छात्र संख्या देखते हुए यह सबसे बड़े शिक्षा बाजारों में

3,900 करोड़ रु.
है भारत में ऑनलाइन शिक्षा का बाजार; 2024 तक यह 36,030 करोड़ रु. हो जाएगा
2,00,000
अतिरिक्त स्कूल, 35,000 कॉलेज और 700 विश्वविद्यालय चाहिए बढ़ी जरूरत पूरी करने को

75 वें/ वर्ष का एजेंडा


नई शिक्षा नीति को पर्याप्त बजट के साथ लागू किया जाए. शिक्षा पर खर्च को जीडीपी के छह फीसदी तक ले जाया जाए

डिजिटल शिक्षा के लिए फास्ट-ट्रैक बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण का तंत्र खड़ा किया जाए, डिजिटल खाई को पाटा जाए 

शिक्षकों के खाली पड़े पद प्राथमिकता के आधार पर भरे जाएं

कोविड-19 के चलते हुए पढ़ाई के नुक्सान की भरपाई के लिए योजना तैयार की जाए
 

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