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नई संस्कृति-नए नायकः लीक से अलग खींची बड़ी लकीर

मुंबई से लौटीं चंदन ने रांची में कम बजट में महेंद्र मिसिर (बीते समय के मशहूर भोजपुरी लोकगायक) के गीत, बलजोरी रे सइयां, मांगे गवना हमार रिकॉर्ड करके उसे साउंड क्लाउड पर अपलोड कर दिया.

चंदन तिवारी
चंदन तिवारी
अपडेटेड 5 दिसंबर , 2019

बात दशक भर पहले की है. सहेली के कपड़े और मां से पैसे लेकर परंपरागत गीतों की थाती लिए झारखंड के बोकारो की एक प्रतिभावान लड़की बड़ी उम्मीदों के साथ मायानगरी मुंबई गई थी. वहां टीवीवालों ने कहा, परिवार छोड़कर मुंबई में रहना पड़ेगा. संगीत की दुनिया में बगैर मुंबई के मुकाम हासिल नहीं होगा. लड़की उल्टे पांव घर लौट आई. मन में मुंबई को गलत साबित करने का संकल्प लेकर वह कड़ी मेहनत करने में जुट गई. उसी संकल्प और धैर्य का नतीजा है कि आज चंदन तिवारी देश-दुनिया के 200 जगहों पर कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी हैं और माटी की खुशबू बिखेरते हुए अमिट छाप छोड़कर आई हैं. 2018 में चंदन को संगीत नाटक अकादमी का युवा प्रतिभाओं की श्रेणी का बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार मिला.

चंदन का परिवार मूलरूप से बिहार के भोजपुर जिले के तरारी प्रखंड के बड़का गांव का है. पर वे पली-बढ़ी हैं बोकारो में. 26 वर्षीय चंदन आज लोक संगीत में जाना-पहचाना नाम हैं. पुरबियातान नाम के उनके यूटयूब चैनल पर 91,000 से अधिक सब्सक्राइबर हैं और उनके गानों को लाखों व्यूज मिलते हैं. चंदन कहती हैं, जब विंध्यवासिनी देवी, शारदा सिन्हा और भरत शर्मा जैसे लोग बिना मुंबई के लोकसंगीत में लोकप्रिय हो सकते हैं तब वे क्यों नहीं?

मुंबई से लौटीं चंदन ने रांची में कम बजट में महेंद्र मिसिर (बीते समय के मशहूर भोजपुरी लोकगायक) के गीत, बलजोरी रे सइयां, मांगे गवना हमार रिकॉर्ड करके उसे साउंड क्लाउड पर अपलोड कर दिया. दो दिनों में हजारों लोगों ने इसे सुना और सुननेवालों में से एक मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेयी भी थे. वाजपेयी ने तिवारी से संपर्क साधकर एक और गाने की रिकॉर्डिंग मांगी. तब चंदन ने उन्हें महेंद्र मिसिर की रचना अंगुरी में डसले बिया नगिनियां रे भेजी थी.

वाजपेयी से तारीफ पाकर चंदन का हौसला बढ़ गया और उन्होंने भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिसिर के गीतों को लेकर पुरबियातान नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की. खुद वाजपेयी इसके उद्घाटन में पहुंचे थे.

असल में, बिहार के लोकसंगीत में लोग कुछेक नामों से ही परिचित थे. पर चंदन गुमनाम प्रतिभाओं को लेकर आईं. वे कहती हैं, लोग अमूमन रामजियावन दास बाबला, मामाजी बक्सर, स्नेहलता के गीत बहुत गाते हैं, लेकिन उनके नाम आगे नहीं आ पाते. मसलन, बाबा बैजनाथ हम आयेली दुअरिया गीत काफी प्रचलित है पर यह गीत स्नेहलता का है, इसे बहुत कम लोग जानते थे. चंदन सिर्फ यहीं नहीं रुकीं. उन्होंने रसूल मियां, कैलाश गौतम, शिवप्रसाद किरण, मुरारी शरण, मूसा कलीम, सुंदर वेश्या, स्नेहलता, मोती बीए जैसे 60 रचनाकारों और कलाकारों के 200 से अधिक गीतों को अपना स्वर दिया है.

दिल्ली में पर्यावरणवद् अनुपम मिश्र से मुलाकात केबाद उन्होंने गांव, गांधी और गंगा पर जोर दिया. आज सियासत में राम को उन्मादी नारे में बदल दिया गया है. लेकिन चंदन ने अपने गीतों में लोगों के और सबके राम को तरजीह दी और रसूल मियां के मशहूर राम का सेहरा नाम का गीत लेकर आईं.

चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर वे गांधी चरखा चालू रहे नाम से गीतों की शृंखला में 20 गीत लेकर आईं. चंदन को सांस्कृतिक संस्था आखर ने ब्रांड एंबेसेडर बनाया है. आखर के सचिव संजय उपाध्याय कहते हैं, ''चंदन ने भोजपुरी की अश्लील बन चुकी छवि बदलकर एक नई लकीर खींच दी है.'' यह सच भी है. चंदन ने बैंकॉक के एक कार्यक्रम का न्यौता इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उस मंच पर स्त्री के तन के गीत गानेवाले लोग थे. वहीं, उन्होंने मॉरीशस के एक समारोह पर रांची में अनाथ बच्चों के बीच कार्यक्रम को तरजीह दी.  

चंदन ने कई परंपराएं ध्वस्त की हैं. भोजपुरी में अमूमन नायक और गायक दिखते हैं पर पिता हरिशंकर तिवारी के रिटायरमेंट के बाद परिवार आर्थिक बोझ से दब गया था. मां रेखा तिवारी हर मुश्किल में चट्टान की तरह उनके पीछे रही हैं. इन दुश्वारियों से निकलकर चंदन ने सितारों से स्टारडम को चुनौती देकर अपनी पहचान बनाई है. और अब चंदन बिहारनामा के साथ भगवान बुद्ध पर लोकगीतों की खोज कर रही हैं और कभी उनको नचनिया-बजनिया कहने वाले लोगों की आंखें उनकी चमक से चौंधिया रही हैं. ठ्ठ

संघर्ष:

आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. मुंबई में रहने की शर्त नकारी. गाना शुरू किया तो आसपास के लोग नचनियां-बजनियां कहते थे

टर्निंग प्वाइंट:

बीते जमाने के लोकप्रिय भोजपुरी संगीतकार महेंद्र मिसिर के गीत रिकॉर्ड करके जब साउंड क्लाउड में अपलोड किया. और फिर पुरबियातान कार्यक्रम शुरू किया

उपलब्धि:

60 से अधिक कम ज्ञात स्थानीय रचनाकारों के 200 से अधिक गीत गाए. बिहार की इकलौती युवा गायिका जिन्हें संगीत नाटक अकादमी ने बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार दिया

सफलता के सूत्र:

धारा के विपरीत धैर्य और ईमानदारी से काम किया. सरोकारी गायन, भोजपुरी की अश्लील छवि मिटाने की कोशिश

लोकप्रियता के कारक:

भोजपुरी की विरासत आगे बढ़ाई, अश्लील गीतों से दूरी कायम करने से एक बड़ा श्रोतावर्ग जुड़ा

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