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डार्क मोड

सेक्स सर्वे 2012: बोल्ड और बेबाकी भरी बातों की एक रात

इंडिया टुडे ने सालाना सेक्स सर्वे की दसवीं सालगिरह सितारों की मौजूदगी में मनाई जिसमें अंतरंगता और खुलेपन का संगम था तो कॉमेडी के साथ ईमानदारी और खरेपन का पुट भी था.

अपडेटेड 23 दिसंबर , 2012

29 नवंबर की सर्द रात को रास्ते मानो एक ही मंजिल की ओर जा रहे थे-महरौली में कुतुब मीनार के करीब स्थित ब्लू फ्रॉग क्लब. तराशे बदन की मलिकाएं बैकलेस गाउन में कॉकटेल गटकते हुए सेक्स पर बतियाने में मशगूल थीं. इंडिया टुडे ने सेक्स सर्वे की 10वीं सालगिरह सेक्सपोजीशन, 2012 के साथ मनाई. यह एक यादगार लम्हा था. नवंबर की बेमौसम बारिश और ट्रैफिक जाम भी इसके जोश को ठंडा नहीं कर पाए. वहां मौजूद लोगों के चेहरों पर इस खास सांस्कृतिक शाम का हिस्सा बनने की चमक नजर आ रही थी, जहां हकीकत और अफसाने के आईने में सेक्स की चर्चा की जानी थी.

लेखिका शोभा डे बिजलियां गिरा रही थीं. उनसे पूछा गया कि क्या कामयाबी बेवफाई को जन्म देती है? वैसे उन्होंने वफा को तरजीह तो दी, लेकिन माना कि सामाजिक ढांचा और सत्ता के गलियारे पुरुषों के लिए ही बनाए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ताकतवर महिलाओं के इर्द-गिर्द सेक्स से जुड़े किस्से नहीं पनपते क्योंकि औरत के रूप में आपको समाज की अपेक्षा पर खरा उतरना होता है. अगर आप बिल क्लिंटन, डॉमिनिक स्ट्रॉस-कॉन या टाइगर वुड हैं तो आपके आसपास औरतों का जमघट लगा ही रहता है.’’ मर्द बेवफाई का जोखिम ले सकता है, औरत नहीं.

बेटी अरुंधती से लिए जॉन फरेरा के नीले गाउन में डे लाल मखमली बेड पर कोयल पुरी रिंचेत के साथ गपशप में मशगूल थीं. 64 की उम्र में भी सेक्सी दिख रहीं डे ने कोयल की खूब तारीफ बटोरी पर बीच-बीच में उन्होंने कोयल के साथ मस्ती भी की. जोश से भरे दर्शकों ने सीटियां बजाकर और चुटीली टिप्पणियों से तारीफ की. दिल्ली की शरारत शबाब पर थी. डे ने हर सवाल का बड़ी ईमानदारी से जवाब दिया, लेकिन एक अंतरंग सवाल पर वे झेंप गईं. ऑडियंस में से सवाल आया, ‘‘आपके मन को जीतने के लिए किसी पुरुष को क्या करना होगा?’’ उनका जवाब था, ‘‘वह कैसा दिखता है, मायने नहीं रखता. पर उसे अपने सयानेपन से मुझे बांधे रखना होगा.’’Sex summit

बिस्तर के बाद बारी स्टूल की आई लेकिन सेक्स से जुड़ी गर्मी बरकरार रही. स्टेज पर माधुरी बनर्जी (लूज़िंग माय वर्जिनिटी ऐंड अदर डंब आइडियाज़ और मिस्टेक्स लाइक लव ऐंड सेक्स की लेखिका) के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा, तांत्रिक गुरु महासत्व मां आनंद सरिता और समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव आए. उन्होंने पुरुषों की पसंदीदा लाइनें दागीं, सेक्स आसनों और अंतहीन चरम सुख (ऑर्गेज़्म) पर बात की. हुड्डा को लगा कि मंच पर मौजूद लोग अंतरंगता को लेकर कुछ ज्यादा गंभीर हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘सेक्स में बौद्धिकता न घुसेड़ें. हम इस पर कुछ ज्यादा ही गंभीरता से बात कर रहे हैं. इसे क्रिएटिव और मस्ती भरा बनाना चाहिए.’’ बनर्जी ने सहमति जताई और कहा कि भारतीयों की सबसे बड़ी गलती यही है कि वे जी भर कर सेक्स नहीं कर रहे हैं. उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा, ‘‘रोमांस और फूलों को भूल जाओ, सिर्फ सेक्स करो.’’

हुड्डा ने यह कहकर सबको हैरान कर दिया कि उन्हें घोड़ों का जुनून है. उनके पास एक हैनोवरियन और उसके अलावा चार बेहतरीन किस्म के घोड़े हैं. कई जूनियर चौंपियनशिप उन्होंने जीत रखी हैं. जहां हुड्डा का शानदार शौक उम्मीद से परे था, वहीं ऑडियंस में मौजूद उनकी बहन ने उस समय सबको हैरत में डाल दिया जब उन्होंने वह आवाज खुलेआम सुनाई जो सेक्स के दौरान चरम-सुख हासिल करते समय मुंह से निकलती है.

मां आनंद सरिता ने तांत्रिक सेक्स को स्त्रीत्व से जोड़कर बताया. उन्होंने कहा, ‘‘स्त्री की यौन इच्छा प्यार, एक-दूसरे के साथ और अंतरंगता के इर्द-गिर्द घूमती है जबकि पुरुष को उत्तेजना, चरम-सुख और स्खलन चाहिए. स्त्री को चरम सुख हासिल करने के लिए 20 मिनट लगते हैं, लेकिन पुरुष तीन मिनट में इस स्थिति तक पहुंच जाता है. लिहाजा जब स्त्री चरम-सुख के शिखर पर पहुंच रही होती है तो उसके अंदर और अधिक पाने की चाह प्रबल होती जाती है, जबकि पुरुष ठंडा और संतुष्ट हो जाता है.’’

जब उनसे पूछा गया कि उनका पर्फेक्ट पार्टनर कैसा होना चाहिए, एक शोख मुस्कान के साथ तांत्रिक गुरु ने जवाब दिया कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ समय बिताना पसंद करेंगी जो तांत्रिक ध्यान, डांस करना, मसाज का आनंद उठाना और बुद्धि के साथ रति क्रिया में भी पारंगत हो.

इसके बाद तालियों की गडग़ड़ाहट और आहों के बीच बिपाशा बसु ने सीट संभाली. बिपाशा के लिए सेक्स सिर्फ दिमाग का खेल है. ऑडियंस कुछ और भी सुनने के लिए बेताब हो रही थी. उन्होंने कहा, ‘‘खुद को सेक्सी महसूस करने के लिए मर्द की जरूरत नहीं.’’ गौरी नयनिका के हल्के गुलाबी गाउन में बिपाशा गजब ढा रही थीं. उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिएरू किसी पर दिल आने से लेकर संबंधों तक और बताया कि चुस्त-दुरुस्त रहना सेक्स से मिलने वाले सुख को बढ़ा देता है.

उन्होंने अपनी 2003 की जबरदस्त हिट फिल्म जिस्म का डायलॉग ‘‘जिस्म की भूख्य याद करते हुए कहा, ‘‘आपके अंदर अपने साथी के लिए कामुकता होनी चाहिए. अगर आप अपने साथी की ओर आकॢषत नहीं तो आप उसे जरूर धोखा देंगे, कम-से-कम मन से तो बेवफा होंगे.’’ वे 15 साल की उम्र से रिलेशनशिप में हैं और पिछले दो साल उनकी जिंदगी में तनहाई का सबसे लंबा दौर रहा. उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा, ‘‘जब आप किसी को लेकर प्रतिबद्ध होते हैं तो सेक्स ज्यादा खूबसूरत होता है.’’

बिपाशा ने कोयल के मसालेदार सवालों का रूढ़िवादी जवाब देकर लोगों को हैरत में डाल दिया. बाद में जब बैकस्टेज में उनसे उनकी सेक्स सिम्बल की छवि के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, इससे जितना आत्मविश्वास बढ़ता है उतनी ही घबराहट भी होती है. पर इससे फायदा यह है कि लोग आपसे दूर रहते हैं. असली बिपाशा? वह किताबों में गुम रहने वाली है.

मिशलिन स्टार शेफ विकास खन्ना उस वक्त बुरी तरह फंस गए जब इटली के सांस्कृतिक अधिकारी ने पूछना शुरू किया कि कौन-सा खाना उन्हें सबसे इरॉटिक लगता है. इटली में आत्मीय गृहिणियों के साथ बिताए अपने समय को बखूबी अपने जवाब में पिरोकर उन्होंने बताना शुरू किया, ‘‘इटली की रसोई में मां अपने बच्चों के लिए खाना तैयार करते समय हर चीज हाथ से नापकर बनाती है. वह अपने परिवार को जितना प्यार करती है वही उसके खाना पकाने की बुनियाद होती है.’’

हास्य अभिनेत्री अदिति मित्तल ने सेक्स पर और अधिक खुलेपन की बात कही. उनका मानना था कि ‘‘हंसी सबसे बेहतर कामोत्तेजक हुआ करती थी. सेक्स पर खामोश रहने की जरूरत नहीं. यह दूसरे विषयों जैसा ही है. हम इस पर हंस सकें और खुलकर चर्चा कर सकें.’’

हल्की नीली साड़ी और बेढब चश्मा पहने अपने सेक्स डॉक्टर के किरदार से मित्तल ने सबको खूब हंसाया. इसे ‘द कॉमिक पोजीशन’ नाम दिया गया. यह रात का आखिरी कार्यक्रम था. पर उस वक्त उन्होंने माहौल की गर्माहट बनाए रखी. वे युवा कुंआरे लोगों को फोरप्ले जोक्स और ओरल सेक्स की सलाह देने से नहीं चूकीं.

सेक्स को लेकर ताजातरीन चलन और बातों को लेकर उन्होंने सेक्स के हल्के-फुल्के पक्ष को सब के सामने रखा. उन्होंने और भी कई तरह के जबरदस्त चुटकुलों से माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया.

यह ऐसी शाम थी जिसमें सेक्स पर उस समय तक बातचीत होती रही जब तक लोग अपनी-अपनी राह नहीं निकल लिए. बेशक दीवानगी और प्रतिबद्धता ने आवारगी और बेवफाई को औंधे मुंह पटक डाला.

-साथ में ब्यूरो रिपोर्ट

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