मध्य प्रदेश के सिर से बीमारू राज्य का ठप्पा पूरी तरह से भले ही नहीं हट पाया हो लेकिन यह राज्य अपनी हालत में बदलाव के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है. उत्तर और मध्य भारत की शहरी महत्वाकांक्षाओं का बोझ ढो रही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विकल्प के तौर पर यह प्रदेश इंदौर और ग्वालियर को विकसित करेगा. बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ, भवन निर्माता और अफसरों को ‘इंडिया टुडे रियल एस्टेट कॉनक्लेव्य के मंच से संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने यह बात कही.
भोपाल के जहांनुमा पैलेस होटल में इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से आयोजित रियल एस्टेट कॉन्क्लेव में शिरकत करते हुए चौहान ने कहा कि शहरी क्षेत्र में गरीबों को सस्ते घर उपलब्ध हो सकें, उसके लिए व्यापक योजना बनाने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि सरकारी विकास एजेंसियों को मध्य प्रदेश सरकार एक रु. में जमीन उपलब्ध करा रही है ताकि गरीब व्यक्ति भी अपने घर के सपने को पूरा कर सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा, वे मानते हैं कि विकास में मानवीय पहलू भी काफी महत्वपूर्ण है. इसलिए हर विकास योजना में इसका खास ख्याल रखा जाता है. उन्होंने वादा किया कि कॉनक्लेव में निकले निष्कर्ष का भी समावेश विकास योजना में किया जाएगा.
दुनिया की नजर में प्रदेश की छवि बदलने का दावा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चंबल क्षेत्र से डाकुओं का सफाया कर दिया गया है. अब सरकार इस इलाके को बड़े रूप में विकसित करने के बारे में सोच रही है जिससे कि यह क्षेत्र आर्थिक रूप से विकसित हो सके और दूसरे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराने में सक्षम हो. सिंह ने प्रदेश में मानव संसाधन विकास की जरूरत भी बताई ताकि प्रदेश सही मायने में विकास कर सके.
प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने इस मौके पर बताया कि भोपाल के बड़े तालाब क्षेत्र को किस तरह से अतिक्रमण से मुक्त करवाया गया है. गौर ने कहा, ‘‘बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विकास में अतिक्रमण की समस्या एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इस गंभीर समस्या का हल ताकत के बल पर नहीं बल्कि दूरदर्शिता और सूझबूझ से निकाला जाना चाहिए.’’
प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों का खाका पेश करते हुए बताया, ‘‘2013 से सरकार 24 घंटे बिजली देने की स्थिति में रहेगी. यह बताता है कि किस तरह प्रदेश में उद्योग लग रहे हैं.’’ विजयवर्गीय ने गांवों के विकास से संबंधित एक और महत्वपूर्ण बात कही. उन्होंने कहा, ‘‘हमारी कोशिश गांव के लोगों को शहर में लाने की नहीं है बल्कि उन्हें सारी सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध कराने की है ताकि उन्हें रोजगार की तलाश में शहर की ओर आने की जरूरत न पड़े.’’ उद्योग मंत्री का मानना था कि प्रदेश के लोगों की क्रयशक्ति बढ़ी है, जो यह बताती है कि प्रदेश का विकास हो रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘हम लगातार रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं.’’
‘‘इंडिया टुडे रियल एस्टेट कॉनक्लेव्य को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव, प्रदेश के शहरी विकास आयुक्त संजय शुक्ल, ग्वालियर की महापौर समीक्षा गुप्ता, क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष अनिल शर्मा और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की प्रोफेसर सविता राजे ने भी संबोधित किया.
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि लोगों को अपने घर की जरूरत संबंधी सीधा सवाल आला अफसरों और मंत्रियों से करने का मौका मिला. अब सवाल यह है कि ये जवाब हकीकत कब बनेंगे?

