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‘‘वहां सीखी व्यापक हित में काम करने की अहमियत ही मेरी ताकत’’

एक्सएलआरआइ बतौर संस्थान और वहां के विश्वस्तरीय शिक्षकों ने छात्रों के जीवन में अमिट छाप छोड़ी.

प्रेरणादायक माहौल: जमशेदपुर में एक्सएलआरआइ-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट का कैंपस
प्रेरणादायक माहौल: जमशेदपुर में एक्सएलआरआइ-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट का कैंपस
अपडेटेड 20 नवंबर , 2022

मेहमान का पन्नाः संजीव कुमार सिंह

एक्सएलआरआइ से 2000 में मार्केटिंग ऐंड सिस्टम में स्पेशलाइजेशन के साथ बैचलर ऑफ मैनेजमेंट किए मुझे दो दशक से ज्यादा वक्त हुआ, पर संस्थान की यादें अब भी जीवंत हैं. बस आंखें बंद करूं और एक्सएलआरआइ-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अपने दिनों की कल्पना करूं, बल्कि उन्हें फिर से जीने लगूं.

फिर हैरानी क्या कि संस्थान के तौर पर एक्सएलआरआइ, उसके विश्वस्तरीय शिक्षकों और कैंपस के प्रेरक माहौल ने मेरी जिंदगी और कामकाज पर अमिट छाप छोड़ी.

जब मैं पीछे मुड़कर अपनी जिंदगी को देखता और अपनी विनम्र उपलब्धियों (52 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना और भारतीय तीरंदाज टीम का कई सारे पदक जीतने के लिए मार्गदर्शन देना) का मीजान लगाता हूं तो एक्सएलआरआइ में आत्मसात किए गए मूल्यों से मैं उसका साफ रिश्ता देखता हूं.

एक्सएलआरआइ में सीखी समाज को उसका दाय लौटाने और व्यापक भलाई के हित में काम करने की अहमियत मेरी प्रेरक शक्ति बनी रही. आज भी कुछ बेहद प्रतिभाशाली भारतीयों को 2024 के पेरिस ओलंपिक में तीरंदाजी का स्वर्ण पदक जीतने के लिए मेंटर करते हुए मेरा लक्ष्य साफ है—विकसित होते हुनर को ढालना और हां, इसके अलावा प्रशिक्षुओं में सच्चे ढंग से जज्बा भरना. इसका श्रेय मैं एक्सएलआरआइ में अपनी पढ़ाई को देता हूं.

ये पंक्तियां लिखते वक्त मेरा दिमाग लौट-लौटकर प्रो. सरीन की आर्ट ऑफ मार्केटिंग की कक्षाओं, प्रो. मधुकर शुक्ला के ऑर्गेनाइजेशनल बिहैवियर के पाठों, ईथिक्स ऐंड लीडरशिप पर फादर जेसुराजन की दिलचस्प और विचारोत्तेजक जानकारियों, और फाइनेंस की कक्षाओं में कौशिक चटर्जी से सीखी व्यावहारिकता की अवधारणा की अहमियत की तरफ जाता है.

फेहरिस्त लंबी है. किशोरवय में जब मैंने तीरअंदाजी को अपनाया, वह मेरे लिए मूलत: डी.आइ.वाइ. (डू इट योरसेल्फ) कवायद थी. मैं ज्ञान पर अमल कर पाता हूं और मेंटर करते वक्त अपने हुनर सबमें पाता हूं तो टाटा स्टील और एक्सएलआरआइ का पर्याप्त शुक्रिया अदा नहीं कर सकता.

टाटा ग्रुप ने मुझे तीरअंदाजी चैंपियन गढऩे का मौका दिया, तो एक्सएलआरआइ की सीख ने कीर्तिमान रचने के हुनर निखारने में मेरी मदद की.

(द्रोणाचार्य और अर्जुन पुरस्कार विजेता लेखक भारतीय खेल प्राधिकरण के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर (तीरअंदाजी) हैं. उन्होंने एक्सएलआरआइ-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से 2000 में ग्रेजुएशन किया.)

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