क्रिप्टो / मेहमान का पन्ना
कुंदन नंदवानी
महीनों की शंका-आशंकाओं के बाद क्रिप्टोकरेंसी ने आखिरकार बजट 2022 में पहुंचने का रास्ता बना ही लिया. जाहिर है, इसने मिली-जुली प्रतिक्रियाओं को न्यौता दिया है. भारत ने क्रिप्टो को अपनाने में हाल में काफी उछाल आता देखा और इस मामले में वह वैश्विक अगुआ बन गया. मगर फिर भी अभी कई ऐसे धुंधलके हैं जिनसे निवेशकों को चौकन्ना रहना चाहिए.
सरकार ने एक नया परिसंपत्ति वर्ग परिभाषित किया है—वर्चुअल डिजिटल एसेट—जिसमें क्रिप्टोकरेंसी और नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी) शामिल हैं. इसके दो प्रमुख निहितार्थ हैं. पहला क्रिप्टोकरेंसी को अलग से परिभाषित न करके केंद्र ने करेंसी या मुद्रा के रूप में उसके गुण-दोषों पर विचार नहीं किया. मगर करेंसी होना ही तो वह प्राथमिक कारण था जिससे बिटकॉइन सरीखे टोकन बनाए गए थे.
सरकार ने साफ कर दिया है कि वह क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय रुपए के समकक्ष हैसियत नहीं दे सकती. दूसरा यह कि वर्चुअल डिजिटल एसेट या परिसंपत्ति की परिभाषा इतनी व्यापक है कि इसमें टोकन, कॉइन, रिवार्ड पॉइंट, क्रेडिट कार्ड पॉइंट, फंजिबल टोकन वगैरह आ सकते हैं. मसलन क्रेड अपने यूजर को क्रेड पॉइंट के जरिए प्रोत्साहन लाभ देने के लिए मशहूर हैं. सरकार की परिभाषा के हिसाब से चलें, तो इन्हें भी वर्चुअल डिजिटल एसेट की श्रेणी में रखा जा सकता है.
सरकार ने तमाम वर्चुअल डिजिटल एसेट पर, उनका स्वरूप छोटे वक्त का हो या लंबे वक्त का, 30 फीसद कर वसूलने का फैसला किया है. यही नहीं, उसने स्पष्ट किया है कि क्रिप्टोकरेंसी पर होने वाले घाटे की भरपाई किसी अन्य परिसंपत्ति या कारोबार के मुनाफे से नहीं की जा सकती. अगर आप नियमित स्टॉक मार्केट ट्रेडर हैं, तो सामान्यत: एक शेयर से हुए घाटे की भरपाई दूसरे शेयर पर हुए मुनाफे से कर सकते हैं.
पेशेवर ट्रेडर होने के नाते आप बाजार से होने वाले घाटे की भरपाई ऐसे किसी दूसरे कारोबार से कर सकते हैं जिसके आप मालिक हों. क्रिप्टोकरेंसी के मामले में सरकार ने ऐसी लिखत-पढ़त के दरवाजे बंद कर दिए हैं. लोगों से उम्मीद की जाती है कि घाटे सहें और वह भी उनके अगले मुनाफे से घाटा की भरपाई के विकल्प के बगैर. यह और इसके साथ कर की ऊंची दर कुछ निवेशकों को हतोत्साहित करने के लिए काफी है.
दूसरा अवरोधक कारक एक फीसद टीडीएस है जो तमाम लेन-देन पर वसूला जाएगा—यहां तक कि अगर आप एसेट एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में ले जा रहे हों तब भी कीमत चुकानी होगी. डिजिटल एसेट की मुख्य खूबी यह है कि लेन-देन मुफ्त और तुरत-फुरत है, पर टीडीएस की वजह से लोग लेन-देन करते हुए दो बार सोचेंगे.
कर लगने से हो सकता है कुछ छोटे निवेशक क्रिप्टो के काफिले में शामिल होने से बिदक जाएं, जबकि दूसरों के लिए कई चीजें साफ होंगी. संभावना यह भी है कि लोग टैक्स से बचने के रास्ते खोज लें, जिससे और परेशानियां पैदा हों.
बहुत सारे लोग यह सोचकर उछल पड़े कि क्रिप्टोकरेंसी पर कर लगने से इस एसेट को कानूनी वैधता मिल गई. क्रिप्टोकरेंसी को वैध या आपराधिक ठहराने वाला क्रिप्टो विधेयक अभी नहीं आया है, लेकिन इससे कर लगाने का सरकार का अधिकार नहीं छिन जाता. असल में, सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सरकार को गैरकानूनी आमदनी पर कर लगाने दिया है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि वर्चुअल एसेट पर कर लगाने का यह जरा भी मतलब नहीं कि उन्हें वैधता दे दी गई है. वैधता के मुद्दे से प्रस्तावित क्रिप्टोकरेंसी विधेयक में निबटा जाएगा. भारतीय रिजर्व बैंक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि करेंसी या मुद्रा केवल केंद्रीय बैंक ही जारी कर सकता है, फिर भले वह क्रिप्टोकरेंसी ही क्यों न हो.
निजी क्षेत्र में जारी टोकन, भले ही उन्हें करेंसी कहा जाता हो, इस वजह से करेंसी नहीं हो जाते. उन्होंने साफ किया कि खरीद-फरोख्त हो ही रही थी और क्रिप्टोकरेंसी से मुनाफा कमाया जा रहा था, तो उन्हें कर तो लगाना ही था.
सरकार ने ऐलान किया है आरबीआइ ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित डिजिटल मुद्रा लाएगा. आरबीआइ की तरफ से जारी डिजिटल मुद्रा की प्रेरणा कहां से मिली, यह अब भी साफ नहीं है. ऐसी मुद्रा भारतीय पारितंत्र में कोई मूल्य संवर्धन नहीं भी कर सकती है. इसकी दो वजहें हैं. पहली, अगर मुद्रा केंद्रीयकृत और आरबीआइ के हाथों नियंत्रित होगी, तो इसे क्रिप्टोकरेंसी नहीं कहा जा सकता.
क्रिप्टोकरेंसियों की पहचान ही यह है कि वे विकेंद्रीकृत हैं. उसे कोई एक पक्ष नियंत्रित नहीं कर सकता. दूसरे, अगर डिजिटल मुद्रा का मकसद डिजिटल भुगतान का विकल्प देना है, तो नई मुद्रा लॉन्च करना जरूरी नहीं है—वह तो यूपीआइ के जरिए किया ही जा रहा है और पेटीएम, गूगल पे, फोनपे वगैरह उसे बढ़ा रहे हैं. लिहाजा भारत की अपनी डिजिटल मुद्रा के बारे में अभी काफी स्पष्टता आना बाकी है.
कुंदन नंदवानी यूट्रेड सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक और सीईओ हैं
हालांकि अब ट्रेडिंग पर टैक्स लगाया जा रहा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि क्रिप्टोकरेंसी वैध हो गई. प्रस्तावित क्रिप्टो बिल में यह साफ कर दिया जाएगा.

