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इस मंदी में कैसे हो बेड़ा पार

दस बातें जो नौकरियों की कमी के इस दौर में कष्ट पहुंचाने की बजाए, आपको सुरक्षित रखेंगी

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपोलो 13 मून मिशन को एक कामयाब नाकामी कहती है, ''अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा तक नहीं पहुंचे मगर हम उन्हें जिंदा घर वापस ले आए.” अब जब भारतीय अर्थव्यवस्था नौकरियों के घोर संकट की ओर बढ़ रही है,  ऐसे में जरूरी है कि इसके निर्दोष शिकार—जिनकी संख्या काफी होगी—जिंदगी को ध्यान में रखें और कामयाब नाकामियों के लिए तैयार हों. जो नौकरी की तलाश में हैं या जिन्हें लगता है कि जल्द ही उनके लिए भी ऐसी नौबत आ सकती है, उन लोगों के ध्यान रखने को दस बातें:

1 कोई नौकरी न होने से बेहतर है कि कोई तो हो. चुनाव के पहले नई भर्तियों में तेजी नहीं आने वाली. नौकरीशुदा लोगों को हेलमेट पहनकर डेस्क के नीचे छिप जाना चाहिए. नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अपनी अपेक्षाएं कम कर लेनी चाहिए; यह छांटने-छोडऩे वाला समय नहीं है.

2 कुछ नया करिए. नए विचारों के लिए यह बढिय़ा समय है. काम छोड़ गए सहकर्मियों का काम संभालने, अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए खुद को तैयार रखिए. अपनी मार्केटिंग में संकोच न करें.

सीखने में निवेश करें. मंदी अपने अंदर छिपे हुनर को तराशने का सुनहरा मौका देती है. बदलाव की गति तेज हो रही है और कुशल या अकुशल, ग्रामीण या शहरी, निर्माण या सेवाओं की काम की दुनिया टेक्नोलॉजी से बदल रही है. यह कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन और व्यापार के साथ आने का समय है.

3 संपर्क में रहें. ज्यादातर नौकरियां उन लोगों के माध्यम से नहीं मिलतीं, जिन्हें आप बहुत अच्छी तरह जानते हैं (मजबूत संबंध), बल्कि उन लोगों के माध्यम से मिलती हैं जो आपके नेटवर्क के दायरे में होते हैं (हल्के-फुल्के संबंध). अपने सहपाठियों, पूर्व सहकर्मियों, बच्चों के सहपाठियों के माता-पिता और हर किसी से हल्का-फुल्का संपर्क बनाए रखें.

4 ज्यादा बचत करें. मुश्किल वक्त के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है कि चादर के भीतर पांव फैलाएं, क्रेडिट कार्ड के खर्चों और दीगर कर्जों को कम से कम रखें और जो खर्चे टाल सकें टाल दें. बेहतर विकल्पों का इंतजार करने के लिए यह लचीलापन बेहद जरूरी है.

5 उम्र का झगड़ा छोड़ दें. कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जो ऊर्जा, उत्साह और कम तनख्वाह वाले युवाओं के पक्ष में बैठती हैं. उन्हें नजरअंदाज करें. मुश्किल दौर में तजुर्बा बहुत मायने रखता है. एम्प्लॉयर्स को याद दिलाएं कि आप उम्रदराज, अक्लमंद और इसलिए ज्यादा कारगर हैं.

6 परिवार और दोस्तों को करीब रखें. अपने आपको याद दिलाएं कि हम एक अर्थव्यवस्था में नहीं बल्कि एक समाज में रहते हैं. जिंदगी की सबसे अच्छी चीजें भौतिक चीजें नहीं हैं और संकट के बादल भी छंट जाएंगे. परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताना आपकी सेहत के लिए नींव के पत्थर का काम करेगा.

7 बातचीत जारी रखें और कोशिश बढ़ाएं. मुश्किल वक्त में इंटरव्यू के बुलावों का अनुपात भी काफी कम हो जाता है. ऐसे में अपनी तरफ से कोशिशें बढ़ाएं. यूं ही अवसर कम ही उपलब्ध होते हैं, इसलिए बातचीत या सौदेबाजी की कला बहुत महत्व रखती है. पदनाम, सीखने के मौके, भूमिका, शहर और उन सभी चीजों पर साफ-साफ बात करने के लिए तैयार रहें जिन पर आप तनख्वाह के लिए समझौता करने को तैयार हैं.

8 अपने बिजनेस के बारे में सोचें. मैं कभी किसी नाखुश कामयाब उद्यमी से नहीं मिला मगर कई नाखुश कामयाब कर्मचारियों को जानता हूं. मुश्किल दौर सिर्फ अपना मालिक आप बनने का दरवाजा ही नहीं होता बल्कि प्रतियोगिता कम हो जाने की वजह से तमाम अनूठे मौके भी उपलब्ध करवाता है.

9 इसे अपने ऊपर न लें. अगले कुछ वर्षों में जिस वजह से बहुत-से लोग नौकरियां तलाश रहे होंगे, उसका उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन से बहुत कम लेना-देना होगा. 10 भारतीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था डूब रही है. मगर जिन लोगों को तैर कर उस पार होना है उन्हें अपने आप पर भरोसा बनाए रखना ही होगा.

ऊपर से देखने पर चाहे जैसा भी लग रहा हो, लेकिन भारत की दीर्घकालिक संभावनाएं भरपूर हैं. वैश्विक संकट ने कमजोर सरकार और चुनावी अनिश्चितता के साथ मिलकर एक जहरीला कॉकटेल तैयार कर दिया है. लेकिन यह वक्त भी गुजर जाएगा. आशावाद अस्तित्व बचाए रखने का एक प्रमुख कौशल है. जैसा लेखक-कवि ऑस्कर वाइल्ड ने कहा था, ''हम एक साथ गटर में हैं मगर हममें से कुछ सितारों को देख रहे हैं.”

लेखक टीमलीज सर्विसेज के चेयरमैन हैं
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