
गौरव अग्रवाल
भारतीय कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऐसे नए दौर में प्रवेश कर रही हैं, जिसकी पहचान टूल से कम और कर दिखाने वाले सिस्टम से ज्यादा होगी. अलग-थलग एआइ पायलट से शुरू हुआ सफर अब मॉडल, असिस्टेंट और तेजी से बढ़ते स्वायत्त एजेंटों के आपस में जुड़े नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है.
ये एजेंट अब फैसलों में मदद ही नहीं कर रहे, बल्कि अलग-अलग कामकाज में अक्सर उसी वक्त फैसले भी लेने लगे हैं. ग्राहकों से सीधे बातचीत और क्रेडिट रिस्क से लेकर सप्लाइ चेन तथा आइटी ऑपरेशन तक, एआइ अब मुख्य वर्कफ्लो में शामिल हो रहा है. ऐसे में सवाल है: स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए बनाए गए सिस्टम पर नियंत्रण कैसे रखा जाए? गवर्नेंस के पारंपरिक ढांचे इसके लिए बने ही नहीं थे.
नीतियां, ऑडिट और समय-समय पर होने वाली समीक्षा एक तरह के स्थिर माहौल में तो कारगर रहे हैं लेकिन लगातार सीख रहे, आपस में संवाद कर रहे और मशीन की रफ्तार से फैसले ले रहे एआइ सिस्टम के सामने वे कमजोर पड़ जाते हैं. यहीं ऑर्केस्ट्रेशन आधारित एआइ गवर्नेंस की जरूरत सामने आती है.
आइबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, समग्रता के साथ ऑर्केस्ट्रेशन अपनाने वाले संगठनों में उत्पादकता पर असर केवल नियमों के पालन पर ध्यान देने वालों से छह गुना से भी ज्यादा था. सर्वे में शामिल सिर्फ सात फीसद भारतीय कंपनियों के पास फिलहाल ऐसे प्लेटफॉर्म हैं.
देसी कंपनियों में गवर्नेंस को नए सिरे से ढालने की जरूरत अब साफ दिख रही है. हर 10 में से सात भारतीय अधिकारी कहते हैं कि कमजोर गवर्नेंस उनकी एआइ का विस्तार करने की क्षमता रोक रही है. इससे साफ है कि गवर्नेंस अब पर्दे के पीछे नियमों के पालन की कवायद नहीं, बल्कि एआइ से असर पैदा करने वाला अगली कतार का जरिया है.
एआइ एजेंट आधारित कंपनी के लिए बदलता गवर्नेंस
अधिकतर संगठन अब भी गवर्नेंस को सिस्टम से बाहर की चीज मानते हैं—नियम केंद्रीय स्तर पर बनते हैं और समय-समय पर लागू होते हैं. यह दूरी बनाए रखना अब कठिन हो रहा है. एआइ एजेंट अलग-अलग डेटा स्रोतों, सिस्टम और कामकाज में सक्रिय रहते हैं.
उनका दायरा बढ़ता है मगर अक्सर उन पर नजर रखने की क्षमता नहीं बढ़ती. कई कंपनियां अब भी यह जानकारी जुटाने में लगी हैं कि एआइ कहां इस्तेमाल हो रहा है, फैसले कैसे लिए जा रहे हैं और नतीजों के लिए जवाबदेह कौन है.
इसका असर जोखिम से आगे जाता है. साफ जानकारी और नियंत्रण के बिना एआइ की कोशिशें बिखरी रहती हैं. उनका विस्तार कठिन, नतीजे असमान और निवेश पर लाभ हासिल करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए गवर्नेंस को उस जगह के करीब पहुंचना होगा जहां फैसले लिए जाते हैं. ऑर्केस्ट्रेशन आधारित एआइ गवर्नेंस नियंत्रण की ऐसी परत से गवर्नेंस और क्रियान्वयन को जोड़ता है, जो मॉडल, एजेंट और वर्कफ्लो के बीच तालमेल बनाती है.
इसमें नीतियां काम पूरा होने के बाद लागू करने के बजाए सीधे कामकाज में शामिल होती हैं. एजेंट जब आपस में और कंपनी के सिस्टम से संवाद करते हैं तो ऑर्केस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म उन्हें कारोबारी लक्ष्यों से जोड़े रखते हैं. संगठन प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं, जरूरत पर दखल दे सकते हैं.

जिम्मेदार एआइ एजेंट: कारोबारी बढ़त के रूप में गवर्नेंस
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में एआइ का विस्तार तेज हो रहा है. साथ ही डेटा संप्रभुता, नियमों के पालन और भरोसे से जुड़ी अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं. ऐसे माहौल में एआइ गवर्नेंस को अक्सर रुकावट माना जाता है. हकीकत में सिस्टम के भीतर शामिल होने पर यह विस्तार में मददगार बनता है.
ऑर्केस्ट्रेशन आधारित गवर्नेंस कंपनियों को नियंत्रण गंवाए बिना एआइ क्षमताएं बढ़ाने देता है. एजेंट जब हाइब्रिड माहौल में अलग-अलग सिस्टम के साथ काम करते हैं तो यह उन्हें उसी वक्त कंपनी की नीतियों और नियामकीय जरूरतों के मुताबिक बनाए रखता है. गवर्नेंस ढांचे में शामिल हो तो सिस्टम विकसित होने या बाहरी हालात बदलने पर संगठन बेहतर ढंग से खुद को ढाल सकते हैं.
उतना ही अहम यह है कि एआइ से लिए फैसले ज्यादा पारदर्शी, एकरूप और जवाबदेह होने से भरोसा बढ़ता है. इसका लाभ दिखने लगा है—58 फीसद भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सही एआइ गवर्नेंस से ग्राहकों, नियामकों और बाहरी साझेदारों का एआइ आधारित नतीजों पर भरोसा बढ़ता है.
इस तरह गवर्नेंस केवल नियमों के पालन का नहीं, बल्कि बाजार में साख और साझेदारों के विश्वास का रणनीतिक जरिया बनता है. बिजनेस लीडर्स के लिए संदेश साफ है: एआइ गवर्नेंस को नियमों के पालन से जुड़ा बाद का काम न मानें. कंपनी में एआइ एजेंटों का विस्तार करते समय इसे शुरुआत से ही शामिल करें.
ऐसी ऑर्केस्ट्रेशन क्षमताओं में निवेश करें, जो तुरंत जानकारी और नियंत्रण दें, गवर्नेंस को कारोबारी नतीजों से जोड़ें और टीमों को भरोसे के साथ नए प्रयोग करने में सक्षम बनाएं. गवर्नेंस को आगे रखकर चलने वाले धीमे नहीं पड़ेंगेः वे विस्तार करेंगे, ज्यादा भरोसा हासिल करेंगे और एआइ को प्रयोगों के समूह से स्थायी प्रतिस्पर्धी बढ़त में बदल देंगे.
गौरव अग्रवाल आइबीएम इंडिया ऐंड साउथ एशिया के वाइस प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी) हैं

