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डार्क मोड

दिमागी सरहद को टटोलने की चुनौती

एआइ रचने-गढ़ने की हमारी क्षमता को ही रूपांतरित किए डाल रहा है. पर असल चुनौती यह है कि हम उसे कितनी अच्छी तरह समझते, नियंत्रित और इस्तेमाल करते हैं

इलस्ट्रेशन: नीलांजन दास/एआइ
अपडेटेड 20 अक्टूबर , 2026

विशाल सिक्का

एआइ पर मचे शोर का बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जो अपने-अपने सच को चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे हैं. यह दौर हमसे कई सचाइयों को एक साथ दिमाग में रखने की मांग करता है. जो लोग ऐसा करना सीखेंगे, वे एआइ का भविष्य बनाएंगे और साथ ही हम सबका बेहतर भविष्य भी.

सही हाथों में एआइ पहले ही असाधारण सुधार ला रहा है. हाल ही अपने बनाए एक सॉफ्टवेयर ने मुझे चौंका दिया. बरसों पहले मैंने एक ऐसे सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को विकसित करने की अगुआई की थी, जिस पर बड़ी कंपनियां निर्भर हैं.

उसका बेहद भरोसेमंद होना जरूरी था. उसे तैयार करने में एक बड़ी टीम को कई साल की कड़ी मेहनत लगी थी. इस बार मैंने एक अत्याधुनिक कोडिंग मॉडल की मदद से उसका मोटा-मोटा और आसान रूप एक दिन में दोबारा तैयार कर लिया.

ऐसी कामयाबियां जीवन के हर क्षेत्र में सामने आ रही हैं. अल्फाफोल्ड ने 20 करोड़ प्रोटीन की संरचना का अनुमान लगाया—प्रयोगशाला में इस काम में करोड़ों साल लगते—और डेमिस हसाबिस को रसायन विज्ञान का साझा नोबेल पुरस्कार मिला. गणितज्ञ डॉन नुथ को पता चला कि उनके एक सहयोगी ने बरसों पहले बताई गई समस्या का खूबसूरत हल खोजने के लिए एक मॉडल का इस्तेमाल किया था.

इसके बाद उन्होंने एआइ को लेकर अपने संदेह सार्वजनिक रूप से कुछ कम किए. ओपनएआइ ने नेवियर-स्टोक्स समीकरणों पर अपनी एक टीम की बड़ी कामयाबी का ऐलान किया. गणित की यह बुनियादी चुनौती एक सदी से ज्यादा समय से अनसुलझी थी.

लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर एआइ तबाही ला सकता है. चैटजीपीटी से बहुत पहले, 2017 में हैकरों ने अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी से चुराया गया साइबर हथियार इटर्नलब्लू लीक कर दिया था. कुछ ही हफ्तों में इसका इस्तेमाल वानाक्राइ और नॉटपेट्या हमलों में हुआ. इनसे दुनियाभर के अस्पताल, बंदरगाह और कारखाने ठप हो गए और अरबों डॉलर का नुक्सान हुआ.

जल्द ही आम अपराधी भी इसका इस्तेमाल करने लगे. आज के एआइ मॉडल में मानवता के ज्ञान का बड़ा हिस्सा समाया है और सोशल मीडिया उनके जवाबों को दुनियाभर के अरबों लोगों तक पहुंचाता है. डीपफेक, ऑटोमेटेड फ्रॉड और नुक्सान के लिए इस्तेमाल किया गया ज्ञान अब पहले से कहीं ज्यादा और तेजी से फैल सकता है.

एआइ अपने आप कुछ नहीं करता. जैसा एलन के कहते हैं, “संगीत पियानो में नहीं होता.” जुलाई में ओपनएआइ के एआइ एजेंट अपने सैंडबॉक्स से निकलकर हगिंग फेस समेत कई कंपनियों के सर्वर में घुस गए. फिर जो हुआ उसमें न कोई रहस्य था, न चमत्कार. यह ठीक ऐसे हमलों की बारीकियों पर ट्रेन किए गए बड़े मॉडल और उन पर चल रहे कोड का नतीजा था, जिन्हें पर्याप्त सुरक्षा के बिना खुला छोड़ दिया गया.

ये सिस्टम हमारे दिए हर गुण को कई गुना बढ़ा देते हैं—हमारी सूझबूझ को भी और हमारी लापरवाही को भी. हम इटर्नलब्लू को रोकने में नाकाम रहे. अगर हमने हगिंग फेस की घटना से सबक नहीं लिया तो हम फिर नाकाम होंगे. बदतर यह कि कयामत की चेतावनी और बिक्री के दावे अक्सर उन्हीं लोगों से आते हैं क्योंकि एआइ को ईश्वर जैसी ताकत बताने से डर और कंपनियों की कीमत दोनों बढ़ते हैं.

एआइ भारत के 300 अरब डॉलर (28.9 लाख करोड़ रु.) के आइटी सेवा उद्योग में भारी उथल-पुथल लाने वाला है क्योंकि यह उद्योग कोडिंग, टेस्टिंग और सपोर्ट के उन कामों पर खड़ा है जिन्हें एआइ अब अपने आप कर रहा है.

फिर भी दुनिया की हर कंपनी को एआइ का सही इस्तेमाल करने में मदद चाहिए—अपने कारोबार को समझने, दशकों पुराने सिस्टम बदलने और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी लेने में. यह इस उद्योग के लिए बहुत बड़ा मौका है.

एआइ पर फौरन नियामक निगरानी की जरूरत है. हमारी आधुनिक दुनिया व्यावहारिक सुरक्षा उपायों और नियमों के सहारे चलती है—चाहे हमारे सिर पर कैंची चलाते नाई हों या इमारतें और पुल, मोटरगाड़ियां और हवाई जहाज, हमारा खाना और मनोरंजन, दवाएं और मशीनें. इन सबके लिए सुरक्षा के नियम हैं, जिन्हें अक्सर उसी क्षेत्र के लोगों की संस्थाएं मिलकर बनाती हैं.

और हां, एआइ में तेजी से बहुत ज्यादा नई खोज की जरूरत है. इसका विकास अभी लंबा सफर तय करेगा. मौजूदा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) जिस तरह काम करते हैं, उसकी जड़ में मौजूद मनगढ़ंत जवाबों की समस्या से निबटने से लेकर—जैसा मेरे बेटे वरिन और मैंने हाल ही दिखाया—एआइ की अपने आसपास की भौतिक दुनिया को समझने की क्षमता सुधारने और उसकी बिजली तथा कंप्यूटिंग जरूरतें काफी घटाने तक, बहुत कुछ किया जाना बाकी है. एआइ का विकास अभी शुरुआती दौर में है. इसलिए हमारा दौर चीजों को समझकर अपनी बुद्धि लगाने का है. 

आज एआइ की ताकत खतरनाक ढंग से कुछ हाथों में सिमटी है. मुट्ठी भर कंपनियां एआइ के एकदम अगले मोर्चे पर काबिज हैं और बमुश्किल कुछ हजार विशेषज्ञ सबसे उन्नत मॉडल बना रहे हैं. एआइ के इस मोर्चे की रफ्तार पर तमाम चर्चाओं के बीच मेरा मानना है कि असली मोर्चा लाखों लोगों को यह पियानो बनाना और अरबों लोगों को उस पर संगीत रचना सिखाना है.

आने वाले समय में—शायद मेरे जीवनकाल में, और बहुत मुमकिन है कि मेरे बच्चों के जीवनकाल में—हम ऐसे एआइ सिस्टम देखेंगे जो हमारे कहने पर कुछ भी बना और कर सकेंगे. एआइ शब्द गढ़ने वाले और मेरे जीवन के एक और महान शिक्षक जॉन मैकार्थी ने दशकों पहले इसे देख लिया था.

मेरे जीवन के एक निर्णायक पल में उन्होंने कहा था कि जब हम किसी मशीन से अपने लिए कुछ भी बनाने को कह सकेंगे, तब हम उससे क्या बनवाते हैं, वही अगला मोर्चा होगा. एआइ क्या है और कैसे काम करता है, इसे पूरी तरह समझने वाले एक अरब जिज्ञासु दिमाग उससे जादू रचें—ऐसा जादू जो शायद हमारी समझ से बाहर हो—यही असली मोर्चा है. हां, हमें अपने कानों के बीच मौजूद इस मोर्चे की रफ्तार बढ़ानी होगी.

लेखक हैंग टेन सिस्टम्स के संस्थापक और सीईओ हैं
 

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