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डार्क मोड

कान कसते ही तमतमाए

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाने-पीने की चीजों में मेल-मिलावट और झोलझाल करने वालों के कसे कान. उनकी इस मुहिम ने उन्हें महाराष्ट्र का सबसे चर्चित अधिकारी बना दिया. जनता उनकी मुरीद बनी जबकि अदालतें और उद्योग उनसे सफाई मांग रहे

26 अगस्त को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद
अपडेटेड 21 सितंबर , 2026

ऊपर-ऊपर से देखें तो मुंबई के भिंडी बाजार स्थित नूर मोहम्मदी होटल में बहुत कुछ बदला नहीं दिखता. सफेद कवर वाली मेजें अब भी वही हैं. यहां की मशहूर नल्ली निहारी और अभिनेता संजय दत्त की बताई रेसिपी पर बनने वाला चिकन संजू बाबा ग्राहकों को खींच रहा है.

एम.एफ. हुसेन की बनाई मुर्गे की तस्वीर भी दीवार पर टंगी है. लेकिन यहां रोज खाने आने वाले करीब 1,200 लोग गौर करें तो फर्क दिखेगा. सफाई पर ज्यादा ध्यान है और कर्मचारी अब दस्ताने तथा हेयरनेट पहने हैं. यह बदलाव खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अभियान का नतीजा है, जिसकी अगुआई 51 वर्षीय आयुक्त तुकाराम मुंढे कर रहे हैं.

वर्ष 2005 बैच के आइएएस अधिकारी मुंढे सुरक्षा और सफाई के नियम तोड़ने वाले खाद्य कारोबार संचालकों (एफबीओ) के लिए नया खौफ बन गए हैं. अगस्त के अंत तक करीब 10,000 खाने-पीने के ठिकानों की जांच हुई. 750 से ज्यादा को सुधरने के लिए नोटिस दिया गया और 165 लाइसेंस निलंबित किए गए.

मई में एफडीए से जुड़ने के बाद मुंढे ने नूर मोहम्मदी, अयूब्स, पूर्णिमा, के. रुस्तम ऐंड कंपनी और पारसी डेयरी फार्म जैसे पुराने प्रतिष्ठानों से लेकर इस्कॉन के गोविंदाज और आइआरसीटीसी के किचेन तक कार्रवाई की.

अमीर और रसूखदार लोगों के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया तथा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) जैसे क्लबों और डोमिनोज पिज्जा तथा पिज्जा हट जैसे वैश्विक ब्रांडों को भी नहीं छोड़ा गया. इसी से एक मजाक चल पड़ा हैः ‘तुकाराम मुंढे से मंजूरशुदा रेस्तरां का तमगा मिशेलिन स्टार से ज्यादा वजनदार है.’

मुंढे की कार्रवाई मंत्रालय और बंबई हाइकोर्ट की कैंटीन तक भी पहुंची. हाइकोर्ट ने पूछा था कि क्या एफडीए ने सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की कैंटीनों की जांच की है. इसके बाद अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया.

तीन में से एक कैंटीन बिना वैध एफएसएसएआइ (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) लाइसेंस के चल रही थी और उसे बंद करने का आदेश दिया गया. बाकी दो को सुधार करने के नोटिस मिले.

एफडीए ने स्कूल कैंटीन और स्कूलों के 50 मीटर दायरे में वड़ा पाव तथा एनर्जी ड्रिंक जैसे जंक फूड की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी है. मिल्क पाउडर, वनस्पति वसा और दूसरे सस्ते सामान से बनने वाले सस्ते ‘एनालॉग’ पनीर की बिक्री भी रोक दी गई है.

कार्रवाई खानपान के ठिकानों और खाद्य उत्पादों तक सीमित नहीं रही. एफडीए ने पान मसाला ब्रांड के कथित सरोगेट विज्ञापनों को लेकर अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस दिए हैं.

फूड इंडस्ट्री में हलचल मचाने के बावजूद मुंढे इस कार्रवाई को “कोई बड़ी बात” नहीं, बल्कि “रोजमर्रा का काम” बताते हैं. उनका मानना है कि नियामकों को कानून लागू करवाना चाहिए, लेकिन नागरिकों को भी अपनी खरीद और खानपान को लेकर सतर्क रहना होगा. वे कहते हैं, “यह बच्चों से बुजुर्गों तक सभी से जुड़ा मामला है.”

मुंढे का कहना है कि एजेंसी “निष्पक्ष और पारदर्शी” ढंग से काम कर रही है और उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है. “मेरा एकमात्र निजी स्वार्थ महाराष्ट्र के लोगों की सेवा करना है.”

वे एफडीए की कार्रवाई को मनमाना बताने का आरोप भी खारिज करते हैं और खाद्य सुरक्षा तथा मानक कानून, 2006 के तहत मिली शक्तियों का हवाला देते हैं. एक अधिकारी कहते हैं, “सिस्टम इतना बिगड़ा हुआ है कि सिर्फ अपना काम करने वाले अधिकारी को नायक माना जाने लगता है.”

मुआयना मौके का
एफडीए के छापों ने खाद्य उद्योग की रसोइयों की बदहाल तस्वीर उजागर की है. कहीं मक्खियों और तिलचट्टों की भरमार थी तो कहीं घटिया सामान और गंदगी मिली. फफूंद लगे फल-सब्जियां और भीतर फफूंद लगे ड्रमों में रखा अचार भी मिला. दक्षिण मुंबई की एक लोकप्रिय आइसक्रीम दुकान में बड़ी संख्या में चूहे पाए गए. पहले ही सकते में आए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से मालिकों ने कहा बताते हैं कि ये उनके “पालतू” हैं!

नूर मोहम्मदी उन प्रतिष्ठानों में था, जिनके एफएसएसएआइ लाइसेंस कथित गंदगी के कारण निलंबित किए गए. इसकी शुरुआत 103 साल पहले उत्तर प्रदेश के संभल से आए अब्दुल करीम ने मामूली ‘भटियारखाने’ के रूप में की थी, जहां मुसाफिरों के लिए खाना बनता था.

सआदत हसन मंटो, दिलीप कुमार, एम.एफ. हुसेन, अंडरवर्ल्ड डॉन और तस्कर हाजी मस्तान से लेकर गरीब प्रवासी तक यहां आते थे. यह रेस्तरां 21 दिन बंद रहा. संस्थापक के पोते खालिद हकीम कहते हैं, “मुझे पूरी रसोई नए सिरे से बनानी पड़ी. कमियां बताने वाले मुंढे साहब और एफडीए अधिकारियों की वजह से मेरे रेस्तरां को नया रूप मिला है.”

एफडीए की कार्रवाई का असर अलग-अलग रेस्तरां से आगे भी पड़ा है. अहिल्यानगर के श्रीगोंदा से भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते का कहना है कि एनालॉग पनीर पर पाबंदी के बाद गाय के दूध का भाव अप्रैल-मई 2024 के 20-24 रु. प्रति लीटर से बढ़कर अब 40-42 रु. हो गया है. पाचपुते ने 2025 में विधानसभा में पहली बार एनालॉग पनीर का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने नकली पनीर के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया.

प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि एफडीए के निरीक्षणों से मानक सुधरे हैं. उपभोक्ताओं ने उत्पादों के स्वाद और रंग में बदलाव की बात कही है. जागरूकता बढ़ने से शिकायतें भी तेजी से बढ़ी हैं.

एफडीए को पिछले तीन महीनों में 16,000 शिकायतें मिली हैं, जो उसके काम के विशाल दायरे को दिखाती हैं. एफडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एजेंसी के दायरे में महाराष्ट्र के करीब 12.5 लाख पंजीकृत लाइसेंस आते हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी सिर्फ 350 हैं. करीब एक लाख लाइसेंसधारियों वाले मुंबई में एफडीए के पास केवल 45 अधिकारी हैं.

कहानी मुंढे के बनने की
तुकाराम मुंढे का जन्म जून 1975 में मराठवाड़ा के कम वर्षा वाले बीड जिले के ताडसोन्ना गांव में हुआ. वे परिवार के खेतों में काम करते बड़े हुए और एक जोड़ी चप्पल भी नहीं खरीद सकते थे. उनकी जिंदगी बदली जब उनसे 11 साल बड़े भाई अशोक उन्हें पढ़ाई के लिए औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) ले गए. वहां भी संघर्ष जारी रहा.

शहर में शुरुआती दिनों में मुंढे अक्सर भूख मिटाने के लिए केले और फरसाण खाकर रहते थे. बाद में प्रशासनिक अधिकारी बने अशोक ने छोटे भाई की लोक सेवा आयोग परीक्षाओं की तैयारी कराई.

वर्ष 2005 में सोलापुर में प्रशिक्षु के रूप में पहली तैनाती से ही मुंढे ने तेजी से काम शुरू किया. उन्होंने एक मंत्री के डांस बार पर छापा मारा. अतिक्रमण विरोधी अभियान में दूसरों पर कार्रवाई से पहले स्थानीय तहसील कार्यालय की अवैध चारदीवारी गिराई. वर्ष 2007 में नांदेड़ के देगलूर में सहायक कलेक्टर रहते हुए उन्होंने रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई की और कथित नक्सलियों से धमकियां मिलीं.

साफ छवि, ताकतवर लोगों से टकराने की इच्छा और बेबाक स्वभाव—जिसे कुछ लोग अहंकार मानते हैं—के बावजूद मुंढे का करिअर विवादों से मुक्त नहीं रहा. दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव रहते हुए (अगस्त 2025-मई 2026) उन पर मालाबार हिल स्थित सरकारी फ्लैट की मरम्मत पर 65-70 लाख रु. की भारी रकम खर्च करने की खबरें आईं. इसी कार्यकाल में उन्होंने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों के खिलाफ अभियान चलाया.

नवी मुंबई के नगर आयुक्त (मई 2016-मार्च 2017) रहते हुए उन पर निर्वाचित प्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार का आरोप लगा. दिसंबर 2025 में नागपुर के भाजपा विधायक कृष्णा खोपड़े ने दावा किया कि मुंढे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद उनके समर्थकों ने उन्हें धमकी दी.

इक्कीस साल की सेवा में 25 तबादलों के साथ मुंढे का करिअर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. बिजनेस टुडे के एक कॉन्क्लेव में उन्होंने बताया कि तबादलों का उनके परिवार पर असर पड़ा. जब तक उनका परिवार 2019 में मुंबई नहीं आ गया तब तक उनके बेटे को हर साल स्कूल बदलना पड़ा.

उनके एक पूर्व बैचमेट के मुताबिक, मुंढे की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि “दो दशक की सेवा के बाद भी उन्होंने अपना रंग नहीं बदला.” लेकिन वे सावधान भी करते हैं, “मुंढे अक्सर भूल जाते हैं कि नियम लोगों के लिए होते हैं, लोग नियमों के लिए नहीं.”

इस बीच एफडीए अभियान ने मुंढे को बड़ा प्रशंसक वर्ग दिया है. जुलाई के आखिर में प्रकाशित उनकी मराठी जीवनी तुकाराम के लेखक शफी पठान का दावा है कि किताब की करीब एक लाख प्रतियां पहले ही बुक हो गई थीं.

विरोध के स्वर
आयुक्त मुंढे की ताबड़तोड़ कार्रवाई न्यायिक जांच के दायरे में भी आई है. हाइकोर्ट ने 21 अगस्त को एमसीए परिसर में चल रहे पांच रेस्तरां के लाइसेंस निलंबित करने पर एफडीए से पूछा, “क्या आप खुद को मालिक समझते हैं कि कुछ भी कर सकते हैं?” इससे पहले हाइकोर्ट ने एफडीए को पुणे की मिठाई की एक दुकान को पांच लाख रु. हरजाना देने का आदेश दिया था, जिसका लाइसेंस नियमों का पालन करने के बावजूद निलंबित रहा. अदालत ने एफडीए के कड़े कदमों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह “तलवार से मच्छर मारने” की कोशिश कर रहा है.

एफडीए के एक पूर्व आयुक्त चेताते हैं कि ऐसी व्यापक कार्रवाई से खतरनाक ‘इंस्पेक्टर राज’ लौट सकता है. उनके मुताबिक, नियामकों को कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को भरोसे में लेकर जागरूक करना चाहिए. इंडियन होटल ऐंड रेस्तरां एसोसिएशन की कानूनी शाखा के अध्यक्ष निरंजन शेट्टी कहते हैं कि वे एफडीए से “समझदारी से कार्रवाई” की उम्मीद करते हैं.

पहले सुधार का नोटिस दिया जाए और एफबीओ की गलती जारी रहने पर लाइसेंस निलंबित हो. शेट्टी के मुताबिक, किचन में तिलचट्टों और चूहों की भरमार के लिए नगर निकायों का खराब जल निकासी और ठोस कचरा प्रबंधन भी जिम्मेदार हो सकता है.

हालांकि, उद्योग की बड़ी चिंता लाइसेंस लेने वाले क्षेत्र से बाहर है. पुणे रेस्तरां ऐंड होटलियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शेट्टी मानते हैं कि कुछ प्रतिष्ठानों ने साफ-सफाई के मानक नहीं अपनाए. लेकिन उनके मुताबिक, विक्रेताओं से खरीदे गए पनीर जैसे कच्चे माल की खराब गुणवत्ता के लिए रेस्तरां मालिकों को दंडित करना गलत है.

वे कहते हैं, “कई बिना लाइसेंस वाले लोग घरों और ऑनलाइन माध्यम से कारोबार करते हैं...क्लाउड किचन तेजी से बढ़ रहे हैं. वे कुछ बर्तनों के साथ कोई पंजीकृत पता दिखावे के लिए बताते हैं, लेकिन ज्यादातर खाना झुग्गियों में गंदे हालात में बनाते हैं. उन पर कोई नियंत्रण नहीं है.”

खाने-पीने के उद्योग में चर्चा है कि मुंढे की मंशा के बावजूद निचले स्तर के कुछ अधिकारी अब भी उगाही में शामिल हो सकते हैं. लेकिन मुंढे बेफिक्र हैं. जन-जागरूकता की जरूरत पर जोर देते हुए वे कहते हैं, “अगर नियामकों की कोई भूमिका न बचे तो मुझसे ज्यादा खुश कोई न होगा.”

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