
पहली नजर में यह मामला किसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह के खिलाफ एक और मामला लग सकता है. मगर यह भारत के लिए उससे कहीं ज्यादा बड़ा है. जेल में बंद 33 वर्षीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथियों के खिलाफ अमेरिका की व्यापक जांच ने न केवल एक कथित वैश्विक आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, बल्कि कनाडा में जून 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़ी कानूनी कहानी को भी बदल दिया है. निज्जर का मुद्दा हाल के वर्षों में नई दिल्ली और ओटावा के बीच सबसे ज्यादा तनातनी का मसला रहा है.
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) की 7-8 जुलाई को 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' की घोषणा के बाद यह नई कहानी उभरी. लॉस एंजिलिस पुलिस विभाग, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर फेडरल जांच ब्यूरो (एफबीआइ) ने यह जांच की. जांच में भारत स्थित तीन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों को निशाना बनाया गया. जांच मुख्य रूप से लॉरेंस बिश्नोई के संगठित आपराधिक गिरोह की हुई.
इस ऑपरेशन में बिश्नोई, उसके कनाडाई साथी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और इन दोनों के संगी-साथियों पर रैकेट चलाने, जबरन वसूली, ड्रग तस्करी, टारगेटेड हत्याएं, अपहरण, मानव तस्करी और ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं. अहम बात यह है कि आरोप-पत्र में भारत सरकार, उसके अधिकारियों या खुफिया एजेंसियों के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है.
इससे नई दिल्ली का यह पुराना रुख और मजबूत होता है कि यह अपराध किसी सरकारी तंत्र का नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क का काम था. आरसीएमपी के अधिकारियों को भी इन अपराधों में भारतीय अफसरों के शामिल होने का सबूत नहीं मिला है. यह घटनाक्रम कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस बयान के करीब तीन साल बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुरक्षा एजेंसियां निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंटों के बीच "संभावित संबंध" के आरोपों की जांच कर रही हैं. इसके अलावा, अमेरिका ने बिश्नोई और बराड़ पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है.
अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, बिश्नोई तस्करी के मोबाइल फोनों और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए भारतीय जेल से ऑपरेशन चलाता था. बराड़ उत्तर अमेरिका में ऑपरेशन संभालता था जबकि दूसरा साथी रोहित गोदारा यूरोप का काम देखता था. आरोप है कि यह गिरोह पैसे, रुतबे और सुरक्षा का वादा करके गरीब युवाओं को गिरोह में शामिल करता और उन्हें अक्सर फर्जी वीजा पर विदेश भेजता था.
इसके लिए एक ऐसा तंत्र बना रखा था ताकि उनके सरगना सुरक्षित रहें. आरोप है कि यह नेटवर्क विदेश में रहने वाले भारतीयों से जबरन वसूली करता था और खौफ जमाने के लिए अभिनेता सलमान खान जैसी बड़ी हस्तियों को दी गई धमकियों का इस्तेमाल करता था.
जिन दो अन्य गिरोहों पर आरोप लगाए गए, उनमें से एक भगवानपुरिया गैंग पर पैसे लेकर हत्या करने, ड्रग तस्करी और भ्रष्टाचार के इल्जाम हैं. दूसरा गिरोह ढांडा नेटवर्क है, जिस पर अमेरिका-कनाडा के बीच कोकीन और मेथमफेटामाइन की तस्करी का आरोप है.
सोची-समझी चाल
2024 के आखिर में, न्याय विभाग ने रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व अधिकारी विकास यादव और उनके साथी निखिल गुप्ता पर आरोप लगाया कि उन्होंने जून 2023 में न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपटवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची. इस आरोप से भी निज्जर की हत्या से संभावित कड़ी का संकेत मिला.
न्याय विभाग के हाल के आरोप-पत्र में नजरिया बदल गया है. भारत के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी कहते हैं, "यह एक रणनीतिक बदलाव है. इस मामले को सरकार के निर्देश पर की गई कार्रवाई के बजाय संगठित अपराध के तौर पर देखने से कूटनीतिक खिंचाव कम होगा. मगर वॉशिंगटन ने यादव या गुप्ता को बरी नहीं किया है. कम ही संभावना है कि वह भारत पर अपनी इस बढ़त को छोड़ देगा. "एक खुफिया अधिकारी कहते हैं कि बिश्नोई और बराड़ कानूनी एवं सियासी जांच के मुख्य केंद्र हो गए हैं, जिससे खुफिया संबंधों पर दबाव कम हुआ है.
भारत के एक प्रमुख सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, दोनों मामलों के कानूनी नजरियों में फर्क का कारण उपलब्ध सबूत हैं. पन्नू मामले में, अमेरिकी न्याय विभाग ने गुप्त कोड वाले संदेशों, वित्तीय लेन-देन और ठोस सबूतों को मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त माना क्योंकि उसके अनुसार राज्य से जुड़ी पैसों के बदले हत्या की साजिश के तौर पर ये काफी थे. निज्जर मामले में सबूत जुटाने की चुनौती अलग तरह की थी.
शुरुआती आरोप काफी हद तक सिग्नल इंटेलिजेंस यानी इंटसेप्ट करके जुटाई गई खुफिया जानकारी पर आधारित थे, और इस जानकारी को खुली अदालत में पेश करना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए संवेदनशील इंटेलिजेंस तरीकों का खुलासा करना जरूरी होता है. इसके विपरीत, बिश्नोई नेटवर्क की जांच में पारंपरिक आपराधिक सबूत—जैसे संचार-संवाद, वित्तीय रिकॉर्ड और ऑपरेशन से जुड़े संपर्क—मिले, जिससे सरकारी वकीलों को अदालत में मामला पेश करने में मदद मिली.
इस अंतर से वॉशिंगटन के बड़े रणनीतिक हितों का भी संकेत मिलता है. हिंद-प्रशांत में चीन के खिलाफ अमेरिका भारत को अहम आर्थिक और सुरक्षा साझेदार के रूप में देखता है. अगर भारत को आधिकारिक तौर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश करार दिया जाता, तो इसके न केवल क्वाड बल्कि व्यापक रणनीतिक संबंधों और चीन से इतर ग्लोबल सप्लाइ चेन बनाने की कोशिशों पर भी गंभीर असर पड़ता. मामले के जानकार एक अधिकारी के मुताबिक इसी वजह से भारत सरकार के शीर्ष स्तर को सीधे कानूनी प्रभावों से बचाया जा सका है. निज्जर से जुड़े आरोपों को लेकर महीनों तक चले तनाव के बाद, भारत और कनाडा अपने संबंधों को धीरे-धीरे फिर से बेहतर बना रहे हैं.
मई में कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने खालिस्तानी कट्टरपंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया. नई दिल्ली अरसे से कहती रही है कि सिख अलगाववादी कट्ट्ररपंथी 'खालिस्तान' की मांग से जुड़ी हिंिसा, पैसे जुटाने और उसे बढ़ावा देने के लिए कनाडा का इस्तेमाल पर करते रहे हैं.
सुरक्षा से जुड़े एक और वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ओटावा में जहां कुछ लोग शुरू में नई दिल्ली के खिलाफ 'बदनाम करने' वाला अभियान चलाने के पक्ष में थे, वहीं वॉशिंगटन ने रोकथाम की रणनीति को तरजीह दी. उनके मुताबिक, अमेरिका ने इस बात को जोर देकर बढ़ाया कि बिश्नोई गैंग भारतीय जेलों से तस्करी के मोबाइल फोनों से ऑपरेट करता था. इससे आरसीएमपी को यह कानूनी आधार मिल गया कि 'इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है'. वे कहते हैं, "एक बहुत ही संवेदनशील संप्रभु विवाद को अंतरराष्ट्रीय अपराध के एक बड़े और आम मामले में बदलकर, दोनों देशों ने अपने मकसद हासिल कर लिए, और किसी भी देश को आधिकारिक तौर पर माफी नहीं मांगनी पड़ी."
प्रत्यर्पण पर अगर-मगर
वॉशिंगटन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसका इरादा बिश्नोई के प्रत्यर्पण का है. आरोप तय करने की घोषणा करते हुए, प्रथम सहायक यूएस अटॉर्नी बिल एसेली ने तर्क दिया कि भारत में बिश्नोई की कैद, कथित आपराधिक नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने से रोकने में नाकाम रही है. एसेली ने कहा, "जब वह यहां अमेरिका की फेडरल जेल में आएगा, तो वह किसी और को शिकार बनाकर जबरन वसूली नहीं कर पाएगा. "उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि बिश्नोई का प्रत्यर्पण होगा.
प्रत्यर्पण का कोई भी अनुरोध भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत आएगा. इस संधि पर 1997 में दस्तखत हुए और यह 1999 से ही लागू है. अगर भारत बिश्नोई के प्रत्यर्पण का अनुरोध मान लेता है, तो इससे असहज सवाल उठ सकते हैं कि जेल में बंद एक गैंगस्टर इतना बड़ा कथित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क कैसे चलाता रहा. बिश्नोई अब अहमदाबाद की हाइ-सिक्योरिटी साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है और उस पर करीब 50 अपराधिक मामले चल रहे हैं.
कई मामलों में बिश्नोई का केस लड़ने वाली एडवोकेट रजनी ने कहा, "ऐसे किसी भी अनुरोध पर कदम उठाना बहुत ही मुश्किल होगा. भारतीय कानून के तहत देश में चल रही आपराधिक कार्यवाही को प्राथमिकता दी जाती है. लिहाजा जब तक ये मामले सुलझ नहीं जाते, प्रत्यर्पण की संभावना कम ही है."
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्टडीज ऐंड फॉरेन पॉलिसी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. हर्ष पंत की राय में अभियोग का बड़ा महत्व इस बात में है कि इसमें विवाद को अब कैसे दिखाया जाता है. उनका मानना है कि अमेरिका ने ऐसे नेटवर्क के जरिए आरोप लगाकर कूटनीति की एक राह बना दी है जिसे वॉशिंगटन और नई दिल्ली दोनों अपना दुश्मन मानते हैं. वे कहते हैं, “अमेरिकी न्याय विभाग ने एक ऐसे मुद्दे पर भू-राजनैतिक तापमान को बहुत अच्छे से कम कर दिया है, जिसके मनमुटाव का बड़ा कारण बनने की आशंका थी.”

अमेरिका का आरोप-पत्र
ऑपरेशन हार्ड बॉल ने भारत के तीन आपराधिक गिरोहों पर निशाना साधा
> भारत के तीन आपराधिक गिरोहों को निशाना बनाते हुए अमेरिका में 37 आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए गए हैं. इन तीन गिरोहों में लॉरेंस बिश्नोई का संगठित आपराधिक गिरोह, भगवानपुरिया गैंग और ढांडा नेटवर्क शामिल है
> इस मामले में अमेरिका, कनाडा और स्पेन में गिरफ्तारियां की गई हैं. 24 संदिग्ध लोग हिरासत में हैं, जबकि 10 लोग अभी भी फरार हैं
> लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर भारत और विदेश से वैश्विक आपराधिक नेटवर्क चलाने और खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं
> इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 1,000 किलोग्राम कोकीन, 1 किलोग्राम हेरोइन, नकदी और हथियार जब्त किए गए
निज्जर की हत्या का विवाद
उसकी हत्या राजनयिक विवाद का बड़ा मसला बन गई. निज्जर हत्या विवाद से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं..
18 जून, 2023: खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई. उसे 2020 में यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था
18 सितंबर: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस हत्या में भारतीय एजेंटों की 'संभावित भूमिका' के विश्वसनीय आरोपों की जांच कर रही हैं. भारत ने इस दावे को खारिज किया
2023-24: इन आरोपों से राजनयिक विवाद हुआ. दोनों देशों ने एक-दूजे के राजनयिकों को निष्कासित किया, व्यापार वार्ता एवं वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं
2024 के अंत में: अमेरिका ने गुरपटवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश मामले में रॉ के पूर्व अधिकारी विकास यादव और उसके सहयोगी निखिल गुप्ता पर अभियोग तय किए, जिससे निज्जर केस से संभावित जुड़ाव का संकेत मिला
जुलाई, 2026: ऑपरेशन हार्ड बॉल मं बिश्नोई, बराड़ एवं उनके गुर्गों पर निज्जर की हत्या का आरोप लगा

