
भारतीय शेयर बाजार के अब तक के इतिहास के दो सबसे बड़े आइपीओ—जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)—के ऐलान ने भारत की ग्रोथ स्टोरी में भरोसे को और मजबूत किया है. यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के साथ ही दुनिया के बाजारों ने संभलना शुरू कर दिया है. ये दोनों आइपीओ मिलकर लगभग 67,000 करोड़ रुपए जुटा सकते हैं, फंड जुटाने के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं और भारत के प्राथमिक बाजार में नई तेजी के झोंके ला सकते हैं.
मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की आइपीओ के जरिए 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना है. इससे लगभग 37,000 करोड़ रुपए जुटाए जाने की उम्मीद है. इस टेलीकॉम और डिजिटल दिग्गज कंपनी की वैल्यू 11—15 लाख करोड़ रुपए के बीच आंकी जा रही है. यह कंपनी भारत के सबसे बड़े डिजिटल ईकोसिस्टम की धुरी में से एक है.
इसमें रिलायंस जियो के जरिए टेलीकॉम कनेक्टिविटी से लेकर जियोसिनेमा और जियोसावन जैसे एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं तो जियोमार्ट के जरिए ऑनलाइन रिटेल और जियोपेमेंट्स बैंक और जियोपे के जरिए डिजिटल पेमेंट भी इसी से जुड़े हैं. साथ ही कारोबारों और दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए एंटरप्राइज सॉल्यूशन और 5जी टेक्नोलॉजी भी इसी का हिस्सा हैं.
इसके अलावा, एनएसई भी 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री के जरिए अपनी छह फीसद इक्विटी की पेशकश जनता को करेगा. इस इश्यू से लगभग 30,000 करोड़ रुपए जुटाए जाने की उम्मीद है जिससे भारत के सबसे बड़े मल्टी-एसेट एक्सचेंज की वैल्यू करीब 5.4 लाख करोड़ रुपए हो सकती है. ये दोनों ही पेशकश पहले के रिकॉर्डतोड़ आइपीओ को बड़ी सहजता से पार कर जाएंगी जिनमें 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपए और 2022 में एलआइसी के 21,000 करोड़ रुपए के निर्गम शामिल हैं (देखें अब तक के सबसे बड़े आइपीओ).
हालांकि, दोनों आइपीओ में बुनियादी तौर पर एक फर्क है. जियो प्लेटफॉर्म्स एक प्राथमिक निर्गम ला रहा है, जिसमें कंपनी के विस्तार के लिए रकम जुटाने के मकसद से नए शेयर जारी किए जा रहे हैं जबकि एनएसई की लिस्टिंग ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है, जिसके तहत मौजूदा शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे, जिससे उन्हें अपने निवेश से कमाई का मौका मिलेगा.
एनएसई के सबसे बड़े शेयरहोल्डरों में एलआइसी (10.7'हिस्सेदारी), मॉरिशस की अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (4.5'), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (4.4'), एसबीआइ कैपिटल मार्केट्स (4.3'), भारतीय स्टेट बैंक (3.2') और भारतीय साधारण बीमा निगम-जीआइसी (1.6') शामिल हैं. डी मार्ट रिटेल चेन के प्रमोटर और कारोबारी राधाकिशन दमानी लगभग 1.58'हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़े इंडिविजुअल शेयरहोल्डर हैं. इसके उलट, रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (आरआइएल) के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43'हिस्सेदारी है. बाकी 33.57'हिस्सेदारी कई वैश्विक निवेशकों के पास है, जिनमें मेटा (9.98'), गूगल (7.73'), सॉवरिन वेल्थ फंड और प्राइवेट इक्विटी फर्म शामिल हैं.
उन्नीस जून को आरआइएल की सालाना आम बैठक (एजीएम) में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस आइपीओ को अपने और परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बड़ी उपलब्धि बताया. उनके शब्द थे, ''रिलायंस का अपने शेयरधारकों के साथ गहरा और पवित्र रिश्ता है, जो गर्व, भरोसे, सम्मान और साझा वृद्धि पर टिका है.'' उन्होंने यह भी बताया कि उनके बच्चे—आकाश, ईशा और अनंत—जियो आइपीओ की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं.
धन जुटाने से कहीं ज्यादा
रकम जुटाने के अलावा इन दोनों के शेयर बाजार में आने से भारत के पूंजी बाजार की तस्वीर बदल सकती है. जियो की सफल लिस्टिंग से यह तय होगा कि आरआइएल की डिजिटल परिसंपत्तियों का सार्वजनिक बाजार मूल्यांकन कितना पारदर्शी है. साथ ही, यह भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल और एआइ अर्थव्यवस्था के लिए अहम बेंचमार्क भी बनेगा, जिससे और भी टेक्नलॉजी कंपनियों और स्टार्टअप फर्मों को जनता से रकम जुटाने के लिए बाजार में आने का प्रोत्साहन मिलेगा.
एनएसई की लिस्टिंग का महत्व अलग तरह का है. अनुबंधों के सौदों के लिहाज से यह दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंजों में से एक है. लंबे समय से प्रतीक्षित इसके निर्गम से इसका संचालन बेहतर होने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही, देश के वित्तीय बाजार की धुरी इस संस्थान में आम जन का स्वामित्व बढ़ेगा यानी लोग इसमें हिस्सेदार बन सकेंगे.
इन आइपीओ के आने का समय भी महत्वपूर्ण है. 2026 की पहली छमाही सुस्त रही है. अब इन दो बड़ी लिस्टिंग को आइपीओ के व्यापक बाजार के लिए बड़ा तारणहार माना जा रहा है. अगर ये सफल रहते हैं, तो उन बड़े आइपीओ के लिए दरवाजा खुल सकता है जिन्हें वैश्विक अस्थिरता के कारण टाल दिया गया. इतनी भारी-भरकम राशि की लिस्टिंग से बाजार में तरलता भी बढ़ती है, बड़े वैश्विक संस्थागत निवेशक आकर्षित होते हैं और परिपक्व वित्तीय बाजार के तौर पर भारत की स्थिति मजबूत होती है.
कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं, ''जब बड़े आइपीओ आते हैं, तो वे या तो बाजार को उछाल देते हैं या फिर निढाल कर देते हैं.'' वे जून 2003 में आए मारुति उद्योग लिमिटेड (अब मारुति सुजुकी) के आइपीओ की मिसाल देते हैं, जिसने बड़ी संख्या में निवेशकों को प्राइमरी और सेकंडरी बाजार की तरफ खींचा. उनके मुताबिक, ऐसे बड़े आइपीओ भी आए हैं जिन्होंने 'मार्केट को नीचे गिराया है'.
उनका इशारा 2021 में आए पेटीएम के महंगे आइपीओ की तरफ था, जिसका लिस्टिंग के बाद खराब प्रदर्शन रहा और उसके बाद आए कई आइपीओ के लिए उत्साह फीका पड़ गया. वे कहते हैं, ''बड़े आइपीओ की यह जिम्मेदारी है कि वे सही कीमत तय करें.''
शाह का मानना है कि अभी समय सही है. वे कहते हैं, ''विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) की ओर से बहुत ज्यादा बिकवाली हो रही है. अगर कीमत ठीक से तय की जाए, तो इन आइपीओ से विदेशी निवेशकों की निकासी पर विराम लग सकता है और निश्चित ही आगे और भी कंपनियां आइपीओ लाने की तैयारी कर सकती हैं.''
बाजार सूत्रों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स के अपने शेयरों की कीमत भारती एयरटेल के मुकाबले कम रखने की संभावना है. भारती एयरटेल का शेयर 30 जून को बीएसई पर 1,852 रुपए पर कारोबार कर रहा था. एनएसई के मामले में बाजार के एक सूत्र ने कहा कि मूल्यांकन ''नए आने वाले, मौजूदा और बाहर जाने वाले शेयरधारकों के लिए सही होना चाहिए.''
बाजार नियामक सेबी के पास जमा किए गए जियो के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, इस इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल 'कुछ कर्ज' चुकाने और 'सामान्य कंपनी काम काज' के लिए किया जाएगा. वित्त वर्ष '26 के आखिर तक कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों पर लगभग 71,529 करोड़ रुपए का कर्ज बाकी था.
दाखिल मसौदे में यह बताया गया है कि टेलीकॉम एक ऐसा बिजनेस है जिसमें बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है; इसमें नेटवर्क बढ़ाने, टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने और क्षमता विस्तार के लिए लगातार निवेश करना पड़ता है. इसमें कहा गया है कि भविष्य की विकास योजनाओं के लिए कई तरह के फंडिंग सोर्स तक लगातार पहुंच की जरूरत होगी. एनएसई की पेशकश ओएफएस (ऑफर फॉर सेल) के रूप में है, इसलिए इससे एक्सचेंज को कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी. पूरी रकम उन इंस्टीट्यूशनल और कॉर्पोरेट शेयरधारकों को मिलेगी जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं.

आकार का आधार
वित्तीय और परिचालन आंकड़े बताते हैं कि दोनों कंपनियों का अनुमानित वैल्युएशन इतना ज्यादा क्यों है. 31 मार्च तक जियो के 52.44 करोड़ ग्राहक थे; वित्त वर्ष 2026 के दौरान उसने 3.62 करोड़ नए ग्राहक जोड़े, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी 39.2 फीसद हो गई. भारती एयरटेल के 46.9 करोड़ ग्राहक और 37.8 फीसद बाजार हिस्सेदारी थी, जबकि वोडाफोन आइडिया 20.5 करोड़ ग्राहकों और 15.6 फीसद भागीदारी के साथ काफी पीछे तीसरे स्थान पर थी. कंपनी ने कामकाज से 1.47 लाख करोड़ रुपए का राजस्व और 30,049 करोड़ रुपए का कर बाद मुनाफा कमाया.
एनएसई का आकार भी बहुत बड़ा है. आइडीबीआइ कैपिटल की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च तक एक्सचेंज के पास 25.36 करोड़ रजिस्टर्ड इन्वेस्टर अकाउंट, 12.91 करोड़ यूनीक रजिस्टर्ड इन्वेस्टर और 1,325 ट्रेडिंग सदस्य थे. उसके प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध 2,978 कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 411.25 लाख करोड़ रुपए था. वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के अनुसार अनुबंधों की खरीद-फरोख्त के लिहाज से एनएसई लगातार सात साल से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बना हुआ है. दुनिया भर में होने वाले इक्विटी के नकदी सौदों में उसकी हिस्सेदारी 11.38 फीसद है जबकि इक्विटी डेरिवेटिव अनुबंधों के सौदों में 51.18 फीसद. वित्त वर्ष 2026 में एक्सचेंज ने परिचालन से 16,601.3 करोड़ रुपए का राजस्व कमाया तो टैक्स के बाद 10,302 करोड़ रुपए का लाभ दर्ज किया.
असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये आइपीओ सिर्फ रिकॉर्ड बुक में नया नाम लिखाएंगे या भारत के पूंजी बाजार के लिए नया दौर शुरू करेंगे.

