सोनाली आचार्जी
कुछ महीने पहले, 17 जनवरी को, महामारी की मार्च, 2020 में शुरुआत के बाद से भारत में एक दिन में कोविड-19 संक्रमणों की सबसे कम संख्या दर्ज की गई थी. बहुत से लोग इसे महामारी के तीन लंबे और चुनौतीपूर्ण वर्षों के बाद इसके अंत का संकेत मान रहे थे. हालांकि, महामारी का अंत अब एक बार फिर से बहस का विषय लगता है, क्योंकि वायरस के नए वैरिएंट एक्सबीबी.1.16 ने भारत में पांव फैलाने शुरू किए हैं. देश में जनवरी में इस वैरिएंट का पहली बार पता चलने के बाद से लेकर अब तक 610 मामले दर्ज किए गए है. कोविड-19 मामलों की कुल संख्या तेजी से बढ़ी है. 26 मार्च को, भारत में 1,890 नए मामले दर्ज किए गए, जो 149 दिनों में सबसे अधिक थे.
कोविड के सक्रिय मामलों ने चार महीनों में पहली बार 10,000 का आंकड़ा पार किया है और 23 मार्च को समाप्त सप्ताह में औसत दैनिक मामले 966 दर्ज किए गए, जो 3 मार्च को समाप्त सप्ताह में 313 के दैनिक औसत से तीन गुना अधिक है. 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10 प्रतिशत या उससे अधिक की साप्ताहिक जांच सकारात्मकता दर या टेस्ट पॉजिटिव रेश्यो (टीपीआर) वाले जिलों की संख्या—विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 5 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से दोगुनी—बढ़कर 32 हो गई है, जो दो सप्ताह में 3.5 गुना वृद्धि दर्शाती है. इसके अतिरिक्त, 25 मार्च को समाप्त सप्ताह में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 63 जिलों में टीपीआर 5-10 प्रतिशत था, जो दो सप्ताह पहले आठ राज्यों के 15 जिलों की तुलना में बड़ी वृद्धि है. आंकड़ों ने देश में खतरे की घंटी बजा दी है.
भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्शियम (इंसाकॉग) के अध्यक्ष एन.के. अरोड़ा कहते हैं, ''लापरवाही बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. हम स्थिति का बारीकी से आकलन कर रहे हैं और सतर्क हैं.'' लेकिन आशावादी होने के कारण भी मौजूद हैं. हालांकि एक्सबीबी.1.16, ओमिक्रॉन के बीए.2.10.1 और बीए.2.75 सब-वैरिएंट का एक पुन: संयोजक है और अत्यधिक संक्रामक है- इंसाकॉग द्वारा रिपोर्ट किए गए एक्सबीबी.1.16 मामलों की कुल संख्या 23 मार्च को एक सप्ताह से भी कम समय में 349 से बढ़कर 610 हो गई-लेकिन अब तक के अधिकांश संक्रमण नियंत्रण में रहे हैं. जानी-मानी वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कंग कहती हैं, ''भारतीयों में हाइब्रिड इम्युनिटी होती है, जो बहुत असरदार है.
हमने अतीत में संक्रमण के साथ टीका प्रतिरक्षा के माध्यम से स्वाभाविक रूप से प्रतिरक्षा प्राप्त की है. कोविड संक्रमण मामलों की दैनिक संख्या में छोटी वृद्धि से घबराने की कोई बात नहीं है.'' गुरुग्राम स्थिति मेदांता अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विकास देसवाल कहते हैं, ''इस (एक्सबीबी.1.16) वैरिएंट से उन रोगियों में गंभीर बीमारी होने की संभावना नहीं है जिन्हें टीका लगाया गया है या जो पहले से किसी अन्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं.''
टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स ऐंड सोसाइटी के निदेशक राकेश मिश्रा का मानना है कि लगातार उत्परिवर्तित ओमिक्रॉन नए सब-वैरिएंट्स को जन्म देना जारी रख सकता है जिनमें संक्रमण की अधिक क्षमता हो सकती है लेकिन उनके डेल्टा वैरिएंट जैसे गंभीर होने की आशंका नहीं है जिसने 2021 में लाखों लोगों की जान ले ली थी. वैरिएंट भी कोई नया या असामान्य लक्षण पैदा नहीं कर रहा है, और ज्यादातर लोग केवल बुखार, खांसी, गले में खराश और नाक बहने का अनुभव करते हैं.
मैक्स हेल्थकेयर के आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ और चिकित्सा निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा कहते हैं, ''मरीजों को खुद को अलग-थलग रखना चाहिए, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए, आराम करना चाहिए और बुखार और शरीर में दर्द के लिए पैरासिटामोल लेना चाहिए. हल्के लक्षणों वाले मामलों में ऐंटीबायोटिक या ऐंटीवायरल की भूमिका नहीं है, और यह केवल उन लोगों के लिए है जिनमें जटिलताओं या गंभीर बीमारी पनपने का जोखिम उच्च है. उनके लिए डॉक्टर ऐंटीवायरल दवाओं पर विचार कर सकते हैं.''
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लोग अपनी सावधानियों को कम कर सकते हैं. बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से संक्रमित या खराब रोग-प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि उनके संक्रमित होने के साथ गंभीर बीमारी पनपने का अधिक खतरा होता है. डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, ''कोविड-उपयुक्त सावधानियों का गंभीरता से पालन होना चाहिए. मास्क पहनना चाहिए, भीड़ वाली जगहों से बचना चाहिए.''

