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डार्क मोड

बस दो हाथ की लंबी दूरी

पीछा शुरू होने के बाद से ही अमृतपाल की तस्वीरें लगातार सोशल मीडिया पर लीक हो रही हैं

तलाश जारी: वारिस पंजाब दे का मुखिया अमृतपाल सिंह
तलाश जारी: वारिस पंजाब दे का मुखिया अमृतपाल सिंह
अपडेटेड 3 अप्रैल , 2023

एक भगोड़ा न सिर्फ पकड़ में नहीं आ रहा था, बीच-बीच में नुमायां होते हुए ताने देकर वह चुटकी और काट जाता था. खालिस्तान का झंडा उठाने वाले अमृतपाल सिंह का 30 मार्च तक यह खेल जारी था. हालांकि, यह संभावना जताई जा रही थी कि या तो वह गिरफ्तार होने वाला है या आत्मसमर्पण करने वाला है. कुछ भी संभव है. पर फिलहाल तो वह पुलिस के साथ तू डाल-डाल, मैं पात-पात खेल रहा है. 27 तारीख की सुबह अमृतपाल और उसके साथी पपनप्रीत सिंह की सेल्फी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आई. अमृतपाल ने अपनी सामान्य सीधी-सादी वेशभूषा के बजाए पूरी बांहों की स्वेट शर्ट और रे-बैन एविएटर चश्मा पहना था और बेतरतीब ढंग से मरून पगड़ी बांध रखी थी.

कैन से एनर्जी ड्रिंक के सिप लेते हुए दोनों इस बात से बेपरवाह नजर आ रहे थे कि वे पंजाब पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में नंबर 1 पर हैं और पुलिस बल और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भी पूरी ताकत उन्हें और उनके संगठन वारिस पंजाब दे के सदस्यों को पकड़ने के लिए झोंक दी गई है. दो दिन बाद वह एक कदम और आगे निकलकर एक वीडियो जारी किया. उसके घर पर ही उसे गिरफ्तार न करने के लिए पुलिस की खिल्ली उड़ाते हुए उसने अपने संगठन वारिस पंजाब दे के खिलाफ कार्रवाई को पूरी सिख बिरादरी पर ज्यादती बताया. उसने अकाल तख्त के जत्थेदार से 13 अप्रैल को बैसाखी पर सिख धर्म की सभी संगतों का सम्मेलन यानी सरबत खालसा की मांग की. सरेंडर की तो उसकी कोई मंशा ही नहीं दिखी. यह एक तरह से पुलिस की नाक में उंगली थी क्योंकि उसके अफसर तो सरेंडर की ही बात करते आ रहे थे.

सच पूछिए तो किसी को अंदाज न था कि यह सेल्फी कब ली गई है या यह वीडियो कौन डाल रहा है. बस सुरागों के टुकड़े जोड़े गए थे: चाहे वह पुलिस की लीक की जा रही धुंधली-सी सीसीटीवी फुटेज हो, जिसमें वह अमृतपाल के जगह-जगह पर दिखने का दावा कर रही थी, या फिर यह खबर कि केंद्रीय एजेंसियों ने दोनों के ब्यौरे नेपाल को दे दिए हैं. इससे यह भी अंदेशा बन रहा था कि अमृतपाल सीमा पार कर गया है और नेपाल से ब्रिटेन जाने की फिराक में है.

बड़ी कार्रवाई दरअसल अमृतसर में 18 मार्च को जी-20 की कुछ बैठकें हो जाने के बाद शुरू हुई. और अमृतपाल व उसके सहयोगियों पर वैमनस्य फैलाने, हत्या का प्रयास करने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने सहित गंभीर धाराओं सहित कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा दिया गया. अलगाववादियों के नेटवर्क को 'बिना एक फायर किए' ध्वस्त करने के बाद फूली नहीं समा रही पुलिस और कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव पर लापता अमृतपाल भारी पडऩे लगा.

दबाव कई मोर्चों पर है. 27 मार्च को सर्वोच्च सिख संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अल्टीमेटम जारी करके पंजाब सरकार को चेतावनी दी कि इस मामले में पकड़े गए हर सिख नौजवान को तत्काल रिहा नहीं किया जाता तो बात बिगड़ सकती है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद मायूस चल रहे शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के प्रमुख सुखबीर बादल ने पकड़े गए लोगों को कानूनी मदद का वादा किया. इसने बंदी सिंहों यानी आतंकवाद के पुराने मामलों के कैदियों के मामले को भी सामने लाकर मुद्दे को जज्बाती बना दिया. अमृतपाल फरवरी के आखिरी हफ्ते में अखबारों के पहले पन्ने की खबर बना, जब उसने और उसके समर्थकों ने अमृतसर के सरहदी कस्बे अजनाला में अपहरण के आरोपी अपने साथी को छुड़ाने के लिए पुलिस थाने को घेर लिया. टकरावों के बाद अमृतपाल के साथी को छोड़ दिया गया और पुलिस बल पलटवार भी नहीं कर पाया. इस सबसे पंजाब पुलिस की बहुत किरकिरी हुई.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 मार्च को भगवंत मान की अगुआई वाली सरकार को सख्त कदम उठाने का इशारा किया. शाह के मंत्रालय ने दंगा-विरोधी रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ) और अर्धसैनिक बलों की 18 टुकड़ियां (19,000 सुरक्षाकर्मी) भी भेजीं. विदेशी खुफिया शाखा रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (आरएडब्ल्यू या रॉ), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) ने खुफिया सहायता मुहैया की. मामले में साजिश सूंघने वालों का कहना है कि अमृतपाल को गिरफ्तार करने की पंजाब पुलिस की मंशा ही नहीं थी.

उसे डर था कि इससे वह ''लोगों के बीच ज्यादा बड़ी हस्ती'' बन जाएगा. कार्रवाई से जुड़े एक शीर्ष पुलिस अफसर इसे खारिज करते हुए कहते हैं कि खुफिया अफसर पीछे लगे थे और पुलिस ने जालंधर में मेहतपुर गांव के नजदीक जाल बिछा रखा था, जहां उसके प्रवचन का कार्यक्रम था. पर वह भाग निकला और सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि हाइवे के बजाए लिंक रोड के जरिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश या शायद नेपाल भाग गया. लेकिन जब पंजाब में तीन दिनों के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया तो राज्य की सीमाएं क्यों सील नहीं की गईं? अफसरों के पास कोई जवाब नहीं. इस बीच एक साथ मारे गए छापों में पूरे पंजाब से 353 लोग पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए (चौतरफा आलोचना के बाद इन लोगों में से 197 को छोड़ दिया गया). 

अमृतपाल का आना, उभरना और भाग जाना सोशल मीडिया की परिघटना ज्यादा रहा है. उसकी सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने वाले पंजाब के एक पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी इंडिया टुडे को बताते हैं कि उसके ज्यादातर फॉलोअर पश्चिम के थे. कार्रवाई शुरू होने पर भी बड़ी प्रतिक्रियाएं ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के खालिस्तान समर्थकों की तरफ से आईं. सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि पिछले अगस्त में भारत आने से पहले अमृतपाल को ब्रिटेन स्थित खालिस्तानी एक्टिविस्ट अवतार सिंह खांडा ने ट्रेनिंग दी थी. उसके सोशल मीडिया मैनेजर गुरिंदरपाल औजला को अमृतसर हवाई अड्डे से पकड़ा गया. वह भी खांडा के संपर्क में था. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ब्रिटेन में ''शरण मांगने'' वाला खांडा 19 मार्च को लंदन में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हुई हिंसा के पीछे था.

भारत में अमृतपाल को दिमाग देने वाले दो लोगों में से एक कट्टरपंथी कुलवंत सिंह राउके को पकड़ लिया गया है, जबकि पपनप्रीत उसके साथ है. पंजाब राज्य बिजली निगम में कैशियर कुलवंत पर एनएसए के तहत आरोप लगाए गए हैं और असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया है. पंजाब पुलिस ने सात लोगों पर एनएसए लगाया है और उनमें से पांच को डिब्रूगढ़ ले जाया गया. इनमें अमृतपाल का चाचा हरजीत सिंह, अभिनेता से उसके संगठन का फाइनेंसर बना दलजीत सिंह कल्सी, करीबी साथी भगवंत सिंह, गुरमीत सिंह और भगवंत 'प्रधानमंत्री' बाजेके शामिल हैं. बाजेके सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय है, हालांकि उसके परिवार का कहना है कि वह ''दिमागी तौर पर बीमार'' है.

मगर अफसरों का कहना है कि मामला कहीं ज्यादा संजीदा है. उनका कहना है कि अमृतपाल निजी सेना बना रहा था और रंगरूटों की ट्रेनिंग के लिए उसने फायरिंग रेंज भी बना ली थी. वह अपने गांव जल्लूपुर खेड़ा में नशामुक्ति केंद्र चला रहा था. वहां आने वाले कई नौजवानों को 'आनंदपुर खालसा फोर्स' या एकेएफ में भर्ती किया जा रहा था. उन्हें यह भी शक है कि वह आत्मघाती दस्ते भी तैयार कर रहा था. यह खुलासा 25 मार्च को खन्ना से पकड़े गए तेजिंदर गिल या गोरखा बाबा ने किया. नशे के लती रहे इस शराब तस्कर ने अमृतपाल के नशामुक्ति केंद्र पर खुद को 'शुद्ध' किया था. हालांकि अब तक बरामद हथियारों से इस थ्योरी की तस्दीक नहीं होती. दर्जनों छापों में महज 10 हथियार मिले, जिनमें कारतूसों के अलावा .315 बोर की एक राइफल, .12 बोर की छह राइफलें और .32 बोर का रिवॉल्वर शामिल है. असल में अफसरों की तरफ से आ रहीं दलीलें गले नहीं उतरतीं. अमृतपाल के वकील ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की, जिसमें कहा गया है कि पूरा मामला ढकोसला है और वह 18 मार्च से गैरकानूनी हिरासत में है. 

सचाई जो हो, अच्छा यही होगा कि अमृतपाल को जल्द से जल्द पकड़कर अदालत में पेश किया जाए. यह अच्छा शगुन नहीं कि अलगाववादी बनने पर आमादा एक शख्स सरकार की समूची ताकत के लिए इतने लंबे वक्त तक इस कदर मुश्किलें और परेशानियां पैदा कर दे.

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