मार्च की 13 तारीख को मुंबई पुलिस के अफसर नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस के मालाबार हिल स्थित आवास पर उस डेटा लीक केस के सिलसिले में उनसे पूछताछ करने पहुंचे जिसने 2021 में महाराष्ट्र में सनसनी पैदा कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता फड़नवीस के खिलाफ महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार की ओर से यह पहली जांच शुरू की गई है. इसे प्रदेश के सत्ताधारी गठबंधन के मंत्रियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के छापों के खिलाफ कथित रूप से बदले की कार्रवाई भी बताया जा रहा है.
फड़नवीस की दहलीज पर पुलिस का पहुंचना केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की उस जांच की प्रतिक्रिया माना जा रहा है, जिसमें उसने मुंबई के नए पुलिस कमिशनर संजय पांडे के खिलाफ जांच शुरू की है. पांडे ने 28 फरवरी को ही पुलिस कमिशनर का अपना कामकाज संभाला है. छह घंटे की पूछताछ में सीबीआइ का अमला संजय पांडे से यह जानना चाहता था कि उन्होंने अपने पूर्ववर्ती परमबीर सिंह से आखिर क्यों वह पत्र वापस लेने के लिए कहा था जिसे उन्होंने मार्च 2020 को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा था. उस पत्र में परमबीर सिंह ने शिकायत की थी कि राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पुलिस से मुंबई के बार और रेस्तरां मालिकों से 100 करोड़ रु. वसूलने के लिए कहा है.
फड़नवीस और संजय पांडे का झगड़ा दरअसल केंद्र और राज्य के बीच टकराव का ही अगला चरण है. ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां एमवीए के 10 नेताओं पर छापे मार रही हैं, लिहाजा राज्य ने भी फैसला लिया कि जवाबी कार्रवाई जरूरी है. फड़नवीस ने अब आरोप लगाया है कि सरकार उनसे आरोपी की तरह पेश आ रही है जबकि मामले में वे व्हिसिलब्लोअर हैं. उन्होंने कहा, ''मैंने कोई गोपनीय डेटा लीक नहीं किया. मेरे पास जो भी साक्ष्य थे वे मैंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के हवाले कर दिए हैं क्योंकि आइपीएस अफसर उन्हीं के मातहत आते हैं.''
ये मामले उन दो एफआइआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) से जुड़े हैं जो 2 मार्च को सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की मौजूदा जॉइंट कमांडेंट रश्मि शुक्ला के खिलाफ दर्ज किए गए हैं. आरोप है कि उन्होंने साल 2019 में राज्य खुफिया विभाग की प्रमुख रहते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले समेत कुछ नेताओं के फोन कॉल्स टैप कराए थे. दिलचस्प बात यह है कि वह फड़नवीस ही थे जिन्होंने टैप फोन संवादों की बात सबसे पहले मार्च 2021 में की थी. उन्होंने हार्ड डिस्क में 6 जीबी डेटा केंद्रीय गृह मंत्रालय में जमा कराया और आरोप लगाया था कि एमवीए के नेता पुलिस पोस्टिंग रैकेट में शामिल हैं. यह बात उस रिपोर्ट पर आधारित थी जो शुक्ला ने राज्य गृह विभाग को जुलाई 2020 में सौंपी थी. फड़नवीस ने कहा कि उन्होंने टैप फोनों का ब्योरा मीडिया को नहीं दिया.
फिलहाल, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक मनी लॉन्ड्रिंग के केस में न्यायिक हिरासत में हैं. नवाब मलिक को ईडी ने 23 फरवरी को कथित मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया. साल 2005 के एक जमीन सौदे के मामले में मलिक मुख्य आरोपी हैं. इस कथित सौदे में उन्होंने मुंबई के कुर्ला में भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की दिवंगत बहन हसीना पारकर के दो सहायकों से 75 लाख रुपए (बाजार कीमत 300 करोड़ रु.) में तीन एकड़ का एक प्लॉट खरीदा था. मलिक की कंपनी सोलारिस इनवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन कथित तौर पर पारकर के बॉडीगार्ड और ड्राइवर सलीम पटेल और 1993 में मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले के सजायाफ्ता सरदार शाहवली खान से खरीदी थी.
रिमांड अर्जी में ईडी ने कहा कि मलिक ने पटेल को 55 लाख रुपये नकद दिए, जिसका इस्तेमाल दाऊद ने साल 2005 और 2012 के बीच भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए किया. मगर 3 मार्च को एजेंसी ने रुख बदलते हुए कहा कि आरोपपत्र टाइप करने में गलती हो गई—पटेल को दी गई रकम असल में 5 लाख रुपए ही थी. गठबंधन की भागीदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोला और कहा कि सियासी फायदे के लिए ईडी का दुरुपयोग किया जा रहा है. मलिक का बचाव करते हुए पवार ने कहा, ''कोई आदमी मुसलमान है तो उसे दाऊद से जोड़ देना बहुत आसान है.''
ईडी ने यह कार्रवाई उस एफआइआर की जांच को आगे बढ़ाते हुए की जो दूसरी केंद्रीय एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने इस साल जनवरी में दाऊद और उसके साथियों के खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज की थी. ईडी ने मुंबई में इकबाल कासकर (दाऊद का भाई) और सलीम 'फ्रूट' कुरैशी (छोटा शकील का साला, दाऊद का दाहिना हाथ) के 10 ठिकानों पर छापे मारे. एजेंसी ने दिवंगत हसीना पारकर, दाऊद और इकबाल मिर्ची, छोटा शकील और जावेद चिकना सरीखे उसके साथियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज किया. उसका कहना है कि उसके पास मनी लॉन्ड्रिंग, नशीली दवाओं की तस्करी और मुंबई से सटे नागपाड़ा और भिंडी बाजार में जमीन-जायदाद की बिक्री से हासिल काली कमाई से जुड़े हवाला लेन-देन के सबूत हैं.
मलिक पर लगे आरोपों के राजनीतिक परिणाम भांपते हुए एमवीए ने बदला लेने की ठानी. और, उसके निशाने पर आए फड़नवीस. इसका दूसरा संकेत तब मिला जब 28 फरवरी को संजय पांडे को मुंबई का पुलिस कमिशनर नियुक्त किया गया. संजय पांडे का ट्रैक रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है, कोई उन पर उंगली भी नहीं उठा सकता, पर ज्यादा अहम यह कि फड़नवीस के तीन पसंदीदा बड़े अफसरों—रश्मि शुक्ला, मुंबई के पूर्व कमिशनर परमबीर सिंह और एडीजीपी देवेन भारती—के खिलाफ जांच उनके हाथ में थी. परमबीर सिंह जब बगैर सूचना दिए 289 दिनों तक काम पर नहीं आए तो अंतरिम डीजीपी की हैसियत से संजय पांडे ने ही उन्हें मुअत्तल करने की सिफारिश की थी.
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार राज्य को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है. एक कार्यक्रम में उन्होंने पूछा, ''केंद्रीय एजेंसियों के पास महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बाहर कोई काम नहीं है क्या?'' फड़नवीस ने विधानसभा में 8 मार्च को कुछ वीडियो टेप प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि एमवीए ने उन्हें और भाजपा नेताओं को झूठे केसों में फंसाने की साजिश रची है. लगता है आरोप-प्रत्यारोप का दौर लंबा चलेगा.

