
करीब तीस साल के राधे पासवान दरभंगा एयरपोर्ट की लॉबी में बैठकर अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं. उनकी सीट के पास उनका एक थैला और एक पुराना-सा बैग रखा है. मधुबनी जिले के खजौली गांव के रहने वाले राधे दोपहर ढाई बजे की फ्लाइट से मुंबई जा रहे हैं, जहां वे एक मैडम के घर कुक हैं. वे पहले ट्रेन से आया-जाया करते थे, जिसमें तीन दिन लग जाते थे. अब मैडम फ्लाइट का टिकट दिला देती हैं, तो घर से दोपहर में निकले और शाम होते-होते मैडम के घर हाजिर. वे पहले छुट्टी में आते थे तो आने-जाने में ही सारा वक्त खप जाता था. अब ऐसा नही है. यह सब बताते हुए उनके चेहरे पर अलग तरह का आत्मविश्वास दिख जाता है. वे पीएम नरेंद्र मोदी की 'हवाई चप्पल में हवाई यात्रा' के वादे वाली उड़ान योजना के रोल मॉडल लगते हैं. इस एयरपोर्ट पर उनके जैसे कई मजदूर और कामगार नजर आ जाते हैं. कोई दिल्ली जा रहा है, तो कोई मुंबई या अहमदाबाद.
वैसे एयरफोर्स स्टेशन के कैंपस में विकसित हुए दरभंगा एयरपोर्ट के पास न तो अभी पार्किंग की सुविधा है, न गेट के बाहर पैसेंजर के बैठने की व्यवस्था. मुसाफिर अपनी गाड़ी एयरपोर्ट के सामने हाइवे के किनारे पार्क करते हैं और मुख्य द्वार के बाहर खुले में जैसे-तैसे समय काटते हैं, लाउंज में प्लास्टिक की साधारण कुर्सियां लगी हैं. कुल मिलाकर ऐसा लगता है कि जैसे-तैसे यह एयरपोर्ट शुरू कर दिया गया हो. यहां के स्टेशन डायरेक्टर मनीष कुमार कहते हैं, ''चूंकि फिलहाल यह हवाई अड्डा वायुसेना के परिसर में है और जगह की कमी है, इसलिए हम चाह कर भी कुछ कर नहीं पा रहे.'' वैसे असुविधाओं के बावजूद इन दिनों इस एयरपोर्ट की कामयाबी के चर्चे हर जगह हैं.

आठ नवंबर, 2020 को इस एयरपोर्ट से हवाई उड़ान शुरू हुई थी. 13 फरवरी, 2022 तक यहां से सात लाख से अधिक यात्री उड़ान भर चुके हैं. यहां से दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरू के लिए रोज दो-दो और कोलकाता, हैदराबाद के लिए एक-एक विमान उड़ान भरते हैं और वापस आते हैं. राजधानी पटना के मुकाबले दरभंगा का किराया हमेशा डेढ़ गुना अधिक होता है, फिर भी यात्री यहां से उड़ान भरना पसंद करते हैं. दरअसल, दूर-दराज से पटना जाने का मतलब है, ज्यादा खर्च और समय की बर्बादी. मनीष कहते हैं, ''यात्रियों की इसी चाहत से दरभंगा एयरपोर्ट आज उड़ान स्कीम के तहत शुरू हुए 63 हवाई अड्डों में नंबर वन हो गया है. बिहार के 17 जिलों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के भी यात्री यहां आते हैं.''
अब पूर्णिया मांगे एयरपोर्ट
दरभंगा एयरपोर्ट की इस कामयाबी ने बिहार के अन्य शहरों के लोगों में भी एयरपोर्ट का सपना जगा दिया है. कम से कम चार शहरों, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, रक्सौल और पूर्णिया के युवा लगातार एयरपोर्ट के लिए आंदोलन कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रहे हैं. इनमें सबसे जोरदार कैंपेन इन दिनों पूर्णिया में हो रहा है. पूर्णिया और कटिहार के सांसद लोकसभा में पूर्णिया में एयरपोर्ट शुरू करने की मांग कर चुके हैं और हाल में उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर मांग पत्र भी सौंपा है.
दरअसल लंबे अरसे से पूर्णिया में हवाई सेवा शुरू करने की बात चल रही है. यहां वायुसेना का एयरपोर्ट पहले से चालू है, जिसके पास नौ हजार फीट लंबा रनवे है. वहां कुछ अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित कर इस एयरपोर्ट को नागरिक सेवा के लिए शुरू किया जाना है. इसके लिए 20.5 करोड़ रुपए भी जिला प्रशासन के खजाने में हैं. मगर भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ मामले अदालत में हैं, इसलिए वह काम आगे नहीं बढ़ रहा.
इस अभियान से जुड़े स्थानीय युवा विकास आदित्य कहते हैं, ''2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने सवा लाख करोड़ रुपए के पैकेज में बिहार में तीन हवाई अड्डों को शुरू करने की घोषणा की थी, इनमें पूर्णिया का नाम भी था. मगर सात साल बीतने के बाद भी यह मामला खटाई में है.'' इस इलाके से रोज सैकड़ों लोग फ्लाइट पकड़ने के लिए करीब 170 किमी का सफर तय कर पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट जाते हैं. करीब चार घंटे के सड़क के इस सफर में काफी ज्यादा टैक्सी किराया लग जाता है. यहां मखाना, मक्का और केले की काफी अच्छी फसल होती है. इनकी खरीदारी के लिए कंपनियों के लोग पूर्णिया आते हैं. मगर उन्होंने अपने स्थानीय दफ्तर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास सिलीगुड़ी में बना रखे हैं.
पूर्णिया में हेल्थ सेक्टर के विकास की भी बड़ी संभावना है. मगर आने-जाने की सुविधा न होने के कारण डॉक्टर यहां आ नहीं पाते. 2013 तक पूर्णिया एयरफोर्स स्टेशन के निदेशक रहे विश्वजीत कहते हैं, ''एक बार यहां रनवे तैयार हो जाए, फिर विमान कंपनियां खुद सेवा शुरू करने में दिलचस्पी लेंगी.''
भागलपुर के लोग भी लंबे अरसे से अपने शहर के हवाई अड्डे पर उड़ान सेवा शुरू करने की मांग करते रहे हैं. इसके लिए शहर के लोगों की कमेटी भी बनी. कमेटी ने पाया कि यहां से 12 सीट या 16 सीट वाला कोई छोटा प्लेन उड़ सकता है. 2013 में स्काई फिशर विमान का ट्रायल हुआ था, मगर बात आगे नहीं बढ़ी. फिर 2020 में चार्टर सेवा देने वाली हिमालयपुत्र एविएशन कंपनी ने रुचि दिखाई मगर रनवे दुरुस्त नहीं होने के कारण उसका ट्रायल नहीं हो सका. भागलपुर शहर के एयरपोर्ट का रनवे छोटा है. इसलिए पास के इलाके के गोराडीह में जमीन अधिग्रहित कर हवाई सेवा शुरू करने की भी बात चली है. मगर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पड़ोस में झारखंड के देवघर में एयरपोर्ट शुरू हो रहा है. लिहाजा नया एयरपोर्ट बनने पर भी कंपनियां भागलपुर में रुचि लेंगी, इस पर संशय है.
एयरपोर्ट से आई तरक्की
लगभग ऐसी ही मुश्किलें एयरपोर्ट बनने से पहले दरभंगा और आसपास के यात्रियों को होती रही हैं. मधुबनी के फुलपरास के रहने वाले राज झा एक बड़ी विज्ञापन कंपनी में कॉपीराइटर रह चुके हैं और इन दिनों अपने गांव में रूरल इकॉनामी में प्रयोग कर रहे हैं. वे कहते हैं, ''मेरे लिए दरभंगा में एयरपोर्ट होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि हेल्थ इमरजेंसी में मैं पैनिक नहीं होता. झट से फ्लाइट पर चढ़े और दिल्ली पहुंच गए. यहां से सफर करने वाले यात्रियों में बड़ी संख्या मरीजों और उनके परिजनों की रहती है.'' दरअसल पलायन की वजह से संपन्न हुआ बिहार का एक तबका अपने शहर से हवाई सेवा चाहता है. इसमें बड़े अधिकारी, प्राइवेट कंपनियों के मैनेजर से लेकर मजदूर तक हैं. वे देश भर में फैले हैं. अब जबकि हवाई सेवा सस्ती और सुलभ हो गई है तो वे अपना समय लंबी ट्रेन यात्राओं में खपाना नहीं चाहते. पहले वे पटना से आते-जाते थे, जिसमें काफी दिक्कतें होती थीं.
दरभंगा में हवाई सेवा शुरू होने से शहर की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है. एयरपोर्ट के आसपास की जमीन की कीमत आसमान छूने लगी है. होटल और टैक्सी सेवाओं का विस्तार हुआ है. राज झा कहते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि अब कॉमर्शियल कनेक्टिविटी बढ़ गई है. एक बार कार्गो सेवा शुरू हो जाए तो यहां से लीची, पान और मखाना जैसे उत्पाद आसानी से दूरदराज भेजे जा सकेंगे. बिहार में सामाजिक आर्थिक मसलों पर शोध करने वाली संस्था आद्री के प्रमुख प्रभात पी. घोष कहते हैं, ''निश्चित तौर पर उत्तर बिहार में विमान सेवा शुरू होने से लोगों की सहूलियत बढ़ेगी और परेशानियां घटेंगी. खासकर पढ़ने और नौकरी करने के लिए दिल्ली, बेंगलूरू और अन्य शहरों में जाने वाले युवाओं की. स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा.''

