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गोवाः खदबदाता असंतोष

गोवा में एक ओर जहां भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ गया है, वहीं राज्य में टीएमसी के आने से नए समीकरण उभर रहे

अभिनंदन पणजी में 14 अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत
अभिनंदन पणजी में 14 अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

अक्तूबर की 14 तारीख को गोवा के दौरे पर गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस बात की झलक मिल गई कि भाजपा की राज्य इकाई में कितनी गुटबाजी है. पणजी में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में राज्य के दो मंत्रियों—मौविन गोडिन्हो और विश्वजीत राणे—ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की मौजूदगी में उन पर अपनी सलाहों की अनदेखी करने की शिकायत गृह मंत्री से की. पार्टी की राज्य इकाई इस बात पर भी एकराय नहीं है कि क्या भाजपा को फरवरी 2022 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले उतरना चाहिए. सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्री की उस दिन की सलाह को एक पंक्ति में समेटा जाए तो उनका कहना था कि—यह सुनिश्चित करें कि गोवा के विपक्षी दल किसी कीमत पर एक साथ नहीं आ सकें.

राज्य में तीसरी बार सत्ता में वापसी के प्रयास में जुटी भाजपा को एक दशक की सबसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. विपक्ष नए सिरे से उठ खड़ा हुआ है और पार्टी के भीतर असंतोष है. कागजी तौर पर पार्टी मजबूत दिखती है जिसमें प्रमोद सावंत, चंद्रकांत कवलेकर, विश्वजीत राणे और माइकल लोबो जैसे प्रमुख नेता हैं. लेकिन, उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं पार्टी के लिए नुक्सानदायक साबित हो सकती हैं. कांग्रेस के दिगंबर कामत, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लुइजिन्हो फलेइरो, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के सुदीन धवलीकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विजय सरदेसाई जैसे प्रमुख नेताओं ने गोवा के चुनावी परिदृश्य को और जटिल बना दिया है.

सितंबर की शुरुआत में राज्य के सभी घरों तक 16,000 लीटर पानी मुफ्त में देने जैसी सुविधाएं पेश करते हुए भाजपा सरकार आत्मविश्वास से भरी दिख रही थी. मुख्यमंत्री सावंत ने भी लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए दौरा शुरू किया और 'सरकार तुमच्या द्वार (आपके दरवाजे पर सरकार)' कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी 40 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करते हुए सरकार की योजनाओं का प्रचार किया. इस दौरे में जनता की प्रतिक्रियाओं से वह इतने खुश थे कि उन्होंने भविष्यवाणी कर दी कि भाजपा अपने बूते बहुमत हासिल कर लेगी. लेकिन, उसके लगभग एक महीने बाद, वह चिंताग्रस्त हैं और इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि उनके सहयोगी लोबो तथा राणे जीत हासिल करने के मिशन में उनका समर्थन करेंगे या नहीं.

बंदरगाह मंत्री लोबो इस बात से नाराज हैं कि भाजपा आलाकमान उनकी पत्नी देलिला को सिओलिम से टिकट देने को तैयार नहीं है. वे कहते हैं, ''फिलहाल मैं कलंगुट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहा हूं. अगर (ऐसा नहीं होता है), तो लोग मेरी पार्टी को चुनेंगे.'' लोबो कम से कम तीन निर्वाचन क्षेत्रों-कलंगुट, सिओलिम और सालिगाओ में प्रभावशाली हैं. ये भी अटकलें हैं कि वह कांग्रेस में वापस लौट सकते हैं. इसी तरह विश्वजीत राणे अपनी पत्नी डॉ. दिव्या राणे के लिए पोरिएम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट पाने का प्रयास कर रहे हैं. अगर उन्हें टिकट नहीं मिला और वे निर्दलीय चुनाव लड़ती हैं, तो पार्टी को शर्मिंदा होना पड़ेगा.

राज्य में टीएमसी के आने से चुनावी परिदृश्य बदल रहा है. राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लुइजिन्हो फलेइरो 29 सितंबर को ममता बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए थे. इसके बाद 11 अक्तूबर को सांगुएम के निर्दलीय विधायक प्रसाद गांवकर ने भी घोषणा की है कि वह टीएमसी में शामिल होंगे. टीएमसी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने विजय सरदेसाई के सामने उनकी जीएफपी का तृणमूल में विलय करने प्रस्ताव रखा है. सरदेसाई इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

एमजीपी भी भाजपा का गढ़ समझे जाने वाले उत्तरी गोवा के 12 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतार रही है. एमजीपी नेता सुदीन धवलीकर ने 17 अक्तूबर को कहा था कि भाजपा के साथ गठबंधन आत्मघाती होगा. उन्होंने कहा, ''भाजपा ने हमें अतीत में तीन बार धोखा दिया है. हम अकेले ही लड़ेंगे.''

कांग्रेस की दावेदारी वास्तव में गंभीर न दिखने के साथ एमजीपी अकेले चुनाव लड़ने जा रही है और आम आदमी पार्टी के कोई बड़ा धमाका करने में विफल रहने के बाद अब विपक्ष की उम्मीदें टीएमसी-जीएफपी गठबंधन पर केंद्रित हैं. शाह को भी यह सब पता है और उन्होंने 14 अक्तूबर को घोषणा की कि वह एक पखवाड़े के बाद चुनावी रणनीति का मसौदा तैयार करने के लिए गोवा लौटेंगे.

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