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उत्तर प्रदेशः नए तेवर दिखाती कांग्रेस

प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस योगी सरकार के खिलाफ जिस तरह आक्रामक हुई है, उससे उत्तर प्रदेश में विपक्ष की राजनीति में बदलाव के मिले संकेत

यतीश लवानिया
यतीश लवानिया
अपडेटेड 16 जून , 2020

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की 20 मई को लखनऊ में गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर राज्य की योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ डिजिटल हल्ला बोल दिया. 21 मई की दोपहर 1 बजे प्रदेश में कुल 50 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फेसबुक लाइव के जरिए दूसरे प्रदेशों से वापस लौट रहे प्रवासी श्रमिकों की व्यथा व्यक्त की और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 30वीं पुण्यतिथि के मौके पर कांग्रेस कार्यकताओं ने योगी सरकार की नाकामियों को गिनाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

दरअसल, दूसरे प्रदेशों से प्रवासी मजदूरों के बड़ी संख्या में यूपी की ओर रुख करने और पूरी गृहस्थी लेकर पैदल अपने घरों को नापते तस्वीरों ने जैसे ही सुर्खियां बटोरी कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने प्रदेश सरकार पर ट्विटर से हमला बोल दिया था. तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे प्रियंका गांधी से बसों की सूची मांग रहे हैं लेकिन उन्होंने अभी तक नहीं दी है. इसके बाद प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, गृह, अवनीश कुमार अवस्थी को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक हजार बसें भेजने की बात कही.

इसके बाद संदीप सिंह और गृह विभाग के बीच केवल चिट्ठियां चलती रहीं लेकिन बसें न चल सकीं. प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद से कुशीनगर के तुमकुही राज विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रियंका गांधी के करीबी अजय कुमार लल्लू अपनी छवि एक 'धरना मैन' की बना चुके हैं. आगरा में राजस्थान और उत्तर प्रदेश सीमा पर कांग्रेस की ओर से मुहैया बसों से मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की मांग करते हुए अजय कुमार लल्लू ने गिरफ्तारी दी. वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी संदीप सिंह और अजय कुमार लल्लू पर बसों की सूची में गड़बड़ी करने के आरोप में एफआइआर दर्ज करके अजय लल्लू को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया.

लॉकडाउन के चौथे चरण की शुरुआत में जिस तरह से प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस योगी सरकार के विरोध में आक्रामक हुई है उसने उत्तर प्रदेश में विपक्ष की राजनीति में नए बदलाव का संकेत दिया है. राजनैतिक विश्लेषक और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सोशल वर्क विभाग के प्रोफेसर अजित कुमार बताते हैं, ''प्रियंका गांधी कांग्रेस को प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रामक रंग-ढंग में लाकर यूपी की मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में ढालने की कोशिश कर रही हैं. यह प्रयास कितना रंग लाएगा, वह इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी का संगठन कितना तैयार है.''

हालांकि प्रदेश कांग्रेस के नेता इन हालात की तुलना प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले की स्थितियों से करते हैं. कांग्रेसी नेताओं का तर्क है कि जैसे भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मजबूत संगठन के बिना केवल मुद्दों को हवा देकर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 पर विजय हासिल की थी, कुछ उसी तरह कांग्रेस भी बेहद आक्रामक ढंग से योगी सरकार के खिलाफ मुद्दों को उठाकर माहौल बनाना चाहती है. इसके लिए चेहरे के रूप में प्रियंका ने खुद को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुकाबिल खड़ा किया है. वे योगी सरकार के कामकाज के खिलाफ लगातार सोशल मीडिया के जरिए हल्ला बोल रही हैं.

उन्होंने राज्य के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पार्टी के शीर्ष दो दर्जन पदाधिकारियों को लेकर एक व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाया है, जिनके जरिए उन तक सभी सूचनाएं पहुंच रही हैं. इन पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग जोनवार व्हाट्सऐप ग्रुप बना रखे हैं. इन पर आने वाली महत्वपूर्ण सूचानाओं को ये प्रियंका गांधी के ग्रुप में डाल देते हैं और प्रियंका का कार्यालय इसे क्रॉसचेक कर उसे ट्वीट करता है.

प्रवासी मजदूर के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरकर सूबे के अन्य विपक्षी दलों से बढ़त लेने वाली कांग्रेस इस मुद्दे को हाथ से नहीं जाने देना चाहती. अब पार्टी प्रवासी मजदूरों को रोजगार के मसले पर योगी सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है. इसके लिए पार्टी ने दो बार ब्लॉक प्रमुख रही और वर्तमान में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्र को कमान सौंपी है. आराधना कहती हैं, ''योगी सरकार ने प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में रोजगार देने का निर्देश दिया है. अब तक प्रदेश में 25 लाख से अधिकप्रवासी मजदूर आ चुके हैं. क्या मनरेगा में इतने काम की मांग है जिनमें और लाखों मजदूरों को रोजगार दिया जा सके? प्रदेश सरकार एक बार फिर मजदूरों के साथ छल की योजना तैयार कर चुकी है.'' आराधना कहती हैं कि सरकार अगर वाकई प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने में गंभीर है तो उसे लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं का कच्चा कार्य भी मनरेगा के मजदूरों से करवाना चाहिए.

लॉकडाउन में प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन क्लास और ऑनलाइन परीक्षाएं कराने की योगी सरकार की योजना का विरोध कर कांग्रेस छात्रों के बीच पैठ बनाना चाहती है. इसके लिए कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टुडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआइ) ने मोर्चा संभाला है. एनएसयूआइ के प्रदेश महामंत्री प्रणव पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ऑनलाइन क्लासेज और परीक्षाओं को रोकने की मांग की है. पत्र में प्रणव पांडेय ने लिखा है कि ऑनलाइन परीक्षाएं और कक्षाएं केवल आपात स्थितियों में ही जरूरी हैं लेकिन जिस तरह से योगी सरकार यह व्यवस्था सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू करने की योजना बना रही है उससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आएगी. पांडेय का आरोप है कि ऑनलाइन क्लासेज से गरीब छात्रों पर महंगा इंटरनेट प्लान खरीदने से आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है. प्रदेश सरकार में ऑनलाइन पढ़ाई के तौर-तरीके शुरू करने के विरोध में एनएसयूआइ मुख्यमंत्री योगी के कार्यालय को एक लाख छात्रों के ईमेल भेजने की योजना बना रहा है.

इसके अलावा एनएसयूआइ लॉकडाउन के चलते बड़े पैमाने पर रुकी हुईं भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों पर चयन के लिए नए सिरे से नियम बनाने की मांग कर रहा है. वाराणसी में एनएसयूआइ के एक पदाधिकारी प्रखर सिंह बताते हैं, ''लॉकडाउन के चलते जिस तरह सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को आगे बढ़ाया है उससे बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के ओवरएज के चलते बाहर हो जाने का खतरा मंडराने लगा है. सरकार को आगे खिसकाई गई भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को उम्र में छूट देनी चाहिए.''

लॉकडाउन में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की पहुंच आम लोगों तक बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया है. उनके निर्देश पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कोरोना महामारी में आम लोगों की मदद के लिए 'यूपी मित्र' नाम का चैट पोर्टल लॉन्च किया है. इस चैट पोर्टल के जरिए आम लोगों की समस्याओं को सूचीबद्ध किया जा रहा है. प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को उठाने के लिए इस पोर्टल के जरिए पार्टी को जानकारियां जुटाने में काफी मदद मिली.

लॉकडाउन में प्रियंका गांधी की सिपहसालार की भूमिका में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्र लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश सरकार की कमियों को सामने रख रही हैं. आराधना प्रियंका गांधी और प्रदेश कांग्रेस के बीच लिंक भी बनी हुई हैं. आराधना बताती हैं, ''पूरे प्रदेश में हम जगह-जगह रसोईघर चला रहे हैं, गाजियाबाद, हापुड़, कानपुर, इलाहाबाद, लखीमपुर खीरी, लखनऊ समेत 17 जिलों में बना बनाया खाना जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जा रहा है. पूरे सूबे में हमारी जिला कमेटियां जरूरतमंद लोगों को राशन मुहैया करवा रहीं हैं.'' आराधना का दावा है कि कांग्रेस लॉकडाउन के दौरान 65 लाख लोगों को भोजन मुहैया करा चुकी है. इसके अलावा प्रियंका गांधी ने प्रदेश के लोगों में बांटने के लिए एक लाख मास्क भी भिजवाए, जिसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 9 मई से अभियान चलाकर बंटवाया है.

अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती लॉकडाउन के वक्त बने माहौल को अपने कार्यकर्ताओं के जरिए बूथ पर मौजूद वोटर तक पहुंचाना है. मेरठ विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर मनोज सिवाच बताते हैं, ''पिछले कई वर्षों में कांग्रेस किसी मुद्दे को लेकर माहौल तो बनाती है पर उसे बरकरार नहीं रख पाती. किसी भी मुद्दे को काफी दिनों तक गर्म रखने में पार्टी के संगठन की क्षमता की परख होती है और इसी में कांग्रेस की कमजोरी सामने आ जाती है. लॉकडाउन के बाद इसी कमजोरी से निजात पाना ही कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती होगी.''

लॉकडाउन के बाद राजनीति के नए रंग-ढंग में खुद को ढालने के लिए कांग्रेस पूरी तरह से तैयार हो रही है. कांग्रेस के शीर्ष नेता रोज प्रदेशस्तरीय नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रूबरू हो रहे हैं. यह प्रदेशस्तरीय नेता सभी जोनल अध्यक्षों और फ्रंटल संगठनों के नेताओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बैठक कर रहे हैं. सभी जोनल अध्यक्ष अपने जिलों के कांग्रेस अध्यक्षों से निरंतर संपर्क के नए तौर-तरीकों को अपना चुके हैं. लॉकडाउन के बाद की राजनीति की यह पहली शर्त भी है.

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