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छत्तीसगढ़ः केंद्र बनाम राज्य का मुद्दा!

मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले लोगों के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे ने मचाई सियासी हलचल

भूपेश केशवानी
भूपेश केशवानी
अपडेटेड 12 मार्च , 2020

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी समझे जाने वाले सहायकों, राजनीतिकों, नौकरशाहों और व्यवसायियों के परिसरों पर आयकर विभाग के तलाशी अभियानों ने राजधानी रायपुर की सियासी गर्मी तेजी से बढ़ा दी और पूरा प्रकरण केंद्र बनाम राज्य की शक्ल ले रहा है.

छह दिन तक चले तलाशी अभियान की शुरुआत 27 फरवरी को हुई थी जिसके निशाने पर रायपुर के नवनिर्वाचित मेयर एजाज ढेबर, पूर्व मुख्य सचिव तथा रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड, उद्योग विभाग के निदेशक अनिल टुटेजा और ब्यूटी पार्लरों की शृंखला चलाने वाली उनकी पत्नी मीनाक्षी, शराब कारोबारी अमोलक भाटिया, आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री सचिवालय में उपसचिव सौम्या चौरसिया शामिल हैं. ये तलाशियां पूरी गोपनीयता के साथ आयकर विभाग की दिल्ली शाखा ने लीं और कार्रवाई शुरू होने के पहले तक उसकी स्थानीय जांच इकाई को कुछ नहीं पता था. स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी इसकी सूचना नहीं दी गई और जांच दल की सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (केरिपुब) को लाया गया था.

आयकर विभाग का कहना था कि यह कार्रवाई उस सूचना के आधार पर हुई थी जिसमें बताया गया था कि शराब तथा खनन व्यवसायों के साथ ही नोटबंदी के वक्त जमा किए गए धन की निकासी से आ रही बिना लिखा-पढ़ी वाली नकद धनराशियां लोकसेवकों के पास पहुंच रही थीं. आयकर विभाग की एक विज्ञप्ति में कहा गया, ''इन तलाशियों में बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई है. करीब 150 करोड़ रु. के बिना लेखे वाले लेन-देनों का पता चला है जिसके जब्त किए गए साक्ष्यों की जांच-पड़ताल के बाद और बढऩे का अंदेशा है.''

इन तलाशियों की मंशा के बारे में रायपुर में तरह-तरह की अफवाहें फैलीं. आयकर विभाग से इन छापों में मिली चीजों के बारे में किसी विश्वसनीय सूचना के अभाव ने भी अफवाहों को बढ़ाया. तलाशी अभियान के पीछे एक बड़े औद्योगिक घराने का हाथ होने के चर्चों के अलावा दिल्ली तक पहुंचने वाली राजनैतिक धन-संग्रहण व्यवस्था का पता लगाने और उसे नष्ट करने के प्रयासों की बात भी चली. राज्य में मुख्यमंत्री पद के हमेशा एक से ज्यादा दावेदारों की मौजूदगी के कारण कांग्रेस की स्थानीय राजनीति पर इसके प्रभावों के बारे में भी कयासबाजी हुई.

कांग्रेस की स्थानीय इकाई के विरोध जताने के बाद ये तलाशियां जल्दी ही केंद्र बनाम राज्य मुद्दा बन गईं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तुरंत दिल्ली गए जहां उनकी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उनके प्रति समर्थन जताया. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ये तलाशियां पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के कार्यकाल के भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने का परिणाम हैं.

ऐसी भी स्थिति आई कि रायपुर पुलिस आयकर विभाग के लोगों को लाने-ले जाने में लगी कारों को 'नो पार्किंग जोन' में खड़े होने के आरोप में खींच ले गई, वहीं कांग्रेसियों ने स्थानीय आयकर कार्यालय का घेराव किया. भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिख कर कहा कि ये तलाशियां प्रधानमंत्री की 'सहकारी संघवाद' की भावना के खिलाफ हैं और केरिपुब का 'दुरुपयोग' किया गया. इससे पहले उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि अगर तलाशियों से सरकारें अस्थिर होतीं तो देश की सभी राज्य सरकारें गिर चुकी होतीं.

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