फरवरी की 24 तारीख को चित्तूर के प्रथम अतिरिक्त जिला जज एम. वेंकट हरिनाथ ने 27 वर्षीय मोहम्मद रफी को पांच साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई. यह निर्मम वारदात पिछले साल 6 नवंबर को मदनपल्ली के निकट अंगल्लू गांव में हुई थी. उसके महज दस दिन बाद पुलिस की 100 सदस्यों की टीम ने मोहम्मद रफी को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वह छत्तीसगढ़ भागने की कोशिश कर रहा था. गिरफ्तारी के 17 दिन के भीतर आरोप-पत्र दाखिल किया गया और मात्र 90 दिन में अदालती कार्रवाई पूरी हो गई.
यह महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा दिलाने के लिए आंध्र प्रदेश में नए सख्त रवैये का उदाहरण है. मुख्यमंत्री वाइ.एस. जगनमोहन रेड्डी ने कहा, ''निर्भया मामले में दोषियों को सजा दिलाने में आठ साल लग गए पर आंध्र प्रदेश अपराध अधिनियम संशोधन कानून, 2019 के तहत अपराधियों को एक महीने से भी कम समय में सजा हो जाएगी.'' इस दिशा में काम करते हुए राज्य ने कई कदम उठाए हैं.
जघन्य अपराधों तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की गहन जांच के लिए खास तौर से 18 पुलिस स्टेशनों—हर पुलिस जिले में एक—को समर्पित किया गया है. इन स्टेशनों में पर्याप्त स्टाफ है जिनमें से आधी संख्या महिलाओं की है. उन्हें समयबद्ध तरीके से सही जांच करने पर 30 फीसद का अतिरिक्त वेतन भी दिया जाता है. राज्य की फोरेंसिक क्षमता को भी बढ़ाया गया है. ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए हर जिले में एक अदालत गठित कर दी गई है. साथ ही एक मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है ताकि देरी किए बिना इस तरह के अपराधों की सूचना दी जा सके.
वहीं नया कानून राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. इसमें बलात्कार और गैंगरेप के अपराध में फांसी की सजा का प्रावधान है, साथ ही ऐसे मामलों में 21 दिन के भीतर मुकदमा पूरा करना अनिवार्य किया गया है. इसमें सात दिन में जांच पूरी करने और मुकदमे की कार्रवाई 14 कार्यदिवसों के भीतर पूरी करने का प्रावधान है. वहीं, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में उम्रकैद का भी प्रावधान किया गया है. विशेष अदालत से सजा का फैसला आने के बाद दोषी व्यक्ति 60 दिन के भीतर ऊपरी अदालत में याचिका दे सकता है, जिसमें ऊंची अदालतों को 45 कार्यदिवसों के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा.
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